राज्यसभा उपसभापति के चुनाव में होगी विपक्षी एकता की परीक्षा
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आगामी लोकसभा चुनाव के लिए बन रहे विपक्षी मोर्चे की पहली परीक्षा 18 जुलाई से शुरू हो रहे संसद सत्र के दौरान होगी जब राज्य सभा के उपसभापति का चुनाव होगा। कांग्रेस के पीजे कुरियन के राज्यसभा से रिटायर होने की वजह से ये चुनाव हो रहे हैं। हालांकि 69 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी भारतीय जनता पार्टी उपसभापति पद के लिए सर्वसम्मति जुटाने की कोशिश कर रही है लेकिन विपक्ष के पास 123 सदस्य हैं और वह सत्ता पक्ष को अपनी ताकत दिखाना चाहता है। लेकिन वाईएसआर कांग्रेस जैसे कुछ दलों के बारे में माना जा रहा है कि एनडीए का समर्थन भी कर सकते हैं। इसीलिए यह मुकाबला बहुत रोचक हो गया है।
ऐसे में 13 सदस्यीय अन्ना डीएमके और नौ सांसदों वाले बीजू जनता दल की अहम भूमिका होगी। यदि वे संयुक्त विपक्ष के साथ जाएंगे तो उसकी जीत पक्की हो जाएगी। लेकिन यदि वे बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन करते है जिसके पास 96 सांसद हैं, तो वह लड़ाई की स्थिति में आ जाएगा। लेकिन उसे अभी भी शिवसेना के रुख का भरोसा नहीं है कि वह किसके साथ जाएगा। इसीलिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश कर रहे हैं जिसका नाम सभी को स्वीकार्य हो। बुधवार को विपक्ष की ओर से तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सुखेंदु शेखर रॉय का नाम उछाला गया।
लेकिन उनकी दावेदारी सबसे पहले उनकी अपनी पार्टी ने ही खारिज कर दी। फिलहाल 245 सदस्यीय राज्यसभा में चार सीटें खाली हैं यानी जीत के लिए किसी भी पक्ष को 121 सांसदों का वोट चाहिए। इन चार में से तीन सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होने हैं। माना जा रहा है कि चुनाव से पहले सरकार की संतुष्टि पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तीन सदस्यों को नामांकित कर देंगे।
माना जा रहा है कि सत्तापक्ष की ओर से किसी ऐसे व्यक्ति का नाम प्रस्तावित किया जाएगा जिसका विरोध करना विपक्षी दलों के लिए कठिन होगा। साथ ही इस मुद्दे पर उनके आपसी मतभेद भी उभर कर आ सकते हैं जिनका चुनावी लाभ बीजेपी को ही मिलेगा।