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एनएसए डोभाल से मिलेंगे चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग, डोकलाम पर हो सकती चर्चा
amarujala.com- presented by: संदीप भट्ट
Updated Wed, 26 Jul 2017 04:54 PM IST
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भारत-चीन के बीच डोकलाम में सीमा पर चल रहे गतिरोध के बीच गुरुवार को बीजिंग में ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक होने जा रही है। इस बैठक में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी हिस्सा लेंगे।
बीजिंग में हो रहे ब्रिक्स एनएसए के शिखर सम्मेलन के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और अन्य ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों से शुक्रवार को मुलाकात करेंगे। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के पांच एनएसए शी जिनपिंग से मिलेंगे।
इससे पहले शी जिनपिंग ने भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल से फोन पर बात की। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा माना जा रहा है कि अजित डोभाल और शी जिनपिंग के बीच डोकलाम को लेकर भी बात हुई हालांकि दोनों के बीच हुई बातचीत को शिष्टाचार कॉल बताया गया है।
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चीन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि दोनों सुरक्षा सलाहकारों के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता के संबंध में उनके पास पर्याप्त जानकारी है। हालांकि, उन्होंने इतना जरूर बताया कि इस मीटिंग में दोनों देशों के सुरक्षा सलाहकार दोनों देशों के संबंधों और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
बता दें कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सभी ब्रिक्स के सभी पांच सदस्य देशों के सुरक्षा सलाहकारों की मीटिंग बुलाई है।
मालूम हो कि 27-28 जुलाई को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल अपने चीन के समकक्ष यांग जेइची से इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे।
अजीत डोभाल ब्रिक्स (ब्राजील,भारत, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका) देशों के राष्ट्रीय सुलाहकारों की बैठक (27-28 जुलाई) में हिस्सा लेने को चीन के दौरे पर हैं। अजीत डोभाल और यांग जेइची भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधि के तौर पर दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के निबटारे के लिए वार्ता भी कर रहे हैं।
फिलहाल भारत ने संयमित रहकर चीन को यह संदेश दे दिया है कि वह डोकलाम के मुद्दे पर न तो झुकने जा रहा है और न ही किसी तरह के युद्ध का पक्षधर है। इसी के साथ नई दिल्ली संभावित चुनौती का आकलन करते हुए कूटनीतिक और अन्य तैयारियों को तेज कर दिया है।
समझा जा रहा है कि भारत और चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच चर्चा के बाद 16 से जारी डोकलाम गतिरोध का रास्ता निकल सकता है।
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बीजिंग में हो रहे ब्रिक्स एनएसए के शिखर सम्मेलन के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और अन्य ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों से शुक्रवार को मुलाकात करेंगे। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के पांच एनएसए शी जिनपिंग से मिलेंगे।
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इससे पहले शी जिनपिंग ने भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल से फोन पर बात की। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा माना जा रहा है कि अजित डोभाल और शी जिनपिंग के बीच डोकलाम को लेकर भी बात हुई हालांकि दोनों के बीच हुई बातचीत को शिष्टाचार कॉल बताया गया है।
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चीन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि दोनों सुरक्षा सलाहकारों के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता के संबंध में उनके पास पर्याप्त जानकारी है। हालांकि, उन्होंने इतना जरूर बताया कि इस मीटिंग में दोनों देशों के सुरक्षा सलाहकार दोनों देशों के संबंधों और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
बता दें कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सभी ब्रिक्स के सभी पांच सदस्य देशों के सुरक्षा सलाहकारों की मीटिंग बुलाई है।
मालूम हो कि 27-28 जुलाई को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल अपने चीन के समकक्ष यांग जेइची से इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे।
अजीत डोभाल ब्रिक्स (ब्राजील,भारत, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका) देशों के राष्ट्रीय सुलाहकारों की बैठक (27-28 जुलाई) में हिस्सा लेने को चीन के दौरे पर हैं। अजीत डोभाल और यांग जेइची भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधि के तौर पर दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के निबटारे के लिए वार्ता भी कर रहे हैं।
फिलहाल भारत ने संयमित रहकर चीन को यह संदेश दे दिया है कि वह डोकलाम के मुद्दे पर न तो झुकने जा रहा है और न ही किसी तरह के युद्ध का पक्षधर है। इसी के साथ नई दिल्ली संभावित चुनौती का आकलन करते हुए कूटनीतिक और अन्य तैयारियों को तेज कर दिया है।
समझा जा रहा है कि भारत और चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच चर्चा के बाद 16 से जारी डोकलाम गतिरोध का रास्ता निकल सकता है।
डोभाल से क्या कह सकता है चीन?
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से चीन पहले भारत की सेना के पीछे हटने का दबाव बना सकता है। चीन कह सकता है कि भारत की सेना ने अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का पालन नहीं किया है और इसलिए उन्हें तत्काल पीछे हटने की कार्रवाई शुरू कर देनी चाहिए।
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि चीन अमूमन अपना दबाव दिखाने के लिए पहले डोकलाम पर बात न करने की चाल चलेगा और अंत में मुद्दे पर चर्चा कर सकता है। वहीं, भारत शांत, संयमित है। डोकलाम पर कोई भडक़ाऊ बयान नहीं दे रहा है। सूत्रों का मानना है कि भारत का यह रुख लगातार चीन को तंग कर रहा है। यह चीन पर एक तरह से दबाव की तरह है।
क्या होगा आगे?
-डोकलाम में जिस स्थिति को लेकर अभी विवाद है, वह भूटान और चीन के बीच का विवादित हिस्सा है। भूटान इसे अपना तो चीन अपना क्षेत्र बताता है। दोनों देश इस विवाद को निबटाने के लिए वार्ता कर रहे थे। वहीं, भारत ने भूटान को उसके सीमाओं की सुरक्षा की गारंटी दे रखी है। ऐसे में भारत का कहना है कि भूटान छोटा सा देश है और चीन अपनी ताकत के बल पर विस्तार नीति के तहत उसे दबाना चाहता है। इसलिए भारत और भूटान का पक्ष भारी है।
भारत अपने पड़ोसी देश चीन के साथ कोई युद्ध नहीं चाहता, लेकिन यदि ऐसी स्थिति नई दिल्ली पर थोपी गई तो तैयारी पूरी है। इसी रणनीति को केन्द्र में रखकर भारत ने चीन से डोकलाम में पीछे हटने की अपील को कूटनीतिक धार देना शुरू किया है।
भारत और भूटान दोनों चाहते हैं कि डोकलाम में चल रहे गतिरोध को लेकर चीन की सेना 16 जून से पहले की स्थिति में लौट जाए। माना जा रहा है कि 27-28 जुलाई को इसके बाबत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल अपने चीन के समकक्ष यांग जेइची से इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे।
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि चीन अमूमन अपना दबाव दिखाने के लिए पहले डोकलाम पर बात न करने की चाल चलेगा और अंत में मुद्दे पर चर्चा कर सकता है। वहीं, भारत शांत, संयमित है। डोकलाम पर कोई भडक़ाऊ बयान नहीं दे रहा है। सूत्रों का मानना है कि भारत का यह रुख लगातार चीन को तंग कर रहा है। यह चीन पर एक तरह से दबाव की तरह है।
क्या होगा आगे?
-डोकलाम में जिस स्थिति को लेकर अभी विवाद है, वह भूटान और चीन के बीच का विवादित हिस्सा है। भूटान इसे अपना तो चीन अपना क्षेत्र बताता है। दोनों देश इस विवाद को निबटाने के लिए वार्ता कर रहे थे। वहीं, भारत ने भूटान को उसके सीमाओं की सुरक्षा की गारंटी दे रखी है। ऐसे में भारत का कहना है कि भूटान छोटा सा देश है और चीन अपनी ताकत के बल पर विस्तार नीति के तहत उसे दबाना चाहता है। इसलिए भारत और भूटान का पक्ष भारी है।
भारत अपने पड़ोसी देश चीन के साथ कोई युद्ध नहीं चाहता, लेकिन यदि ऐसी स्थिति नई दिल्ली पर थोपी गई तो तैयारी पूरी है। इसी रणनीति को केन्द्र में रखकर भारत ने चीन से डोकलाम में पीछे हटने की अपील को कूटनीतिक धार देना शुरू किया है।
भारत और भूटान दोनों चाहते हैं कि डोकलाम में चल रहे गतिरोध को लेकर चीन की सेना 16 जून से पहले की स्थिति में लौट जाए। माना जा रहा है कि 27-28 जुलाई को इसके बाबत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल अपने चीन के समकक्ष यांग जेइची से इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे।