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President Election: 'आदिवासियों के लिए मुर्मू से ज्यादा काम किया', यशवंत सिन्हा ने राष्ट्रपति उम्मीदवारी पर ठोकी ताल
Thu, 23 Jun 2022 08:37 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Thu, 23 Jun 2022 08:37 PM IST
सार
2018 में भाजपा छोड़ने से पहले भाजपा के साथ लंबे समय तक जुड़े रहने के बावजूद विपक्ष के समर्थन के सवालों के जवाब में सिन्हा ने कहा कि उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली पार्टी के सदस्य के रूप में अपने रिकॉर्ड पर गर्व है।
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यशवंत सिन्हा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विपक्ष से राष्ट्रपति के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री के रूप में आदिवासियों और जनजातियों के कल्याण के लिए एनडीए से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू से ज्यादा काम किया है। यशवंत सिन्हा ने इस दौरान झारखंड के राज्यपाल सहित विभिन्न पदों पर काम के दौरान द्रौपदी मुर्मू द्वारा आदिवासियों और जनजातियों के कल्याण के लिए किए गए कामों के उनके रिकॉर्ड पर सवाल उठाया है।
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वाजपेयी सरकार में अपने काम पर गर्व
2018 में भाजपा छोड़ने से पहले भाजपा के साथ लंबे समय तक जुड़े रहने के बावजूद विपक्ष के समर्थन के सवालों के जवाब में सिन्हा ने कहा कि उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली पार्टी के सदस्य के रूप में अपने रिकॉर्ड पर गर्व है।
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इस दौरान उन्होंने वर्तमान भाजपा पर तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि मौजूदा भाजपा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी की भाजपा के सामने पहचानने योग्य भी नहीं है। इतना ही नहीं, उन्होंने आरोप भी लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में लोकतांत्रिक मूल्यों को खतरा है।
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विचारधारा की लड़ाई
समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस बार का राष्ट्रपति चुनाव पहचान की नहीं बल्कि विचारधारा की लड़ाई है। सिन्हा ने कहा कि यह पहचान का सवाल नहीं है, सवाल यह है कि वह हमारी राजनीति में किस विचारधारा का प्रतिनिधित्व करती हैं और मैं किस विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता हूं। उन्होंने कहा कि वह भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और संरक्षण के लिए खड़े हैं।
मुर्मू पर उठाया सवाल
आदिवासियों के लिए द्रौपदी मुर्मू द्वारा किए जाने वाले कामों पर सवाल उठाते हुए विपक्ष से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ने कहा कि वह आदिवासी समुदाय से हैं। लेकिन उन्होंने क्या किया है जब वह झारखंड की राज्यपाल थीं। आदिवासियों की स्थिति में सुधार के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए? उन्होंने आगे कहा कि एक विशेष समुदाय में पैदा होने से आप स्वतः ही उस समुदाय के श्रेष्ठ नहीं बन सकते।
उन्होंने आगे कहा कि जब मैं वित्त मंत्री था तब मैंने जो बजट पेश किए थे, उनमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं सहित कमजोर वर्गों के लिए विशेष प्रावधान किए गए थे। मैं आज दावा कर सकता हूं कि मैंने वंचित समुदायों और आदिवासियों के लिए उनसे कहीं अधिक किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पहचान की राजनीति पर निर्भर है जबकि विपक्ष एक वैचारिक संदेश दे रहा है।
यशवंत सिन्हा सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार नहीं : माकपा सांसद
पश्चिम बंगाल से माकपा के एकमात्र सांसद विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि यशवंत सिन्हा राष्ट्रपति पद के लिए ‘‘सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार’’ नहीं हैं, हालांकि, विपक्षी एकता के लिए इसे स्वीकार करना होगा। भाजपा और तृणमूल कांग्रेस में रह चुके सिन्हा की उम्मीदवारी पर आपत्ति जताते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि कोई और उम्मीदवार चुना जा सकता था, जो ज्यादा स्वीकार्य होता।