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न्यूट्रिएंट सीक्वेंसिंग: खाने का क्रम बदलने से सेहत में क्रांतिकारी सुधार संभव, मधुमेह प्रबंधन में भी कारगर

Tue, 12 Aug 2025 06:21 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Tue, 12 Aug 2025 06:21 AM IST
सार

रिपोर्ट के अनुसार न्यूट्रिएंट सीक्वेंसिंग यानी भोजन के दौरान पोषक तत्वों फाइबर, प्रोटीन, फैट्स, कार्बोहाइड्रेट्स को एक विशेष क्रम में ग्रहण करने की तकनीक, हाल के दिनों में पोषण विज्ञान का एक उभरता हुआ क्षेत्र बन गई है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि व्यक्ति सबसे पहले फाइबर, फिर प्रोटीन और हेल्दी फैट्स और अंत में कार्बोहाइड्रेट्स का सेवन करता है, तो यह रक्त में शर्करा के स्तर को स्थिर बनाए रखने, पाचन को सुधारने और ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने में बेहद प्रभावी हो सकता है। 
 

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Nutrient sequencing starting meal with fiber keeps digestive system healthy
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik

विस्तार

क्या आप जानते हैं कि खाना क्या खा रहे हैं, इससे ज्यादा किस क्रम में खा रहे हैं, यह आपके मेटाबोलिज्म, ब्लड शुगर और संपूर्ण स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकता है। नेशनल जियोग्राफिक में प्रकाशित एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने बताया है कि भोजन के पोषक तत्वों को सही अनुक्रम में ग्रहण करने की विधि, जिसे न्यूट्रिएंट सीक्वेंसिंग कहा जाता है, आने वाले वर्षों में व्यक्तिगत स्वास्थ्य देखभाल की दिशा बदल सकती है।

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रिपोर्ट के अनुसार न्यूट्रिएंट सीक्वेंसिंग यानी भोजन के दौरान पोषक तत्वों फाइबर, प्रोटीन, फैट्स, कार्बोहाइड्रेट्स को एक विशेष क्रम में ग्रहण करने की तकनीक, हाल के दिनों में पोषण विज्ञान का एक उभरता हुआ क्षेत्र बन गई है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि व्यक्ति सबसे पहले फाइबर, फिर प्रोटीन और हेल्दी फैट्स और अंत में कार्बोहाइड्रेट्स का सेवन करता है, तो यह रक्त में शर्करा के स्तर को स्थिर बनाए रखने, पाचन को सुधारने और ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने में बेहद प्रभावी हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि न्यूट्रिएंट सीक्वेंसिंग कोई कठिन डाइटिंग प्लान नहीं है बल्कि यह भोजन के क्रम में एक सरल और व्यावहारिक बदलाव है, जिसे कोई भी व्यक्ति अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकता है।
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मधुमेह प्रबंधन में भी कारगर
यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी की न्यूट्रिशन साइंटिस्ट, डॉ. लुईस न्यूमैन का कहना है कि भोजन की शुरुआत फाइबर से करने पर यह पाचन प्रक्रिया को धीमा करता है और आंतों में ग्लूकोज अवशोषण पर नियंत्रण रखता है। इसके बाद प्रोटीन और फैट्स शरीर को तृप्ति का संकेत देते हैं और ब्लड शुगर स्पाइक को रोकते हैं। अंत में कार्बोहाइड्रेट्स ग्रहण करने से शरीर को ऊर्जा मिलती है, लेकिन वह अचानक थकान जैसी स्थिति पैदा नहीं करता। डायटीशियनों ने इस तकनीक को मधुमेह प्रबंधन, वजन नियंत्रण और मानसिक स्पष्टता बढ़ाने में कारगर बताया है।  न्यूट्रिएंट सीक्वेंसिंग कोई चमत्कारी समाधान नहीं है। यह तकनीक तभी प्रभावशाली सिद्ध होती है जब इसे संतुलित आहार, पर्याप्त पानी पीने और जीवनशैली से जोड़ा जाए।

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सबसे पहले सलाद फिर लें प्रोटीन

  • भोजन से पहले सलाद, हरी सब्जियां या फाइबर युक्त फल जैसे सेब, पपीता खाना शुरू करें। यह पेट में एक फाइबर बैरियर बनाता है, जो ब्लड शुगर स्पाइक को रोकता है।
  • दूसरा स्थान प्रोटीन को दें। प्रोटीन रिच खाद्य पदार्थ जैसे दाल, पनीर, अंडा या चिकन लें। इससे पाचन धीमा होता है, जिससे अनावश्यक ओवरईटिंग रुकती है।
  • तीसरे क्रम में नट्स बादाम, अखरोट, मूंगफली या सीमित मात्रा में घी को भोजन में शामिल करें। यह ब्लड शुगर को और अधिक स्थिर रखता है और हार्मोनल संतुलन बनाता है।
  • कार्बोहाइड्रेट्स को अंत में ग्रहण करें। रोटी, चावल, आलू या किसी भी प्रकार के कार्बोहाइड्रेट्स को भोजन के अंत में लें। यह क्रम शरीर को कार्ब्स से मिलने वाली ऊर्जा को नियंत्रित ढंग से अवशोषित करने में मदद करता है।
  • सजग और धीमा भोजन करें यानी माइंडफुल ईटिंग। खाने के दौरान जल्दी न करें। प्रत्येक बाइट पर ध्यान दें और शरीर के तृप्ति संकेतों को पहचानें।

न्यूट्रिएंट सीक्वेंसिंग तभी प्रभावी होती है जब भोजन के दौरान सजगता (माइंडफुलनेस) बरती जाए।

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