सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पूरी हुई एनआरसी प्रक्रिया, पूरी तरह संवैधानिक : विदेश मंत्रालय
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विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) से बाहर रहे लोग राष्ट्र विहीन नहीं हैं और वे कानून के तहत मौजूद सभी विकल्पों का इस्तेमाल कर लेने तक अपने अधिकारों का पूर्व की तरह उपयोग करते रहेंगे। मंत्रालय ने कहा कि एनआरसी से बाहर किए जाने से असम में एक भी व्यक्ति के अधिकारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है और उन्हें पूर्व में प्राप्त किसी भी अधिकार से वंचित नहीं किया गया है।
विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया एनआरसी की अंतिम सूची के कुछ पहलूओं के बारे में विदेशी मीडिया के एक वर्ग में आई टिप्पणियों के मद्देनजर आई है। उल्लेखनीय है कि असम में बहुप्रतीक्षित एनआरसी की अंतिम सूची शनिवार को ऑनलाइन जारी कर दी गई। एनआरसी में शामिल होने के लिए 3,30,27,661 लोगों ने आवेदन दिया था। इनमें से 3,11,21,004 लोगों को शामिल किया गया है और 19,06,657 लोगों को बाहर कर दिया गया है।
मंत्रालय ने कहा, ‘असम में रहने वाले किसी व्यक्ति के अधिकारों पर एनआरसी से बाहर किये जाने का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।’ मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, ‘जिन लोगों के नाम अंतिम सूची में नहीं है उन्हें हिरासत में नहीं लिया जाएगा और कानून के तहत उपलब्ध सभी विकल्पों पर विचार होने तक उन्हें पहले की तरह ही सभी अधिकार मिलते रहेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘‘यह सूची से बाहर किये गये व्यक्ति को ‘राष्ट्र विहीन’ नहीं बनाती है। यह कानूनी रूप से किसी व्यक्ति को ‘विदेशी’ नहीं बनाती। वे पहले से प्राप्त किसी भी अधिकार से वंचित नहीं रहेंगे।’
एनआरसी संवैधानिक और पारदर्शी प्रक्रिया
विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) एक संवैधानिक, पारदर्शी और कानूनी प्रक्रिया है। विदेश मंत्रालय ने यह बात उन रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा जिनमें बताया जा रहा था कि एनआरसी में मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है और असम के लिए यह बड़ा संकट साबित होगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि भारत सरकार ने साल 1985 में असम समझौते पर दस्तखत किए थे। इस समझौते का लक्ष्य असम की जनका का ध्यान रखना था। एनआरसी का लक्ष्य इस समझौते को प्रभावी रूप में लाना है। उन्होंने कहा कि साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को इसे पूरा करने का निर्देश दिया था।
उन्होंने कहा कि साल 2015 में असम में एनआरसी अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। उन्होंने कहा कि यह अधिकारियों द्वारा चलाई जाने वाली प्रक्रिया नहीं है। इसकी निगरानी सीधे सुप्रीम कोर्ट कर रहा है। सरकार इस पर अदालतों के निर्देश के आधार पर काम कर रही है। अभी तक इसमें जितने भी कदम उठाए गए हैं, सुप्रीम कोर्ट ने तय किए हैं।