Old Pension: हड़ताल से पहले राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री के पास पहुंची OPS की अर्जी, दिया पांच करोड़ लोगों का हवाला
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विस्तार
देश में पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल की तैयारी हो रही है। हालांकि अभी तक नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) द्वारा गठित सात सदस्यीय कमेटी ने हड़ताल की तिथि की घोषणा नहीं की है। नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने 19 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा है। इससे पहले उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर पत्र लिखा था। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में बंधु ने कहा है कि देश के करोड़ों कर्मचारी, पुरानी पेंशन व्यवस्था से वंचित हैं। इसके चलते कर्मचारियों का भविष्य असुरक्षित एवं अंधकारमय हो गया है। अन्य कर्मियों के साथ ही देश का शिक्षक समुदाय भी अपने भविष्य को लेकर बहुत चिंतित है। पुरानी पेंशन का मामला, एक करोड़ शिक्षकों-कर्मचारियों के साथ-साथ एक परिवार के पांच सदस्य, यानी लगभग 5 करोड़ लोगों से सीधा जुड़ा हुआ है।
विजय कुमार बंधु ने कहा, नई पेंशन व्यवस्था 'एनपीएस' के दुष्परिणाम अब सामने आ रहे हैं। एनपीएस में किसी को 1200 रुपये, 1800 रुपये एवं 2500 रुपये बतौर पेंशन मिल रहे हैं। इतनी कम राशि में कर्मियों या उनके परिजनों का इलाज तक नहीं हो पा रहा। बाकी जिम्मेदारियों का निर्वहन कैसे होता है, ये अंदाजा लगाया जा सकता है। देश के विकास में जिन कर्मचारियों ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण 35 साल दिए हों, राष्ट्र का भविष्य संवारने में योगदान दिया हो, आज उनका स्वयं का भविष्य अंधकारमय है। नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने अपने पत्र में कहा, यह न्यायोचित नहीं है। कर्मचारी संगठनों के लगातार दबाव के बाद कई प्रदेश सरकारों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल कर दी है।
ऐसे में केंद्र व बाकी राज्यों की सरकारों को भी ओपीएस लागू करनी चाहिए। देश के लिए अपनी जान न्यौछावर करने वाले अर्धसैनिक बलों को भी पुरानी पेंशन व्यवस्था से वंचित कर दिया गया है। यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश की आनबान शान का प्रतीक केंद्रीय अर्धसैनिक बल, जो अपना बलिदान देकर राष्ट्र की सुरक्षा करते हैं, उन्हें भी ओपीएस से वंचित कर दिया गया है। बुढ़ापे में सामाजिक सुरक्षा से वंचित करना, अन्यायपूर्ण व कष्टदायक है।
बंधु के मुताबिक, केंद्र सरकार एनपीएस में संशोधन करने जा रही है। हम ऐसे किसी भी संशोधन के लिए आंदोलन नहीं कर रहे हैं। कर्मियों को गारंटीकृत पुरानी पेंशन ही चाहिए। अगर कोई भी कर्मचारी नेता या संगठन, सरकार के एनपीएस में संशोधन प्रस्ताव पर सहमत होते हैं, '2004' वाली गलतियां, '2024' में भी दोहराई जाएंगी। एनपीएस एक डस्टबीन है। करोड़ों कर्मियों का दस फीसदी पैसा और सरकार का 14 फीसदी पैसा, डस्टबीन में जा रहा है। यह स्वीकार्य नहीं है। पुरानी पेंशन बहाली तक, कर्मियों का आंदोलन जारी रहेगा। वित्त मंत्रालय की कमेटी की रिपोर्ट का कोई मतलब नहीं है। यह रिपोर्ट पेश हो या न हो, इससे कर्मियों को कोई मतलब नहीं है। यह कमेटी ओपीएस लागू करने के लिए नहीं, बल्कि एनपीएस में सुधार के लिए गठित की गई थी।
देश में 'पुरानी पेंशन' बहाली के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे कर्मचारी संगठनों ने केंद्र सरकार को ओपीएस लागू करने के लिए छह सप्ताह का अल्टीमेटम दिया था। यह अहम निर्णय, सात फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित हुई नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) के पदाधिकारियों की बैठक में लिया गया था। केंद्र सरकार को अनिश्चितकालीन हड़ताल का नोटिस देने और स्ट्राइक की तिथि घोषित करने के लिए एक कमेटी गठित कर दी गई है। कमेटी में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के सात पदाधिकारियों को शामिल किया गया है। इस कमेटी की बैठक, जल्द बुलाई जाएगी। इस महत्वपूर्ण कमेटी में शिव गोपाल मिश्रा, कन्वीनर (जीएस/एआईआरएफ), डॉ. एम राघवैया, को-कन्वीनर (जीएस/एनएफआईआर), कामरेड एसएन पाठक, अध्यक्ष एआईईडीएफ, कामरेड अशोक सिंह, अध्यक्ष आईएनडीडब्लूएफ, कारमेड रूपक सरकार, आईटीईएफ/कॉन्फेडरेशन, कारमेड गीता पांडे, अध्यक्ष एआईपीटीएफ और राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद यूपी के अध्यक्ष कारमेड हरि किशोर तिवारी को शामिल किया गया है। यह कमेटी तय करेगी कि पुरानी पेंशन बहाली के लिए अब अगला कदम क्या हो। अनिश्चितकालीन स्ट्राइक की तिथि घोषित करना, यह तय करने का अधिकार भी इस कमेटी को दिया गया है।