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NSA Doval: विशेष प्रतिनिधि वार्ता के लिए चीन जा सकते हैं डोभाल; जानें संभावित बीजिंग की यात्रा के पीछे की वजह

Mon, 16 Dec 2024 02:23 PM IST
अभिषेक दीक्षित पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 16 Dec 2024 02:23 PM IST
सार

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध मई 2020 में शुरू हुआ था। तब जून में गलवां घाटी में हुई झड़प के बाद दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंधों में तनाव आ गया था। यह गतिरोध एक समझौते के तहत देपसांग और डेमचोक से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद समाप्त हुआ था। सैनिकों की वापसी के समझौते को 21 अक्तूबर को अंतिम रूप दिया गया था।

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NSA Doval to likely visit China soon for Special Representative talks Latest News Update
NSA Doval - फोटो : PTI

विस्तार

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल अगले कुछ सप्ताह में बीजिंग की यात्रा कर सकते हैं। इस दौरान वे व्यापक सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि वार्ता के नए संस्करण में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। यह वार्ता करीब पांच साल के अंतराल के बाद होगी। इससे पहले विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) की वार्ता दिसंबर 2019 में नयी दिल्ली में हुई थी।

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वार्ता के इस तंत्र को बहाल करने का निर्णय 23 अक्तूबर को कजान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बैठक में लिया गया था। सूत्रों के मुताबिक, एनएसए डोभाल 23वें दौर की एसआर वार्ता में भाग लेने के लिए संभवत: जल्द ही चीन की यात्रा करेंगे। एसआर वार्ता इस महीने के अंत में या जनवरी की शुरुआत में हो सकती है। हालांकि, अभी इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है कि एसआर वार्ता किस जगह पर होगी।
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क्या है मामला?
भारत और चीन ने पांच दिसंबर को अपनी कूटनीतिक वार्ता में विशेष प्रतिनिधि वार्ता की तैयारी की थी। वार्ता के लिए भारत के विशेष प्रतिनिधि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल हैं, जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व विदेश मंत्री वांग यी कर रहे हैं। पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के कारण पिछले पांच साल में कोई विशेष प्रतिनिधि वार्ता नहीं हुई।
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मई 2020 में शुरू हुआ था सैन्य गतिरोध
भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध मई 2020 में शुरू हुआ था। तब जून में गलवां घाटी में हुई झड़प के बाद दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंधों में तनाव आ गया था। यह गतिरोध एक समझौते के तहत देपसांग और डेमचोक से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद समाप्त हुआ था। सैनिकों की वापसी के समझौते को 21 अक्तूबर को अंतिम रूप दिया गया था।


पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने की थी बातचीत
समझौते पर हस्ताक्षर होने के दो दिन बाद पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने रूस के कजान शहर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर बातचीत की थी। बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि वार्ता सहित कई वार्ता तंत्रों को बहाल करने पर सहमति व्यक्त की थी।

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