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सुप्रीम कोर्ट की ‘करोड़पति सांसद’ संबंधी टिप्पणी पर राज्य सभा सदस्यों ने जताई नाराजगी

Thu, 23 Mar 2017 10:11 PM IST
amarujala.com- presented by: रोहित कुमार पोरवाल
amarujala.com- presented by: रोहित कुमार पोरवाल Updated Thu, 23 Mar 2017 10:11 PM IST
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Only Parliament can decide how to spend public money: FM Arun Jaitley
सांकेतिक चित्र

कार्यपालिका और न्यायपालिका की भूमिकाओं के बीच अंतर को रेखांकित करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बृहस्पतिवार को कहा कि जनता का धन कैसे खर्च किया जाए, इसकी मंजूरी देने का अधिकार केवल संसद को है और वही यह कानून बना सकती है कि सांसदों को कितनी पेंशन दी जा सकती है।

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राज्यसभा में बृहस्पतिवार को जेटली ने कहा, ‘यह एक निर्विवाद संवैधानिक रुख है कि जनता का धन संसद की मंजूरी के बाद ही खर्च किया जा सकता है। इसलिए केवल संसद ही यह तय कर सकती है कि जनता का धन कैसे खर्च किया जा सकता है। कोई अन्य संस्थान इस अधिकार का उपयोग नहीं कर सकता।’ यह बात जेटली ने तब कही जब सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट की इस कथित टिप्पणी का मुद्दा उठाया कि 80 फीसदी पूर्व सांसद ‘करोड़पति’ हैं।
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वित्त मंत्री ने कहा, ‘यह तय करने का विशेष अधिकार संसद को है कि सरकारी पेंशन लेने का हकदार कौन है और कितनी पेंशन लेने का हकदार है। यह संवैधानिक रुख है जिसे प्रत्येक संस्थान को स्वीकार करना होगा।’ 

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'सांसदों को मिलने वाली पेंशन और अन्य सुविधाएं ‘प्रथम दृष्टया’ जायज नहीं लगतीं'

Only Parliament can decide how to spend public money: FM Arun Jaitley
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

इससे पहले सपा के नरेश अग्रवाल ने व्यवस्था के प्रश्न के माध्यम से यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि सांसदों की छवि इस तरह की बन रही है मानों उनको काम किए बिना ही वेतन और पेंशन के तौर पर भारी भरकम धन राशि मिल रही है। कांग्रेस के जयराम रमेश ने कहा कि समाचार पत्र में प्रकाशित उस सर्वे को पढ़ कर वह हतप्रभ रहे गए जिसमें कहा गया है कि 80 फीसदी पूर्व सांसद करोड़पति हैं। उप सभापति पीजे कुरियन ने उनसे कहा कि वह न्यायपालिका की आलोचना न करें और अदालतों में इसका समाधान तलाशें। रमेश ने कहा कि कार्यकाल खत्म हो जाने के बाद वर्तमान 80 फीसदी सांसद भी करोड़पति नहीं होंगे। 

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कथित तौर पर कहा था कि सांसदों को मिलने वाली पेंशन और अन्य सुविधाएं ‘प्रथम दृष्टया’ जायज नहीं लगतीं। साथ ही न्यायालय ने केंद्र सरकार और भारत के चुनाव आयोग से उस अपील पर जवाब मांगा जिसमें सांसदों को दी जाने वाली पेंशन और अन्य सुविधाएं रद्द करने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर की अगुवाई वाली पीठ ने इस मुद्दे पर गैर सरकारी संगठन लोक प्रहरी द्वारा की गई अपील पर लोकसभा और राज्यसभा के महासचिव को नोटिस भी जारी किए हैं।

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