{"_id":"5ab7c79b4f1c1ba3238b71da","slug":"number-of-vacant-seats-increasing-every-year-in-iit-institutes-says-hrd-ministry","type":"story","status":"publish","title_hn":"IIT संस्थानों में हर साल बढ़ रही खाली सीटों की संख्या, HRD मंत्रालय के आंकड़ों से सामने आया सच","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
IIT संस्थानों में हर साल बढ़ रही खाली सीटों की संख्या, HRD मंत्रालय के आंकड़ों से सामने आया सच
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Sun, 25 Mar 2018 09:30 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आईआईटी संस्थानों में पढ़ना हर बच्चे का सपना होता है मगर इसकी कठिन परीक्षा से गुजरना उतना ही मुश्किल। आपको जानकर हैरानी होगी की पिछले पांच सालों से आईआईटी संस्थानों में कई सीटें न सिर्फ खाली रह जाती हैं बल्कि खाली सीटों की संख्या में हर साल बढ़ोतरी भी हो रही है। वहीं आईआईटी-बीएचयू इस मामले में सबसे ऊपर है।
विज्ञापन
केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय ने कुछ आंकड़े जुटाए थे जिसमें यह बात सामने आई है। खाली सीटों की इस समस्या के समाधान के लिए मंत्रालय को एक समिति का गठन करना पड़ा। समिति ने इस मुद्दे के समाधान के लिए कई सुझाव दिए हैं। पिछले साल गठित इस समिति ने इस साल के शुरू में अपनी रिपोर्ट सौंपी है।
विज्ञापन
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सभी आईआईटी संस्थानों में कुल मिलाकर लगभग 11 हजार सीटें हैं। साल 2013 से अब तक कुल 274 सीटें खाली छूट चुकी हैं।
साल 2013 में 15 सीटें, 2014 में पांच, 2015 में 39, 2016 में 96 और साल 2017 में 121 सीटें खाली रह गई थीं। वहीं आईआईटी-बीएचयू की बात की जाए तो सभी 23 आईआईटी संस्थानों में से पिछले पांच साल से यहां सबसे अधिक सीटें खाली रही हैं। वहां 2017 में 32, 2016 में 38, 2015 में 18, 2014 में तीन और 2013 में चार सीटें खाली रह गई थीं। जबकि साल 2016 में आईआईटी का दर्जा पाने वाले भारतीय खनन विद्यालय (आईएसएम) में 2016 और 2017 दोनों सालों में 23 सीटें खाली रह गई थीं।
विज्ञापन
आईआईटी कानपुर और आईआईटी हैदराबाद में 2013 से 2017 जबकि आईआईटी दिल्ली में 2013 से 2015 के बीच एक भी सीट खाली नहीं रही थी। साल 2016 और 2017 में आईआईटी दिल्ली में दो-दो सीटें खाली रही थीं। समिति ने अपनी सिफारिश में कहा है कि संस्थान रोजगार के अवसर, राष्ट्रीय आवश्यकता, उपलब्ध बुनियादी ढांचे और भविष्य के लिए अवसर के आधार पर प्रत्येक विषय में सीटों की समीक्षा कर सकते हैं।