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NSE Colocation Scam: अदालत ने मुंबई के पूर्व पुलिस प्रमुख को दी जमानत, सीबीआई ने सितंबर में किया था गिरफ्तार
Wed, 21 Dec 2022 10:48 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 21 Dec 2022 10:48 PM IST
सार
विशेष न्यायाधीश सुनैना शर्मा ने पांडे को यह कहते हुए राहत दी कि वह पहले से ही धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के एक मामले में हाईकोर्ट से जमानत पर हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) उन्हें सितंबर में गिरफ्तार किया था।
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विस्तार
दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को पूर्व पुलिस आयुक्त संजय पांडे को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) कोलोकेशन घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले और एक्सचेंज कर्मचारियों के साथ कथित फोन टैपिंग मामले में जमानत दे दी। विशेष न्यायाधीश सुनैना शर्मा ने पांडे को यह कहते हुए राहत दी कि वह पहले से ही धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के एक मामले में हाईकोर्ट से जमानत पर हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) उन्हें सितंबर में गिरफ्तार किया था।
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फोन टैपिंग मामले में एनएसई की पूर्व प्रमुख चित्रा रामकृष्णा को दिल्ली की अदालत ने दी जमानत
एनएसई कर्मचारियों की कथित अवैध फोन टैपिंग से जुड़े एक मामले में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की पूर्व प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी चित्रा रामकृष्ण को दिल्ली की एक अदालत से राहत मिली है। जमानत का आदेश देते हुए विशेष न्यायाधीश सुनैना शर्मा ने उन्हें एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो सिक्योरिटी जमा करने को कहा है। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि जब भी मामले की सुनवाई हो और उन्हें जब भी बुलाया जाए वह अदालत में पेश हों।
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न्यायाधीश ने कहा, इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि हाईकोर्ट ने ईडी से जुड़े मामले में आरोपी को पहले ही जमानत दे दी है, जो धारा 45 पीएमएलए के आलोक में जमानत देने के लिए कहीं ज्यादा सख्त शर्तों का प्रतीक है, मौजूदा मामले में मुझे आवेदक की जमानत को अस्वीकार करने का कोई कारण नहीं मिला।
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उन्होंने आगे कहा, तथ्य केवल यह है कि ईडी मामले में एचीसी के समक्ष जमानत आवेदन के लिए सीबीआई एक पार्टी नहीं थी। इस अदालत विधेय अपराधों के संबंध में एक अलग दृष्टिकोण लेने का आग्रह करने का आधार नहीं हो सकता है।
सीबीआई ने कथित एनएसई कोलोकेशन घोटाले में मामला दर्ज किया था, जिसमें स्टॉक एक्सचेंज में हेरफेर करने के लिए एनएसई कर्मचारियों के फोन टैपिंग शामिल थे। पांडे, 1986 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी 30 जून को सेवा से सेवानिवृत्त हुए।
सीबीआई ने कहा, जांच के दौरान पांडे को आईसेक सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के कामकाज और गतिविधियों से निकटता से जुड़ा हुआ पाया। कंपनी ने कथित घोटाला होने के समय एनएसई का सुरक्षा ऑडिट किया था। इस कंपनी को उन्होंने आईपीएस से इस्तीफा देने के बाद स्थापित किया था। उन्होंने इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ, जिसके कारण उन्होंने फिर पदभार ग्रहण कर लिया। उन्होंने कंपनी के निदेशक के पद से भी इस्तीफा दे दिया।
कंपनी को मार्च 2001 में पांडे द्वारा शामिल किया गया था और उन्होंने मई 2006 में इसके निदेशक के रूप में पद छोड़ दिया। आरोप है कि 2009-17 के बीच एनएसई कर्मचारियों की अवैध फोन टैपिंग की गई।