फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   OBC Reservation: Center told Supreme Court, OBC data is not there in Census 2011

OBC Reservation: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, जनगणना 2011 में नहीं है ओबीसी का डाटा 

Tue, 14 Dec 2021 10:06 PM IST
Amit Mandal अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Tue, 14 Dec 2021 10:06 PM IST
सार

सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को बताया कि एसईसीसी 2011, ओबीसी डाटा नहीं है। एसईसीसी का मतलब सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा हुआ है।

विज्ञापन
OBC Reservation: Center told Supreme Court, OBC data is not there in Census 2011
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media

विस्तार

केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सामाजिक-आर्थिक एवं जाति जनगणना (एसईसीसी) 2011 में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का डाटा नहीं है। इसे सार्वजनिक नहीं किया गया था, क्योंकि यह त्रुटिपूर्ण पाया गया था और इसमें गुमराह होने का खतरा था।

विज्ञापन


ओबीसी आरक्षण का समर्थन
सरकार ने कहा, वह पूरी तरह से ओबीसी के लिए आरक्षण का समर्थन करती है लेकिन यह अभ्यास संविधान पीठ के फैसले के अनुरूप होना चाहिए। संविधान पीठ ने राज्य के भीतर पिछड़ेपन के प्रकृति, कारण और उसके परिणाम की जांच करने के लिए एक समर्पित आयोग की स्थापना समेत तीन शर्तों के बारे में कहा था। शीर्ष अदालत महाराष्ट्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें केंद्र व अन्य अथॉरिटी को राज्यों को अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित एसईसीसी 2011 आंकड़ों का खुलासा करने का निर्देश देने की मांग की गई थी, जो बार-बार मांग के बावजूद उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया था।
विज्ञापन


केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ से कहा, न केवल आरक्षण के लिए बल्कि रोजगार, शिक्षा और अन्य के लिए भी एसईसीसी 2011 पर कोई भरोसा नहीं किया जा सकता है। मेहता ने कहा, मैंने बताया है कि यह विश्वसनीय क्यों नहीं है। यह एक अलग उद्देश्य के लिए एकत्र किया गया था और जिस कारणों के लिए गणना की गई थी वह त्रुटिपूर्ण पाया गया था। 
विज्ञापन
विज्ञापन


एसईसीसी 2011 ओबीसी डाटा नहीं है
केंद्र के सितंबर में दाखिल हलफनामे का हवाला देते हुए मेहता ने पीठ से कहा, मैंने इसे अदालत के सामने बहुत स्पष्ट रूप से रखा था। सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को बताया कि एसईसीसी 2011, ओबीसी डाटा नहीं है। एसईसीसी का मतलब सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, ओबीसी के अलावा कोई और भी हो सकता है जो सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा हो। यही कारण है कि यह डाटा त्रुटिपूर्ण है। इसे सार्वजनिक नहीं किया गया क्योंकि इससे गुमराह होने का अंदेशा था।


महाराष्ट्र के वकील शेखर नाफड़े ने तर्क दिया कि राज्य ने इस मामले में दायर अपने जवाबी हलफनामे में कहा है कि केंद्र ने संसद की एक समिति को बताया था कि 98 फीसदी डाटा सही है। अगर ऐसा है तो वह यह कैसे कह सकती है कि यह विश्वसनीय नहीं है। इस पर मेहता ने कहा, संसद में जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि किस तरह से सवाल को उठाया गया। केंद्र ने शीर्ष अदालत के समक्ष अपने हलफनामे में कहा है कि एसईसीसी 2011 के आंकड़े किसी भी आरक्षण के लिए विश्वसनीय नहीं है। पीठ ने कहा, ओबीसी के लिए आरक्षण तभी आगे बढ़ सकता है जब 2010 के संविधान पीठ के फैसले और बाद में तीन-न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दिए गए फैसले के अनुसार ट्रिपल टेस्ट का पालन हो। कोर्ट इस मामले में में अब बुधवार को सुनवाई करेगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed