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NRI: सरकार ने प्रवासी भारतीयों के लिए अब तक क्या-क्या किया है? 16 सम्मेलनों में अब तक क्या हुआ, जानें सब कुछ
Tue, 10 Jan 2023 06:24 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Tue, 10 Jan 2023 06:24 PM IST
सार
प्रवासी भारतीय दिवस की स्थापना के बाद से वर्ष 2015 तक हर साल इस दिन को मनाया जाता था। हालांकि 2015 में संशोधन के बाद हर दो साल में एक बार इसे मनाने का फैसला लिया गया।
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प्रवासी भारतीय सम्मेलन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में 8 जनवरी से 10 जनवरी तक प्रवासी भारतीय सम्मेलन हो रहा है, लेकिन क्या आपको पता है कि प्रवासी भारतीय दिवस क्यों मनाया जाता है? इस दिन को मनाने की शुरुआत कब और कैसे हुई? प्रवासी भारतीय दिवस का उद्देश्य और वर्ष 2023 की थीम क्या है? अब तक कितने एनआरआई सम्मेलन हुए और उनमें क्या-क्या हुआ? आइए जानते हैं...
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अटल बिहारी वायपेयी
- फोटो : Social media
कब हुई प्रवासी भारतीय दिवस मनाने की शुरुआत
हर वर्ष प्रवासी भारतीय दिवस 9 जनवरी को मनाया जाता है। इसकी घोषणा वर्ष 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी। हालांकि, इस दिन का इतिहास 1915 से जुड़ा हुआ है। स्वर्गीय लक्ष्मीमल सिंघवी ने पहली बार प्रवासी भारतीय दिवस मनाने की संकल्पना की थी। भारत सरकार द्वारा उनकी अध्यक्षता में गठित एक उच्च समिति की सिफारिशों पर यह दिन तय किया गया। फिर 2003 में पहली बार प्रवासी भारतीय दिवस मनाया गया।
हर वर्ष प्रवासी भारतीय दिवस 9 जनवरी को मनाया जाता है। इसकी घोषणा वर्ष 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी। हालांकि, इस दिन का इतिहास 1915 से जुड़ा हुआ है। स्वर्गीय लक्ष्मीमल सिंघवी ने पहली बार प्रवासी भारतीय दिवस मनाने की संकल्पना की थी। भारत सरकार द्वारा उनकी अध्यक्षता में गठित एक उच्च समिति की सिफारिशों पर यह दिन तय किया गया। फिर 2003 में पहली बार प्रवासी भारतीय दिवस मनाया गया।
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mahatma gandhi
9 जनवरी को क्यों मनाते हैं प्रवासी भारतीय दिवस ?
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 9 जनवरी 1915 को दक्षिण अफ्रीका से भारत वापसी की थी और स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत की। दक्षिण भारत से लौटे महात्मा ने जब देश की आजादी में अपना योगदान दिया तो उन्हीं की याद और सम्मान में इस दिन को प्रवासी भारतीय दिवस के तौर पर मनाया जाने लगा।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 9 जनवरी 1915 को दक्षिण अफ्रीका से भारत वापसी की थी और स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत की। दक्षिण भारत से लौटे महात्मा ने जब देश की आजादी में अपना योगदान दिया तो उन्हीं की याद और सम्मान में इस दिन को प्रवासी भारतीय दिवस के तौर पर मनाया जाने लगा।
प्रवासी भारतीय दिवस 2023
- फोटो : Istock
प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन की थीम
प्रवासी भारतीय दिवस की हर दो साल में एक विशेष थीम होती है। प्रवासी भारतीय दिवस की स्थापना के बाद से वर्ष 2015 तक हर साल इस दिन को मनाया जाता था। हालांकि 2015 में संशोधन के बाद हर दो साल में एक बार इसे मनाने का फैसला लिया गया। उस साल प्रवासी भारतीय दिवस की थीम 'अपना भारत, अपना गौरव' थी। पिछली बार 2021 में यह दिवस मनाया गया। प्रवासी भारतीय दिवस 2023 की थीम 'प्रवासी: अमृत काल में भारत की प्रगति के विश्वसनीय भागीदार' है।
प्रवासी भारतीय दिवस की हर दो साल में एक विशेष थीम होती है। प्रवासी भारतीय दिवस की स्थापना के बाद से वर्ष 2015 तक हर साल इस दिन को मनाया जाता था। हालांकि 2015 में संशोधन के बाद हर दो साल में एक बार इसे मनाने का फैसला लिया गया। उस साल प्रवासी भारतीय दिवस की थीम 'अपना भारत, अपना गौरव' थी। पिछली बार 2021 में यह दिवस मनाया गया। प्रवासी भारतीय दिवस 2023 की थीम 'प्रवासी: अमृत काल में भारत की प्रगति के विश्वसनीय भागीदार' है।
प्रवासी भारती सम्मेलन में बोलते सीएम योगी
- फोटो : amar ujala
अब तक कितने एनआरआई सम्मेलन हुए?
कुल 16 एनआरआई सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं। इनमें से सात सम्मेलन देश की राजधानी दिल्ली में हुए हैं। कोरोना के कारण पिछला सम्मेलन वर्चुअल रूप से हुआ था। बाकी आठ सम्मेलन देश के बड़े शहरों में हुए हैं।
कुल 16 एनआरआई सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं। इनमें से सात सम्मेलन देश की राजधानी दिल्ली में हुए हैं। कोरोना के कारण पिछला सम्मेलन वर्चुअल रूप से हुआ था। बाकी आठ सम्मेलन देश के बड़े शहरों में हुए हैं।
प्रवासी भारतीय सम्मेलन सुषमा स्वराज और पीएम मोदी
- फोटो : अमर उजाला
अब तक हुए एनआरआई सम्मेलनों में क्या-क्या हुआ?
पहली बार प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन नई दिल्ली में 2003 में आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में मॉरीशस के तत्कालीन प्रधानमंत्री अनिरुद्ध जगन्नाथ समेत दस हस्तियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के हितों को आगे बढ़ाने और भारतीय प्रवासियों के लिए महत्वपूर्ण योगदान या सेवा करने के लिए 'प्रवासी भारतीय सम्मान' पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
दूसरा एनआरआई सम्मेलन भी राजधानी दिल्ली में आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में अंतरिक्ष पर जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला कल्पना चावला (मरणोपरांत) समेत 12 हस्तियों को 'प्रवासी भारतीय सम्मान' पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
2005 में तीसरा प्रवासी भारतीय सम्मेलन देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आयोजित किया गया था। इसमें साहित्यकार विक्रम सेठ और कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा को 'प्रवासी भारतीय सम्मान' पुरस्कार से नवाजा गया था। इस सम्मेलन के बाद प्रवासी भारतीयों का एक डेटाबेस विकसित करने का महत्वपूर्ण कार्य शुरू किया गया था।
प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन 2005 का उद्देश्य सभी क्षेत्रों में केंद्रित गतिविधियों के माध्यम से भारत और प्रवासी भारतीयों के बीच जुड़ाव को गहरा करना था। इस सम्मेलन की समग्र उपलब्धि यह थी कि इसने प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्रालय को भारतीय डायस्पोरा के लिए एकल-बिंदु सेवा प्रदाता के रूप में स्थापित किया। साथ ही प्रवासी भारतीयों और भारत के बीच संपर्क को मजबूत करने के लिए सरकार के दृढ़ संकल्प को फिर से स्थापित किया था।
चौथा प्रवासी भारतीय सम्मेलन हैदराबाद में आयोजित किया गया था। इसमें 15 लोगों को 'प्रवासी भारतीय सम्मान' पुरस्कार दिया गया था। सम्मेलन के बाद रोजगार, शिक्षा या भारत के बाहर अन्य कारणों से भारत में अपने सामान्य निवास स्थान से दूर रहने वाले भारतीय नागरिकों को मतदान का अधिकार प्रदान करने के लिए तत्कालीन यूपीए सरकार ने 2006 को राज्यसभा में जनप्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक 2006 विधेयक पेश किया था, लेकिन यह बाद में आगे नहीं बढ़ पाया।
2007 में पांचवां प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन एक बार फिर से नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। इसमें 15 नामचीन व्यक्तियों को 'प्रवासी भारतीय सम्मान' पुरस्कार दिया गया था। सम्मेलन के बाद यूपीए सरकार ने एनआरआई द्वारा निवेश सहित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए एक उदार और पारदर्शी नीति बनाई थी।
छठा प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन 2008 में नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में मॉरीशस के तत्कालीन प्रधामंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम सहित 12 हस्तियों को 'प्रवासी भारतीय सम्मान' पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके बाद सरकार ने प्रवासी भारतीय ट्रस्टों अथवा पंजीकृत सोसायटियों से जून, 2007 में पीआईओ/एनआरआई विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए एक्सप्रेशंस ऑफ इंट्रेस्ट (EOI) आमंत्रित किया गया था।
वर्ष 2009 में सातवें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का मेजबान शहर चेन्नई था। इसमें सूरीनाम के तत्कालीन प्रधानमंत्री रामदीन सरजो समेत 13 मशहूर लोगों को 'प्रवासी भारतीय सम्मान' पुरस्कार दिया गया था।
आठवां प्रवासी भारतीय सम्मेलन वर्ष 2010 में राजधानी दिल्ली में आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका के तत्कालीन वित्त मंत्री प्रवीण जमनादास गोरधन सहित 14 हस्तियों को 'प्रवासी भारतीय सम्मान' पुरस्कार से नवाजा गया था। प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्रालय ने ऐसे 42 देशों में भारतीय मिशनों में 'भारतीय समुदाय कल्याण कोष (ICWF) की स्थापना की थी, जहां 50,000 से अधिक प्रवासी भारतीय आबादी थे। मंत्रालय ने 2009-10 के दौरान प्रवासी भारतीयों की सहायता के लिए भारतीय मिशनों को 71.75 लाख रुपये की राशि जारी की थी।
वर्ष 2011 में नौवां प्रवासी भारतीय सम्मेलन का आयोजन राजधानी दिल्ली में आयोजित किया गया था। इसका विषय 'वैश्विक भारतीय को जोड़ना' था। राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने प्रतिष्ठित पीआईओ/एनआरआई को प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार-2011 प्रदान किया था। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डीओएनईआर) और आठ पूर्वोत्तर राज्य इस सम्मेलन में भागीदार थे। इसमें देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र को प्रदर्शित किया गया था। इस अवसर पर वेबसाइट- www.pbdindia.org भी लॉन्च की गई थी।
10वें प्रवासी भारतीय सम्मेलन का आयोजन 2012 में जयपुर में हुआ था। इसका विषय 'वैश्विक भारतीय-समावेशी विकास' था। राजस्थान 10वें प्रवासी भारतीय दिवस का भागीदार राज्य था। इसमें त्रिनिदाद और टोबैगो की पहली महिला प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर समेत 15 प्रतिष्ठित व्यक्तियों को प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार प्रदान किया गया था। सम्मेलन में दुनियाभर के 1500 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
वर्ष 2013 में 11वें प्रवासी भारतीय सम्मेलन का आयोजन कोच्चि (केरल) में हुआ था। यह पहली बार था जब यह कार्यक्रम केरल में आयोजित किया गया था, जो खाड़ी में रहने वाले अधिकांश प्रवासी भारतीयों का घर है। तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 15 हस्तियों को प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार प्रदान किया था।
12वें प्रवासी भारतीय सम्मेलन का आयोजन 2014 में नई दिल्ली में हुआ था। इस कार्यक्रम का विषय 'प्रवासी समुदाय को जोड़ना: पीढ़ियों से जुड़ना' था। सम्मेलन में 15 प्रतिष्ठित व्यक्तियों को प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार प्रदान किया गया था।
वर्ष 2015 में 13वां प्रवासी भारतीय सम्मेलन गुजरात की राजधानी गांधीनगर में हुआ था। यह सम्मेलन गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में आयोजित किया गया था। इसमें प्रवासी भारतीयों के 3,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। समारोह के मुख्य अतिथि गुयाना के राष्ट्रपति डोनाल्ड रामोतार थे। गुयाना के राष्ट्रपति को 'प्रवासी भारतीय सम्मान' भी प्रदान किया गया था। यह कार्यक्रम दक्षिण अफ्रीका से महात्मा गांधी की वापसी की शताब्दी को समर्पित था। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीआईओ कार्ड धारकों को हर हफ्ते सत्यापन के लिए स्थानीय पुलिस स्टेशन जाने की आवश्यकता वाले नियम को खत्म करने की घोषणा की थी। सम्मेलन में 15 लोगों को प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार प्रदान किया गया था।
वर्ष 2017 में 14वां प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का आयोजन कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुआ था। इसकी थीम 'भारतीय डायस्पोरा के साथ जुड़ाव को फिर से परिभाषित करना' थी। इसमें 30 प्रतिष्ठित व्यक्तियों को प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार प्रदान किया था। सरकार ने विदेशी पर्यटकों और प्रवासी भारतीयों के लिए ऑनलाइन आरक्षित टिकट बुक करने की सुविधा 365 दिन पहले तक बढ़ा दी थी।
15वां प्रवासी भारतीय सम्मेलन का आयोजन 21-23 जनवरी, 2019 में आध्यात्मिक नगरी वाराणसी में हुआ था। सम्मेलन में मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ मुख्य अतिथि थे और नॉर्वे के सांसद हिमांशु गुलाटी विशिष्ट अतिथि थे। प्रयागराज में कुंभ मेले में भाग लेने और नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने के लिए प्रतिभागियों को अनुमति देने के लिए पहली बार नौ जनवरी के बजाय 21-23 जनवरी तक तीन दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया था। इसका विषय 'नए भारत के निर्माण में प्रवासी भारतीयों की भूमिका' था।
इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश मंत्रालय द्वारा 2015 से आयोजित 'भारत को जाने' प्रश्नोत्तरी के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए थे। सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने प्रवासी भारतीयों के लिए उनकी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर भी प्रकाश डाला था। उन्होंने पासपोर्ट सेवा परियोजना के लिए केंद्रीकृत प्रणाली, ई-पासपोर्ट, ई-वीजा जैसी सुविधाओं का जिक्र किया था। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने पीआईओ कार्ड को ओसीआई कार्ड में बदलने की प्रक्रिया को भी सरल बनाए जाने की जानकारी दी थी। कार्यक्रम में 30 प्रतिष्ठित व्यक्तियों को प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार प्रदान किया गया था।
सरकार ने यह भी जानकारी दी थी कि प्रवासी भारतीय (एनआरआई) भारत में आने के बाद आधार संख्या प्राप्त करने के हकदार होंगे। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने एनआरआई के लिए इस तरह के आधार नामांकन की सुविधा पहले ही लागू कर दी थी। 14 नवंबर, 2019 तक एनआरआई के लिए 2800 से अधिक आधार सृजित किए जा चुके थे।
सरकार ने संसद में बताया था कि कोरोना के मद्देनजर लगाए गए प्रतिबंध के कारण विभिन्न देशों में फंसे भारतीय नागरिकों की वापसी की सुविधा के लिए वंदे भारत मिशन 7 मई, 2020 को शुरू किया गया था। इन्हें भोजन, आश्रय, दवा और भारत वापसी जैसी सुविधा प्रदान की थी। सरकार के मुताबिक, मदद पोर्टल, भारतीय समुदाय कल्याण जैसी कुछ अन्य पहल- फंड (आईसीडब्ल्यूएफ), ई-माइग्रेट पोर्टल, प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र (पीबीएसके), रिश्ता पोर्टल आदि एनआरआई को सहायता और पता प्राप्त करने में मदद कर रही हैं।
16वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का आयोजन पहली बार वर्चुअल रूप से 2021 में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सूरीनाम के नए राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी थे। इसकी थीम 'आत्मानिर्भर भारत में योगदान' थी। युवाओं के लिए ऑनलाइन 'भारत को जानें' क्विज के 15 विजेता की भी घोषणा की गई थी। कार्यक्रम में 31 प्रतिष्ठित व्यक्तियों को प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार से नवाजा गया था।
17वें प्रवासी भारतीय सम्मेलन का आयोजन पहली बार मध्यप्रदेश में हुआ। सम्मेलन मध्य प्रदेश सरकार के साथ साझेदारी में 08-10 जनवरी 2023 तक इंदौर में आयोजित किया गया। इसका विषय है- 'प्रवासी: अमृत काल में भारत की प्रगति में विश्वसनीय भागीदार'। लगभग 70 देशों के 3,500 से अधिक प्रवासी भारतीयों ने सम्मेलन के लिए पंजीकरण कराया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौ जनवरी सम्मेलन का उद्घाटन किया और गुयाना के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद इरफान अली मुख्य अतिथि और सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिकाप्रसाद संतोखी ने विशेष अतिथि के रूप में सम्मेलन को संबोधित किया।
पहली बार प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन नई दिल्ली में 2003 में आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में मॉरीशस के तत्कालीन प्रधानमंत्री अनिरुद्ध जगन्नाथ समेत दस हस्तियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के हितों को आगे बढ़ाने और भारतीय प्रवासियों के लिए महत्वपूर्ण योगदान या सेवा करने के लिए 'प्रवासी भारतीय सम्मान' पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
दूसरा एनआरआई सम्मेलन भी राजधानी दिल्ली में आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में अंतरिक्ष पर जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला कल्पना चावला (मरणोपरांत) समेत 12 हस्तियों को 'प्रवासी भारतीय सम्मान' पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
2005 में तीसरा प्रवासी भारतीय सम्मेलन देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आयोजित किया गया था। इसमें साहित्यकार विक्रम सेठ और कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा को 'प्रवासी भारतीय सम्मान' पुरस्कार से नवाजा गया था। इस सम्मेलन के बाद प्रवासी भारतीयों का एक डेटाबेस विकसित करने का महत्वपूर्ण कार्य शुरू किया गया था।
प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन 2005 का उद्देश्य सभी क्षेत्रों में केंद्रित गतिविधियों के माध्यम से भारत और प्रवासी भारतीयों के बीच जुड़ाव को गहरा करना था। इस सम्मेलन की समग्र उपलब्धि यह थी कि इसने प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्रालय को भारतीय डायस्पोरा के लिए एकल-बिंदु सेवा प्रदाता के रूप में स्थापित किया। साथ ही प्रवासी भारतीयों और भारत के बीच संपर्क को मजबूत करने के लिए सरकार के दृढ़ संकल्प को फिर से स्थापित किया था।
चौथा प्रवासी भारतीय सम्मेलन हैदराबाद में आयोजित किया गया था। इसमें 15 लोगों को 'प्रवासी भारतीय सम्मान' पुरस्कार दिया गया था। सम्मेलन के बाद रोजगार, शिक्षा या भारत के बाहर अन्य कारणों से भारत में अपने सामान्य निवास स्थान से दूर रहने वाले भारतीय नागरिकों को मतदान का अधिकार प्रदान करने के लिए तत्कालीन यूपीए सरकार ने 2006 को राज्यसभा में जनप्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक 2006 विधेयक पेश किया था, लेकिन यह बाद में आगे नहीं बढ़ पाया।
2007 में पांचवां प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन एक बार फिर से नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। इसमें 15 नामचीन व्यक्तियों को 'प्रवासी भारतीय सम्मान' पुरस्कार दिया गया था। सम्मेलन के बाद यूपीए सरकार ने एनआरआई द्वारा निवेश सहित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए एक उदार और पारदर्शी नीति बनाई थी।
छठा प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन 2008 में नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में मॉरीशस के तत्कालीन प्रधामंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम सहित 12 हस्तियों को 'प्रवासी भारतीय सम्मान' पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके बाद सरकार ने प्रवासी भारतीय ट्रस्टों अथवा पंजीकृत सोसायटियों से जून, 2007 में पीआईओ/एनआरआई विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए एक्सप्रेशंस ऑफ इंट्रेस्ट (EOI) आमंत्रित किया गया था।
वर्ष 2009 में सातवें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का मेजबान शहर चेन्नई था। इसमें सूरीनाम के तत्कालीन प्रधानमंत्री रामदीन सरजो समेत 13 मशहूर लोगों को 'प्रवासी भारतीय सम्मान' पुरस्कार दिया गया था।
आठवां प्रवासी भारतीय सम्मेलन वर्ष 2010 में राजधानी दिल्ली में आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका के तत्कालीन वित्त मंत्री प्रवीण जमनादास गोरधन सहित 14 हस्तियों को 'प्रवासी भारतीय सम्मान' पुरस्कार से नवाजा गया था। प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्रालय ने ऐसे 42 देशों में भारतीय मिशनों में 'भारतीय समुदाय कल्याण कोष (ICWF) की स्थापना की थी, जहां 50,000 से अधिक प्रवासी भारतीय आबादी थे। मंत्रालय ने 2009-10 के दौरान प्रवासी भारतीयों की सहायता के लिए भारतीय मिशनों को 71.75 लाख रुपये की राशि जारी की थी।
वर्ष 2011 में नौवां प्रवासी भारतीय सम्मेलन का आयोजन राजधानी दिल्ली में आयोजित किया गया था। इसका विषय 'वैश्विक भारतीय को जोड़ना' था। राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने प्रतिष्ठित पीआईओ/एनआरआई को प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार-2011 प्रदान किया था। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डीओएनईआर) और आठ पूर्वोत्तर राज्य इस सम्मेलन में भागीदार थे। इसमें देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र को प्रदर्शित किया गया था। इस अवसर पर वेबसाइट- www.pbdindia.org भी लॉन्च की गई थी।
10वें प्रवासी भारतीय सम्मेलन का आयोजन 2012 में जयपुर में हुआ था। इसका विषय 'वैश्विक भारतीय-समावेशी विकास' था। राजस्थान 10वें प्रवासी भारतीय दिवस का भागीदार राज्य था। इसमें त्रिनिदाद और टोबैगो की पहली महिला प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर समेत 15 प्रतिष्ठित व्यक्तियों को प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार प्रदान किया गया था। सम्मेलन में दुनियाभर के 1500 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
वर्ष 2013 में 11वें प्रवासी भारतीय सम्मेलन का आयोजन कोच्चि (केरल) में हुआ था। यह पहली बार था जब यह कार्यक्रम केरल में आयोजित किया गया था, जो खाड़ी में रहने वाले अधिकांश प्रवासी भारतीयों का घर है। तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 15 हस्तियों को प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार प्रदान किया था।
12वें प्रवासी भारतीय सम्मेलन का आयोजन 2014 में नई दिल्ली में हुआ था। इस कार्यक्रम का विषय 'प्रवासी समुदाय को जोड़ना: पीढ़ियों से जुड़ना' था। सम्मेलन में 15 प्रतिष्ठित व्यक्तियों को प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार प्रदान किया गया था।
वर्ष 2015 में 13वां प्रवासी भारतीय सम्मेलन गुजरात की राजधानी गांधीनगर में हुआ था। यह सम्मेलन गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में आयोजित किया गया था। इसमें प्रवासी भारतीयों के 3,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। समारोह के मुख्य अतिथि गुयाना के राष्ट्रपति डोनाल्ड रामोतार थे। गुयाना के राष्ट्रपति को 'प्रवासी भारतीय सम्मान' भी प्रदान किया गया था। यह कार्यक्रम दक्षिण अफ्रीका से महात्मा गांधी की वापसी की शताब्दी को समर्पित था। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीआईओ कार्ड धारकों को हर हफ्ते सत्यापन के लिए स्थानीय पुलिस स्टेशन जाने की आवश्यकता वाले नियम को खत्म करने की घोषणा की थी। सम्मेलन में 15 लोगों को प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार प्रदान किया गया था।
वर्ष 2017 में 14वां प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का आयोजन कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुआ था। इसकी थीम 'भारतीय डायस्पोरा के साथ जुड़ाव को फिर से परिभाषित करना' थी। इसमें 30 प्रतिष्ठित व्यक्तियों को प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार प्रदान किया था। सरकार ने विदेशी पर्यटकों और प्रवासी भारतीयों के लिए ऑनलाइन आरक्षित टिकट बुक करने की सुविधा 365 दिन पहले तक बढ़ा दी थी।
15वां प्रवासी भारतीय सम्मेलन का आयोजन 21-23 जनवरी, 2019 में आध्यात्मिक नगरी वाराणसी में हुआ था। सम्मेलन में मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ मुख्य अतिथि थे और नॉर्वे के सांसद हिमांशु गुलाटी विशिष्ट अतिथि थे। प्रयागराज में कुंभ मेले में भाग लेने और नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने के लिए प्रतिभागियों को अनुमति देने के लिए पहली बार नौ जनवरी के बजाय 21-23 जनवरी तक तीन दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया था। इसका विषय 'नए भारत के निर्माण में प्रवासी भारतीयों की भूमिका' था।
इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश मंत्रालय द्वारा 2015 से आयोजित 'भारत को जाने' प्रश्नोत्तरी के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए थे। सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने प्रवासी भारतीयों के लिए उनकी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर भी प्रकाश डाला था। उन्होंने पासपोर्ट सेवा परियोजना के लिए केंद्रीकृत प्रणाली, ई-पासपोर्ट, ई-वीजा जैसी सुविधाओं का जिक्र किया था। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने पीआईओ कार्ड को ओसीआई कार्ड में बदलने की प्रक्रिया को भी सरल बनाए जाने की जानकारी दी थी। कार्यक्रम में 30 प्रतिष्ठित व्यक्तियों को प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार प्रदान किया गया था।
सरकार ने यह भी जानकारी दी थी कि प्रवासी भारतीय (एनआरआई) भारत में आने के बाद आधार संख्या प्राप्त करने के हकदार होंगे। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने एनआरआई के लिए इस तरह के आधार नामांकन की सुविधा पहले ही लागू कर दी थी। 14 नवंबर, 2019 तक एनआरआई के लिए 2800 से अधिक आधार सृजित किए जा चुके थे।
सरकार ने संसद में बताया था कि कोरोना के मद्देनजर लगाए गए प्रतिबंध के कारण विभिन्न देशों में फंसे भारतीय नागरिकों की वापसी की सुविधा के लिए वंदे भारत मिशन 7 मई, 2020 को शुरू किया गया था। इन्हें भोजन, आश्रय, दवा और भारत वापसी जैसी सुविधा प्रदान की थी। सरकार के मुताबिक, मदद पोर्टल, भारतीय समुदाय कल्याण जैसी कुछ अन्य पहल- फंड (आईसीडब्ल्यूएफ), ई-माइग्रेट पोर्टल, प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र (पीबीएसके), रिश्ता पोर्टल आदि एनआरआई को सहायता और पता प्राप्त करने में मदद कर रही हैं।
16वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का आयोजन पहली बार वर्चुअल रूप से 2021 में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सूरीनाम के नए राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी थे। इसकी थीम 'आत्मानिर्भर भारत में योगदान' थी। युवाओं के लिए ऑनलाइन 'भारत को जानें' क्विज के 15 विजेता की भी घोषणा की गई थी। कार्यक्रम में 31 प्रतिष्ठित व्यक्तियों को प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार से नवाजा गया था।
17वें प्रवासी भारतीय सम्मेलन का आयोजन पहली बार मध्यप्रदेश में हुआ। सम्मेलन मध्य प्रदेश सरकार के साथ साझेदारी में 08-10 जनवरी 2023 तक इंदौर में आयोजित किया गया। इसका विषय है- 'प्रवासी: अमृत काल में भारत की प्रगति में विश्वसनीय भागीदार'। लगभग 70 देशों के 3,500 से अधिक प्रवासी भारतीयों ने सम्मेलन के लिए पंजीकरण कराया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौ जनवरी सम्मेलन का उद्घाटन किया और गुयाना के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद इरफान अली मुख्य अतिथि और सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिकाप्रसाद संतोखी ने विशेष अतिथि के रूप में सम्मेलन को संबोधित किया।