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NSA Doval: एनएसए अजीत डोभाल ने बताईं सोशल मीडिया की कमियां, कहा- इसकी विश्वसनीयता खत्म हो रही
Fri, 25 Oct 2024 09:54 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Fri, 25 Oct 2024 09:54 PM IST
सार
एनएसए अजीत डोभाल ने कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर भारतीय सेना के बारे में कुछ भी पोस्ट करके रक्षा बलों का मनोबल कम करने की कोशिश करते हैं।
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अजीत डोभाल
- फोटो : ANI
विस्तार
एनएसए अजीत डोभाल ने शुक्रवार को एक पुस्तक लॉन्च कार्यक्रम के दौरान सोशल मीडिया की खामियां बताईं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की विश्वसनीयता धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। सोशल मीडिया के उपयोग के साथ इसकी चुनौतियों का डटकर मुकाबला करने की जरूरत है।
झूठी कहानियों का सच उजागर करने की जरूरत
एनएसए अजीत डोभाल ने कहा कि सोशल मीडिया पर पूरी तरह से झूठ फैलाने वाली कहानियों खोजकर उनका सच उजागर करने की जरूरत है। कुछ तस्वीरों को पेश करके यह किया जा सकता है। कुछ लोग सोशल मीडिया पर भारतीय सेना के बारे में कुछ भी पोस्ट करके रक्षा बलों का मनोबल कम करने की कोशिश करते हैं। कभी-कभी वे ऐसी बातें लिख देते हैं जिससे हमारे जवानों का अपने नेतृत्व पर से भरोसा उठ जाता है। इसका पुरजोर विरोध करने की जरूरत है। यदि रक्षा बलों के लोग ऐसा कर सकते हैं, तो यह अच्छा है।
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हर घटना पर उत्तरदाता बनने की जरूरत
उन्होंने कहा कि कोई भी घटना होने पर आपको सोशल मीडिया पर पहला उत्तरदाता बनना चाहिए। कई बार ऐसा देखा गया है कि जब कोई घटना घटती है तो उसके चार घंटे के भीतर जो कचरा शुरू होता है, वह असलियत पर हावी हो जाता है। कुछ घंटों के भीतर सोशल मीडिया पर सही नजरिया आ जाए तो काम आता है। देश में देशभक्तों और राष्ट्रवादियों की कोई कमी नहीं है।
स्वामी विवेकानंद को किया याद
एनएसए अजीत डोभाल ने कहा कि लंबे समय से जिन प्रमुख कार्यों की उपेक्षा की गई उनमें से एक था राष्ट्रीय इच्छाशक्ति का निर्माण करना और उसे मजबूत करना। लगभग 100 साल पहले एक व्यक्ति स्वामी विवेकानंद ऐसा करने के लिए आगे बढ़े थे। उन्होंने कहा कि हम युद्ध क्यों लड़ते हैं? क्या यह प्रतिद्वंद्वी के मानव संसाधनों को मारने में मिलने वाली खुशी के लिए है? हमारे सैन्य उद्देश्य क्या हैं और हम उन्हें कैसे प्राप्त करते हैं? हम इसे राष्ट्र की इच्छा को तोड़कर हासिल करते हैं और उनकी सेना को हराकर राष्ट्र की इच्छा को तोड़ते हैं। जब आप उन्हें युद्ध के मैदान में हरा देते हैं तो राष्ट्र आपकी शर्तों पर आपके साथ शांति स्थापित करने के लिए तैयार हो जाता है। चाहे वो यूक्रेन हो, रूस हो या कोई युद्ध हो।
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#WATCH | On the impact & influence of social media, NSA Ajit Doval says, " Social media needs to be countered using social media...The credibility of social media is slowly eroding now. You should focus on searching and exposing stories on social media which show total and… pic.twitter.com/3cG0MYYVak
— ANI (@ANI) October 25, 2024
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झूठी कहानियों का सच उजागर करने की जरूरत
एनएसए अजीत डोभाल ने कहा कि सोशल मीडिया पर पूरी तरह से झूठ फैलाने वाली कहानियों खोजकर उनका सच उजागर करने की जरूरत है। कुछ तस्वीरों को पेश करके यह किया जा सकता है। कुछ लोग सोशल मीडिया पर भारतीय सेना के बारे में कुछ भी पोस्ट करके रक्षा बलों का मनोबल कम करने की कोशिश करते हैं। कभी-कभी वे ऐसी बातें लिख देते हैं जिससे हमारे जवानों का अपने नेतृत्व पर से भरोसा उठ जाता है। इसका पुरजोर विरोध करने की जरूरत है। यदि रक्षा बलों के लोग ऐसा कर सकते हैं, तो यह अच्छा है।
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हर घटना पर उत्तरदाता बनने की जरूरत
उन्होंने कहा कि कोई भी घटना होने पर आपको सोशल मीडिया पर पहला उत्तरदाता बनना चाहिए। कई बार ऐसा देखा गया है कि जब कोई घटना घटती है तो उसके चार घंटे के भीतर जो कचरा शुरू होता है, वह असलियत पर हावी हो जाता है। कुछ घंटों के भीतर सोशल मीडिया पर सही नजरिया आ जाए तो काम आता है। देश में देशभक्तों और राष्ट्रवादियों की कोई कमी नहीं है।
स्वामी विवेकानंद को किया याद
एनएसए अजीत डोभाल ने कहा कि लंबे समय से जिन प्रमुख कार्यों की उपेक्षा की गई उनमें से एक था राष्ट्रीय इच्छाशक्ति का निर्माण करना और उसे मजबूत करना। लगभग 100 साल पहले एक व्यक्ति स्वामी विवेकानंद ऐसा करने के लिए आगे बढ़े थे। उन्होंने कहा कि हम युद्ध क्यों लड़ते हैं? क्या यह प्रतिद्वंद्वी के मानव संसाधनों को मारने में मिलने वाली खुशी के लिए है? हमारे सैन्य उद्देश्य क्या हैं और हम उन्हें कैसे प्राप्त करते हैं? हम इसे राष्ट्र की इच्छा को तोड़कर हासिल करते हैं और उनकी सेना को हराकर राष्ट्र की इच्छा को तोड़ते हैं। जब आप उन्हें युद्ध के मैदान में हरा देते हैं तो राष्ट्र आपकी शर्तों पर आपके साथ शांति स्थापित करने के लिए तैयार हो जाता है। चाहे वो यूक्रेन हो, रूस हो या कोई युद्ध हो।