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ओडिशा: मिसाइल ‘निर्भय’ का परीक्षण, एक हजार km तक दुश्मनों के ठिकानों को कर सकती है तबाह

Tue, 07 Nov 2017 05:08 PM IST
एजेंसी/बालासोर (ओडिशा)
एजेंसी/बालासोर (ओडिशा) Updated Tue, 07 Nov 2017 05:08 PM IST
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Odisha: Subsonic cruise missile Nirbhay test fired from Chandipur integrated Test Range
'निर्भय’ का परीक्षण - फोटो : ANI
भारत ने मंगलवार को स्वदेश निर्मित और लंबी दूरी की सब-सोनिक क्रूज मिसाइल ‘निर्भय’ का परीक्षण किया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित की गई इस मिसाइल का यह पांचवां प्रायोगिक परीक्षण है।
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डीआरडीओ के सूत्रों ने बताया कि अत्याधुनिक क्रूज मिसाइल को यहां चांदीपुर में एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) के लॉन्च कॉम्प्लैक्स-3 से सुबह करीब 11 बज कर 20 मिनट पर छोड़ा गया। रक्षा वैज्ञानिक इस बार बिना किसी गड़बड़ी के परीक्षण के सफल होने की उम्मीद कर रहे हैं।
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डीआरडीओ के एक वैज्ञानिक ने प्रक्षेपण के तुरंत बाद कहा कि परीक्षण की सभी शुरुआती प्रक्रिया सफल रही है। हालांकि विस्तृत आकलन के लिए ट्रैकिंग प्रणाली से डेटा हासिल किया जा रहा है। बता दें कि मिसाइल के पहले किए गए परीक्षणों में केवल 2013 में किया गया परीक्षण ही पूरी तरह सफल रहा था।

मिसाइल की खूबियां
- 200 से 300 किलोग्राम तक वजन वाले आयुध ले जाने में सक्षम
- 1000 किलोमीटर तक के दायरे में दुश्मन ठिकानों को कर सकती है तबाह
- टू स्टेज इस मिसाइल की लंबाई छह मीटर, चौड़ाई 0.52 मीटर है
- 2.7 मीटर तक फैलते हैं मिसाइल के पंख
 

उच्च क्षमता के नेवीगेशन सिस्टम से लैस

Odisha: Subsonic cruise missile Nirbhay test fired from Chandipur integrated Test Range
‘निर्भय’ का परीक्षण - फोटो : ANI
उच्च क्षमता के नेवीगेशन सिस्टम से लैस
परमाणु क्षमता से लैस इस मिसाइल में सटीक निशाने के लिए बेहद उच्च क्षमता का नेवीगेशन सिस्टम लगा है। यह नेवीगेशन सिस्टम रिसर्च सेंटर इमारत (आरसीआई) द्वारा विकसित किया गया है। रक्षा वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह मिसाइल ब्रह्मोस की कमी को पूरा करती है, क्योंकि यह 1000 किलोमीटर तक मार कर सकने में सक्षम है।

रॉकेट से विमान, फिर मिसाइल में हो जाती तब्दील
यह मिसाइल एडवांस्ड सिस्टम लेबोरेटरी द्वारा विकसित ठोस रॉकेट मोटर बूस्टर से संचालित होती है। मिसाइल के तय ऊंचाई और गति तक पहुंचते ही बूस्टर मोटर अलग हो जाता है और टर्बोफैन इंजन आगे के प्रक्षेपण के लिए स्वत: ही काम करने लगता है। इसी खासियत की वजह से यह रॉकेट से विमान और फिर मिसाइल में तब्दील हो जाती है।

अत्याधुनिक कंप्यूटर के कमांड पर खुलते हैं मिसाइल के पंख
डीआरडीओ के वैज्ञानिकों के मुताबिक, लॉन्चिंग के बाद इसका रॉकेट मोटर बंद हो जाता है और पंख बाहर निकल आते हैं। उड़ान के मार्ग को स्थिर करने के लिए मिसाइल में अत्याधुनिक कंप्यूटर लगा है। उड़ान के दौरान इसी ऑन बोर्ड कंप्यूटर के कमांड पर मिसाइल के पंख खुलते हैं। 
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