एनआरसी ड्राफ्ट पर संग्राम : असम में 40 लाख लोग भारतीय नहीं, सरकार ने कहा- इसमें हमारी गलती क्या है?
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असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) ने अपनी दूसरा ड्राफ्ट जारी कर दिया है। इसमें 40 लाख लोगों को भारतीय नागरिकता नहीं मिली है। वहीं 2 करोड़ 89 लाख लोगों को राज्य में भारतीय नगरिक माना गया है। इसकी जानकारी एनआरसी के स्टेट को-आर्डिनेटर प्रतीत हजेला ने दी है। इस ड्राफ्ट के जारी होने के बाद राजनीतिक बवाल जारी है। संसद के दोनों सदनों में लगातार हंगामा जारी है। लोकसभा में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मैं विपक्ष से पूछना चाहता हूं कि केंद्र सरकार का इसमें क्या हाथ है? यह सबकुछ सुप्रीम कोर्ट की देख-रेख में हो रहा है। इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
वहीं राज्यसभा में काफी हंगामा हुआ जसकी वजह से दोपहर 2 बजे तक के लिए उच्च सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया है।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सासंदों ने इस लिस्ट को लेकर सवाल खड़े किए हैं। वहीं गृहमंत्री राजनाथ सिंह का इस पूरे मामले पर कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। टीएमसी के सांसद सौगत रॉय ने आज जारी हुए एनआरसी के ड्राफ्ट को लेकर राज्यसभा में स्थगन प्रस्ताव दिया। टीएमसी सासंदों और कुछ दूसरे सासंदों ने डेरेक ओ ब्रायन के नेतृत्व में इस मामले को लेकर हंगामा किया जिसे सभापति वैंकेया नायडू ने संभालने की काफी कोशिश की लेकिन बाद में उन्होंने 2 बजे तक के लिए राज्यसभा स्थगित कर दी।
केंदीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, 'कुछ लोग बिना वजह डर का माहौल पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। यह पूरी तरह से निष्पक्ष रिपोर्ट है। किसी भी तरह की गलतफहमी नहीं फैलाई जानी चाहिए। यह केवल ड्राफ्ट है ना कि फाइनल लिस्ट। यदि किसी का नाम फाइनल लिस्ट में नहीं है तो वह विदेशी ट्रिब्यूनल से संपर्क कर सकता है। किसी के भी खिलाफ कोई प्रतिरोधी कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसलिए भयभीत होने की कोई जरुरत नहीं है।'
वहीं केंद्रीय गृहराज्यमंत्री किरण रिजिजू ने लिस्ट को लेकर जारी राजनीतिक घमासान पर कहा कि सरकार किसी के साथ भी अन्याय नहीं करेगी। उन्होंने कहा, 'एनआरसी पर राजनीतिक हंगामा या अविश्वास का माहौल बनाना गलत है। यह आदेश माननीय सुप्रीम कोर्ट का था और जिनका नाम लिस्ट में नहीं है उनके ऊपर अभी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। सबके पास दूसरा मौका है इसलिए बेवजह असहज स्थिति बनाने से बचना चाहिए।'
ड्राफ्ट पर असम कांग्रेस के अध्यक्ष रिपुन बोरा ने कहा, '40 लाख नामों को अयोग्य करार दिया गया है जो बहुत बड़ा आंकड़ा है और काफी आश्चर्यजनक भी। रिपोर्ट में बहुत सारी अनियमितताएं हैं। हम इस मामले को सरकार के सामने और संसद में उठाएंगे। इसके पीछे भाजपा का राजनीतिक मकसद भी है।'
टीएमसी के सासंद एसएस रॉय ने कहा, 'केंद्र सरकार ने जानबूझकर 40 लाख धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को एनआरसी से हटा दिया है। इसका असम के आस-पास के विभिन्न राज्यों की जनसांख्यिकी पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ेगा। प्रधानमंत्री को सदन में आना चाहिए और इसपर सफाई देनी चाहिए।'
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने असम एनआरसी के मसले पर कहा, 'कई लोगों के पास आधार कार्ड और पासपोर्ट भी थे लेकिन फिर भी उनका नाम ड्राफ्ट में नहीं था। सही दस्तावेजों के बावजूद लोगों को शामिल नहीं किया गया। कई लोगों को उनके सरनेम की वजह से भी बाहर किया गया। क्या सरकार जबरदस्ती लोगों को बाहर निकालना चाहती है? '
Some people are unnecessarily trying to create an atmosphere of fear. This is a completely impartial report. No misinformation should be spread.This is a draft and not the final list: Home Minister Rajnath Singh #NRCAssam pic.twitter.com/w1AN6bGfO9
— ANI (@ANI) July 30, 2018