ऑफलाइन प्रवेश परीक्षा: छात्रों संग भाजपा सांसद और विधायक भी उतरे मैदान में
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षाओं में ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने की मांग को लेकर छात्रसंघ भवन पर छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह, उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, महामंत्री सिद्धार्थ सिंह गोलू समेत आठ छात्र नेताओं का बेमियादी अनशन बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। आंदोलन के समर्थन में भाजपा सांसद, विधायक समेत कई अन्य नेता तथा पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष भी आ गए हैं। इसके अलावा बृहस्पतिवार को राज्यसभा में भी यह मुद्दा उठा। इससे छात्रों के आंदोलन को नई ऊर्जा मिल गई है, तो कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू पर दबाव बढ़ गया है।
हालांकि विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन की ओर से वार्ता के लिए कोई नहीं पहुंचा। इससे छात्रों की नाराजगी और बढ़ गई है। अनशन पर बैठने वाले अन्य छात्र अजीत यादव विधायक, मानस शर्मा, सूर्य प्रकाश मिश्रा, पवन, सद्दाम हैं। विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षाओं में ऑफलाइन की मांग तथा कुलपति के व्यवहार से नाराज छात्रों ने बुधवार से बेमियादी अनशन शुरू कर दिया है। उनके समर्थन में कई कालेजों के छात्रसंघ पदाधिकारी तथा अन्य संगठनों के नेता और कार्यकर्ता पहुंचे।
दिन में तकरीबन सवा तीन बजे भाजपा सांसद महेंद्र नाथ पांडेय, विनोद सोनकर, स्वतंत्र देव सिंह, विधायक कृष्णा पासवान, एमएलसी लक्ष्मण आचार्य, सुबोध सिंह समेत कई नेताओं ने भी अनशन स्थल पर पहुंचकर उन्हें समर्थन दिया। समर्थन में अलग-अलग संगठन के प्रतिनिधियों के पहुंचने का क्रम देर रात तक जारी रहा। इस दौरान हुई सभाओं में छात्रसंघ पदाधिकारियों ने कुलपति पर तानाशाही रवैया अपनाने और उनका आंदोलन तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने मांग माने जाने तक अनशन जारी रखने की घोषणा की।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय अध्यापक संघ (ऑटा) के पदाधिकारियों तथा कई अन्य शिक्षकों ने छात्रसंघ पर छात्रों से मिलकर उनसे अनशन खत्म करने की अपील की। अध्यापकों ने छात्रसंघ पदाधिकारियों तथा अन्य छात्रों से अपील की कि वे विश्वविद्यालय प्रशासन, यूजीसी, एमएचआरडी के माध्यम से अपनी लड़ाई को आगे बढ़ाएं। अनशन जैसा फैसला विश्वविद्यालय और छात्र दोनों के हित में नहीं है।
इसी समय भाजपा सांसदों और विधायकों का प्रतिनिधिमंडल भी छात्रों के समर्थन में छात्रसंघ भवन पहुंचा। इस दौरान अध्यापकों और भाजपा नेताओं के बीच बहस भी हुई। भाजपा नेताओं ने विश्वविद्यालय के अध्यापकों से हस्तक्षेप कर कुलपति और छात्रों के बीच वार्ता कराने की अपील की। उन्होंने कुलपति के रवैया पर भी आपत्ति उठाई। सांसदों ने अध्यापाकों पर राजनीति करने का भी आरोप लगाया। इस पर संघ के अध्यक्ष प्रोफेसर रामसेवक दुबे का कहना था कि यह राजनीति का समय नहीं है। केंद्र में उन्हीं की सरकार है। वे शीर्ष नेतृत्व पर दबाव बनाकर सभी तरह के गतिरोध दूर कर सकते हैं।
छात्रों से अपील करने वाले शिक्षक प्रतिनिधिमंडल में अध्यापक संघ के अध्यक्ष प्रोफेसर राम सेवक दुबे, उपाध्यक्ष प्रोफेसर एआर सिद्दीकी, महामंत्री प्रोफेसर एसएम प्रसाद के अलावा स्टूडेंट एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन प्रोफेसर जटाशंकर, परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर एचएस उपाध्याय, प्रोफेसर आरके चौबे, प्रोफेसर शबनम हमीद, प्रोफेसर अंजनी मालवीय शामिल रहे। ऑटा अध्यक्ष के साथ संघटक कालेज शिक्षक संघ (ऑक्टा) के पदाधिकारियों की हुई बैठक में भी छात्रों ने अनशन तथा आंदोलन खत्म करने की अपील की। उन्होंने शांतिपूर्वक और न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत विश्वविद्यालय प्रशासन और यूजीसी के समक्ष अपनी मांग रखने की अपील की। बैठक में ऑक्टा के अध्यक्ष डॉ.सुनीलकांत मिश्रा, महामंत्री उमेश प्रताप सिंह, उपाध्यक्ष धीरेंद्र द्विवेदी, संयुक्त सचिव डॉ.राजेश कुमार गर्गा मौजूद रहे।