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ओमिक्रॉन : महाराष्ट्र में 31 संक्रमितों की अस्पताल से छुट्टी, देश के छह हवाईअड्डों पर आरटी-पीसीआर की प्री बुकिंग अनिवार्य

Tue, 21 Dec 2021 08:33 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/मुंबई।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/मुंबई। Published by: योगेश साहू Updated Tue, 21 Dec 2021 08:33 AM IST
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Omicron: 31 out of 54 Omicron patients discharged from hospital in Maharashtra, pre booking of RT PCR mandatory at six airports of the country
कोरोना जांच - फोटो : पीटीआई

महाराष्ट्र में सोमवार को 31 ओमिक्रॉन संक्रमितों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। यहां ओमिक्रॉन संक्रमितों की कुल संख्या 54 थी, इनमें से 31 मरीजों को ठीक होने के बाद छुट्टी दी गई है। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने जानकारी दी कि अब राज्य में ओमिक्रॉन के सक्रिय मामलों की संख्या 23 रह गई है। वहीं केंद्र सरकार ने ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए उठाए गए कदमों के तहत देश के छह अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों पर आरटी-पीसीआर जांच की प्रीबुकिंग अनिवार्य कर दी है।

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महाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक राज्य में सोमवार को कोरोना के ओमिक्रॉन स्वरूप का कोई नया मामला सामने नहीं आया। ऐसे में ओमिक्रॉन संक्रमितों की सूची में संख्या 54 जस की तस रही। हालांकि ओमिक्रॉन संक्रमित मरीजों की सबसे ज्यादा संख्या मुंबई में है। मुंबई में कुल 22 मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि जिन 31 मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दी गई है, उनकी आरटी पीसीआर जांच रिपोर्ट निगेटिव आई थी। 
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जानकारी के मुताबिक, एक दिसंबर से अब तक राज्य के हवाईअड्डों पर विदेशों से करीब 1,36,400 लोग आए हैं; इनमें से से करीब 20,105 लोग जोखिम वाले देशों से आए हैं। इनमें से 23,015 यात्रियों का आरटी-पीसीआर परीक्षण किया गया है और 115 कोविड-19 पॉजिटिव यात्रियों के नमूनों को जीनोम अनुक्रमण के लिए भेजा गया है, इनमें 'जोखिम वाले' देशों की यात्रा करने वाले 86 लोग भी शामिल हैं। ताकि पता लगाया जा सके कि क्या वह ओमिक्रॉन स्वरूप से संक्रमित हैं या नहीं।
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छह हवाईअड्डों पर आरटी-पीसीआर की प्री बुकिंग अनिवार्य
देश के छह शहरों के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों पर जोखिम वाले देशों से आने वाले यात्रियों के लिए आरटी-पीसीआर जांच की प्रीबुकिंग को अनिवार्य कर दी गई है। ओमिक्रॉन के बढ़ते वैश्विक मामलों के बीच केंद्र सरकार ने यह फैसला किया है। नियम सोमवार से लागू हो गया। इसमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद शामिल हैं।

टीके को नए स्वरूप पर प्रभावी बनाने के लिए करना पड़ सकता है बदलाव
कोरोना के ओमिक्रॉन स्वरूप के बढ़ते प्रकोप के बीच टीके के प्रभाव को लेकर हर कोई चिंतित है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि कोरोना टीके को नए स्वरूप पर असरदार और प्रभावी बनाने के लिए उसमें बदलाव संभव है।

महाराष्ट्र के एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन्स ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित डॉ. वीएस प्रयाग मेमोरियल ओरेशन-2021 में डॉ. गुलेरिया ने कहा कि कोरोना का ओमिक्रॉन स्वरूप पूरी तरह नया है। यह भी स्पष्ट है कि वायरस का यह नया स्वरूप हल्की बीमारी का कारक है। टीका ही संक्रमण से बचा सकता है। हमें यह भी याद रखना होगा कि वायरस के नए स्वरूप से बचाव के लिए टीकों में बदलाव संभव है।  

डॉ. गुलेरिया ने कहा कि हमारे पास दूसरी पीढ़ी का टीका है, यह हमें हमेशा याद रखना होगा।  वायरस के खिलाफ मौजूदा टीका असरदार है, लेकिन नए स्वरूप के कारण टीके से बनी इम्युनिटी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में टीकों में बदलाव या सुधार की गुंजाइश है।

उन्होंने कहा कि हर साल सामान्य बीमारियों से बचाव के लिए नए टीके का निर्माण विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा उपलब्ध कराए गए सर्विलांस आंकड़ों के अनुसार होता है। ऐसा बदलाव कोरोना वायरस के नए स्वरूप के अनुसार भी संभव है।

बाईवैलेंट टीके पर अध्ययन जारी
डॉ. गुलेरिया ने बताया कि बाईवैलेंट टीके पर अध्ययन जारी है। उन्होंने कहा, कह सकते हैं कि अगर डेल्टा और बीटा स्वरूप एक टीके में मिश्रित हो जाएं तो उसे बाईवैलेंट टीके कह सकते हैं। दक्षिण अफ्रीका से आ रही प्राथमिक रिपोर्ट के अनुसार उन लोगों में ओमिक्रॉन से संक्रमण का खतरा ज्यादा है जो पहले संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं, हालांकि इसकी पुष्टि के लिए और आंकड़ों की जरूरत है।

स्वरूप आएंगे और म्यूटेशन भी होंगे
डॉ. गुलेरिया ने स्पष्ट कहा कि नए स्वरूप आएंगे और उसमें म्यूटेशन भी होंगे। वायरस अधिक संक्रामक हो सकता है, जीवित रहने के लिए वो तेजी से अपना दायरा बढ़ा सकता है। ऐसी स्थिति में अगर हमने सुरक्षा मानकों में लापरवाही की या कोरोना सम्मत व्यवहार का पालन नहीं किया तो स्थितियां वायरस के अनुकूल बन सकती है, जो हमारे लिए या देश के लिए खतरनाक या चिंताजनक हो सकती हैं।

युवाओं को शिकार बना रहा स्वरूप
डॉ. गुलेरिया ने यह भी कहा कि दक्षिण-अफ्रीका से मिल रही जानकारी के अनुसार यह स्वरूप बीमारी के हल्के लक्षण का कारक है। हालांकि यह भी निकलकर सामने आ रहा है कि यह युवाओं को अपना शिकार बना रहा है। उन्होंने कहा कि ओमिक्रॉन कितना अधिक खतरनाक और घातक होगा यह आने वाले कुछ सप्ताह में पता चल जाएगा। इसी के अनुसार आगे की रणनीति बनानी होगी।

जीनोम सीक्वेंसिंग अब अत्यधिक अहम
डॉ. गुलेरिया ने कहा कि वायरस का नया स्वरूप जिस तेजी से बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में जीनोम सीक्वेंसिंग अत्यधिक अहम हो गई है। बड़े पैमाने पर सीक्वेंसिंग करनी होगी। टीकाकरण की चुनौतियों पर उन्होंने कहा कि टीकों का बराबरी में वितरण ही टीकाकरण का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। हर व्यक्ति को टीका लगेगा तभी कोरोना से मजबूती से लड़ा जा सकेगा। सावधानी ही भविष्य के सभी खतरों से बचाएगी।

राहत : संक्रमण की वजह से मौतों में 50% की कमी
देश में लंबे समय बाद कोरोना से मौतों में कमी दर्ज की गई है। पिछले एक दिन में करीब 50% तक यह कमी देखने को मिली है। सोमवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश में संक्रमण के चलते एक दिन में 132 लोगों की मौत हुई है। इससे पहले रविवार को 264 मौतें दर्ज की गई थीं। वहीं पिछले एक दिन में 6,563 नए मामले सामने आए हैं और 8,077 लोग स्वस्थ हुए हैं।

नाक से बूस्टर खुराक देने की मांगी अनुमति
भारत बायोटेक कंपनी ने नाक के जरिए बूस्टर खुराक देने की अनुमति मांगी है। कंपनी ने सोमवार को केंद्रीय औषधि नियंत्रण संगठन की विशेषज्ञ कार्यकारी समिति को आवेदन भेजा है जिसमें तीसरे चरण के परीक्षण का जिक्र करते हुए कंपनी ने यह अनुमति मांगी है। कंपनी का दावा है कि नाक के जरिए वैक्सीन देने की इस तकनीक का इस्तेमाल कोवाक्सिन ही नहीं बल्कि कोविशील्ड जैसी दूसरी वैक्सीन में भी किया जा सकता है।

28 दिन तक चलेगी कोवाक्सिन की शीशी
कोरोना के खिलाफ देश की पहली स्वदेशी कोवाक्सिन में वैज्ञानिकों और बदलाव किया है। इसके तहत एक बार शीशी खुलने के साथ यह 28 दिन तक चल सकती है। अभी तक चार घंटे में ही सभी खुराक लगाना जरूरी था। सोमवार को हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी ने एक बताया कि  इसके लिए वैक्सीन की शीशी को 2 से आठ डिग्री के तापमान पर रखे रहना बहुत जरूरी है।

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