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Old Pension: क्या 18 माह के एरियर और पुरानी पेंशन पर राजी होगा केंद्र? विरोध की तैयारी में जुटीं 436 यूनियनें

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 15 Nov 2022 05:48 PM IST
सार

Old Pension: श्रीकुमार कहते हैं, केंद्र सरकार के सभी विभागों में एनपीएस को लेकर भारी रोष है। उनकी सामाजिक सुरक्षा की गारंटी भी नहीं है। डिफेंस के सिविल सेक्टर में पिछले एक साल से अनुकंपा आधार पर नौकरी नहीं दी जा रही है। कोरोनाकाल में 150 कर्मियों की मौत हुई थी, अभी तक किसी भी कर्मी के आश्रित को नौकरी नहीं मिल सकी...

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Old Pension scheme: Will center agree to pay arrears and ops, employees unions are preparing for the protest
Old Pension Scheme - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा कराने के लिए विरोध की एक राष्ट्रव्यापी रणनीति बनाई जा रही है। कानपुर में 15 नवंबर से 18 नवंबर तक आयोजित हो रही अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ 'एआईडीईएफ' की राष्ट्रीय सम्मेलन में पुरानी पेंशन बहाली और कोरोनाकाल में डीए का बकाया यानी एरियर सहित करीब दर्जनभर मांगों पर चर्चा होगी। इस कन्वेंशन में 436 मान्यता प्राप्त यूनियनों के 600 से अधिक वरिष्ठ पदाधिकारी भाग ले रहे हैं। पिछले दिनों 'स्टाफ साइड' की राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने भी कैबिनेट सेक्रेटरी को एक पत्र लिखा था। इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार के सभी कर्मचारियों, जिनमें केंद्रीय अर्धसैनिक बल भी शामिल हैं, ने नेशनल पेंशन स्कीम 'एनपीएस' का विरोध किया है।

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इन मुद्दों पर होगी चर्चा

अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ 'एआईडीईएफ' के महासचिव सी. श्रीकुमार का कहना है कि यह संगठन डिफेंस से जुड़े चार लाख से अधिक सिविल कर्मचारियों की संख्या के 70 फीसदी हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। इनमें 41 आयुद्ध कारखाने, 52 डीआरडीओ लैब, एमईएस, डीजीक्यूए, आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के सिविल कर्मचारी शामिल हैं। चार दिवसीय राष्ट्रीय कन्वेंशन में कई मांगों पर चर्चा होगी। जो प्रस्ताव पास किए जाएंगे, उनमें 41 आयुद्ध कारखानों को निगम में तब्दील करने का विरोध, इन कारखानों को दोबारा से सरकारी आयुद्ध कारखानों में बदलना और सभी 41 आयुद्ध कारखानों को पूरा वर्क लोड देना, शामिल है। इसमें टीसीएल कानपुर के अंतर्गत आने वाले चार आयुद्ध कारखाने भी शामिल हैं।

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आयुद्ध कारखानों के कर्मियों को उनकी रिटायरमेंट तक डिफेंस सिविल कर्मचारी/केंद्र सरकार कर्मचारी का दर्जा बहाल किया जाए। नई पेंशन स्कीम यानी एनपीएस को खत्म कर दोबारा से पुरानी पेंशन लागू हो। ट्रेंड डिफेंस अप्रेंटिस को विभिन्न कारखानों एवं इकाइयों में नियुक्ति प्रदान की जाए। डिफेंस क्षेत्र के ऐसे सिविल कर्मी, जो नौकरी के दौरान मारे गए हैं, उनके आश्रितों को सौ फीसदी जॉब मुहैया कराई जाए। आठवें वेतन आयोग का गठन बिना किसी देरी के हो। कन्वेंशन में कई दूसरी मांगों पर भी चर्चा होगी।

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इन मुद्दों पर मुखर हैं कर्मचारी

श्रीकुमार कहते हैं, केंद्र सरकार के सभी विभागों में एनपीएस को लेकर भारी रोष है। कर्मियों को इससे भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। उनकी सामाजिक सुरक्षा की गारंटी भी नहीं है। बतौर श्रीकुमार, डिफेंस के सिविल सेक्टर में पिछले एक साल से अनुकंपा आधार पर नौकरी नहीं दी जा रही है। कोरोनाकाल में 150 कर्मियों की मौत हुई थी, अभी तक किसी भी कर्मी के आश्रित को नौकरी नहीं मिल सकी। निगम बनने के बाद तो हालात बिल्कुल खराब होते जा रहे हैं। कन्वेंशन में यह चर्चा होगी कि इन मार्गों को पूरा कराने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर किस तरह से विरोध किया जाए। न केवल केंद्र सरकार के महकमे, बल्कि राज्य सरकारों की कर्मचारी यूनियन भी उनके साथ हैं। खासतौर पर पुरानी पेंशन और डीए राशि का 18 माह का एरियर, इन मुद्दों को लेकर केंद्र व राज्य सरकार के कर्मचारी मुखर हैं। पहले भी केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया है। अब इस कन्वेंशन में संयुक्त तौर पर विरोध प्रदर्शन करने की रणनीति बनेगी।

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