{"_id":"5a77c2284f1c1b514a8b777f","slug":"one-country-one-election-dream-of-narendra-modi-have-five-challenges","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक देश-एक चुनाव: चुनाव आयोग का समर्थन, मगर यह हैं पांच चुनौतियां","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
एक देश-एक चुनाव: चुनाव आयोग का समर्थन, मगर यह हैं पांच चुनौतियां
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 05 Feb 2018 08:15 AM IST
विज्ञापन
चुनाव आयोग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 'एक देश एक चुनाव' को लेकर कई बार बात की है। पूरे देश में इस मामले पर चर्चा भी शुरू हो गई है। मगर असल में पीएम के सपने को साकार कर पाना आसान नहीं हैं, उसकी राह में कुछ मुसीबतें हैं। लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ करवाने के लिए संविधान के पांच अनुच्छेदों में संशोधन करना पड़ेगा। हालांकि, चुनाव आयोग एक साथ चुनाव करवाने के लिए अपनी सहमति दे चुका है।
विज्ञापन
एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने यहां तक कहा है कि संविधान में संशोधन करके एक साथ चुनाव करवाने के लिए विधानसभा के कार्यकाल को घटाया या फिर बढ़ाया जा सकता है। पीएम मोदी के साथ ही राष्ट्रपति ने सभी पार्टियों से एक साथ आने की अपील की है। सरकार को विपक्षी पार्टियों को एक साथ लाने के अलावा संविधान में कुछ संशोधन भी करने होंगे। इन संशोधनों में लोकसभा का कार्यकाल तय करने वाले और राज्यसभा सदस्यों के कार्यकाल को निर्धारित करने वाले अनुच्छेद 83 में संशोधन करना शामिल है।
विज्ञापन
केंद्रीय कानून मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार पीएम मोदी के सपने को साकार करने के लिए अनुच्छेद 83 के साथ ही संसदीय सत्र को स्थगित करने या खत्म करने वाले अनुच्छेद 85, विधानसभा का कार्यकाल निर्धारित करने वाले अनु्च्छेद 172 और विधानसभा सत्र को स्थगित या खत्म करने वाले अनुच्छेद 174 में संशोधन करना पड़ेगा। इसके अलावा राष्ट्रपति शासन लगाने के प्रावधान वाले अनुच्छेद 356 में भी संशोधन करना होगा।
विज्ञापन
चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह के बदलाव करने के लिए संसद के दोनों सदनों में सरकार को दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करना जरूरी है। चुनाव आयोग को एक साथ चुनाव करवाने के लिए करीब 2 हजार करोड़ रुपए की वोटिंग मशीन या वीवीपैट मशीनों की जरूरत पड़ेगी। इन मशीनों की सही तरीके से काम करने की उम्र केवल 15 साल होती है। इन्हे बदलना भी आयोग को काफी मंहगा पड़ेगा।