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23 मिनट, छह नायक और निशाने पर आतंकी: कहानी ऑपरेशन सिंदूर के जांबाजों की, जिनकी बदौलत घुटनों पर आया पाकिस्तान

Thu, 07 May 2026 06:18 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Thu, 07 May 2026 06:18 PM IST
सार

ऑपरेशन सिंदूर हुए आज एक साल हो गए। भारत ने आज के दिन ही पाकिस्तान में पनप रहे करीब 100 आतंकियों को मारा गया था। ऐसे में हम आज उन छह जांबाजों के बारे में जानेंगे, जिन्होंने पाकिस्तान के छक्के छुड़ा दिए। ग्रुप कैप्टन रंजीत सिद्धू, मनीष अरोड़ा, अनिमेष पटनी, कर्नल कोषांक लांबा, सुशील बिष्ट और रिजवान मलिक की बहादुरी ने दुश्मन को चार दिन में सरेंडर कराया।

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Operation Sindoor Valiant Warriors Story of Six Heroes who destroyed Terrorists camps
ऑपरेशन सिंदूर के जाबांज। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की खूबसूरत बायसरन घाटी में आतंकियों ने जो खूनी खेल खेला था, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। उस कायराना हमले में 26 मासूम पर्यटकों की जान गई थी, जिसके बाद पूरे भारत में आक्रोश की लहर दौड़ गई थी। लेकिन भारत खामोश बैठने वाला नहीं था। और फिर ऑपरेशन सिंदूर हुआ। आज उस घटना को एक साल बीत चुका है और यह मौका है उन नायकों को याद करने का, जिन्होंने इस ऑपरेशन के जरिए दुश्मन को उनके घर में घुसकर करारा जवाब दिया। यह कहानी सिर्फ जज्बे की नहीं है, बल्कि 'इंसान और मशीन' के उस बेजोड़ तालमेल की है, जिसने पाकिस्तान को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया।
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ऑपरेशन सिंदूर के वो छह जांबाज

  • ग्रुप कैप्टन रंजीत सिंह सिद्धू
ग्रुप कैप्टन सिद्धू इस पूरे ऑपरेशन की मुख्य कड़ी थे। वे भारतीय वायुसेना की प्रतिष्ठित नंबर-17 गोल्डन एरोस' स्क्वाडन के कमांडिंग ऑफिसर हैं, जो रफाल फाइटर जेट उड़ाती है। उन्होंने न केवल खुद रफाल उड़ाया, बल्कि ऐसी रणनीति बनाई जिससे पाकिस्तान के एयरबेस थर्रा गए। उन्होंने अपने रफाल विमानों के जरिए उन सुखोई-30-MKI विमानों को सुरक्षा (कवर फायर) दी, जो पाकिस्तान पर ब्रह्मोस मिसाइलें दागने जा रहे थे। उनकी सूझबूझ से यह मिशन सफल रहा और उन्हें वीर चक्र से नवाजा गया।
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  • ग्रुप कैप्टन मनीष अरोड़ा
ग्रुप कैप्टन अरोड़ा ने उस समय उड़ान भरी जब मौत हर तरफ मंडरा रही थी। मिशन लीडर के तौर पर उनका लक्ष्य पाकिस्तान के भीतर स्थित आतंकी ठिकाने थे। जब पाक एयर डिफेंस ने उन्हें घेरने की कोशिश की, तो उन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर विमान को जमीन के बेहद करीब उड़ाया। रात के अंधेरे में इतनी नीची उड़ान भरकर उन्होंने दुश्मन के रडार को अंधा कर दिया और अपने लक्ष्यों को पूरी तरह नष्ट कर सुरक्षित वापस लौटे।
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  • ग्रुप कैप्टन अनिमेष पटनी
एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में पटनी का मुकाबला न सिर्फ पाकिस्तान से था, बल्कि चीन की जासूसी तकनीक से भी था। चीन के सैटेलाइट लगातार पाकिस्तान को भारत की लोकेशन भेज रहे थे। पटनी ने चतुराई दिखाते हुए हर बार सैटेलाइट की रेंज में आते ही अपनी यूनिट की लोकेशन बदल दी। उनकी यूनिट ने 300 किलोमीटर दूर से ही पाकिस्तानी विमान को मार गिराया, जो एक विश्व रिकॉर्ड है।
  • कर्नल कोषांक लांबा
भारतीय थल सेना की तरफ से कर्नल लांबा ने युद्ध का रुख मोड़ दिया। उन्होंने बेहद कम समय में एम777 अल्ट्रा लाइट होवित्जर तोपों को चिनूक हेलीकॉप्टर्स की मदद से दुर्गम पहाड़ियों पर तैनात किया। दुश्मन की भारी गोलाबारी के बीच भी उनकी यूनिट डटी रही और 40 किलोमीटर की दूरी तक पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को अपनी तोपों से नेस्तनाबूद कर दिया।
 
  • लेफ्टिनेंट कर्नल सुशील बिष्ट 
लेफ्टिनेंट कर्नल बिष्ट ने आधुनिक तकनीक का बेजोड़ प्रदर्शन किया। उन्होंने पारंपरिक अनुभव के साथ-साथ स्पेस टेक्नोलॉजी और सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल किया। लेटेस्ट सैटेलाइट डेटा के जरिए उन्होंने आतंकियों के छिपे हुए ठिकानों की सटीक पहचान की और उन पर ऐसा हमला किया कि आतंकियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। इस वैज्ञानिक सोच के लिए उन्हें वीर चक्र दिया गया।
  • स्क्वाडन लीडर रिजवान मलिक
स्क्वाडन लीडर रिजवान मलिक ने ऑपरेशन सिंदूर के सबसे 'आत्मघाती' माने जाने वाले हिस्से को अंजाम दिया। वे पूरी तरह से दुश्मन की मिसाइल रेंज में थे, जहां मौत सामने खड़ी थी। इसके बावजूद, असाधारण धैर्य के साथ उन्होंने एक के बाद एक दो सटीक हमले किए और पाकिस्तान के दो महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया। 
 

कैसे फेल हुई चीन-पाकिस्तान की जासूसी?

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चीन के सैटेलाइट्स से लगातार भारतीय सेना की लोकेशन मिल रही थी। लेकिन ग्रुप कैप्टन अनिमेष पटनी ने इस जासूसी तंत्र को पूरी तरह फेल कर दिया। जैसे ही चीनी सैटेलाइट लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश करता, भारतीय यूनिट अपनी जगह बदल देती। नतीजा यह हुआ कि पाकिस्तान खाली ठिकानों पर हमला करता रहा और भारतीय एयर डिफेंस की वजह से दुश्मन का एक भी ड्रोन या मिसाइल भारतीय सीमा के अंदर प्रवेश नहीं कर सकी।
 

23 मिनट का वो 'प्रलय' जिसने मचाई तबाही

थल सेना के कर्नल लांबा और लेफ्टिनेंट कर्नल बिष्ट ने यह साबित किया कि भारतीय सेना तकनीक और साहस में दुश्मन से मीलों आगे है। चिनूक हेलीकॉप्टर और एम777 तोपों के मेल ने पहाड़ियों पर बैठे आतंकियों के लिए काल का काम किया। सैटेलाइट तस्वीरों के सटीक इस्तेमाल से आतंकियों के ठिकानों को नक्शे से ही मिटा दिया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गर्व से कहा है कि इस ऑपरेशन में तीनों सेनाओं के बीच जो तालमेल दिखा, उसने पाकिस्तान को ऐसा दर्द दिया है जिसे वह कभी नहीं भूल पाएगा।

 

'इंसान और मशीन' का घातक मेल

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का राज जांबाज सैनिकों का फौलादी जिगर और रफाल, सुखोई, ब्रह्मोस एवं एस-400 जैसे आधुनिक हथियारों का सही इस्तेमाल था। जब इंसान का अटूट दिमाग और मशीन की अचूक ताकत मिलती है, तो जीत निश्चित होती है। आज हमारे ये असली हीरो सीमाओं पर डटे हैं ताकि देश चैन की नींद सो सके। इन सैनिकों के जज्बे ने पाकिस्तान की हर चाल को नाकाम कर महज चार दिनों में उसे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।


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