असम आंदोलन में एनआरसी के लिए जान दी मलिक ने, सूची से पत्नी-बेटे का नाम गायब
- असम आंदोलन में जान गंवाने वाले मदन मलिक की पत्नी का नाम एनआरसी सूची में नहीं है।
- कारगिल में देश के लिए लड़े जांबाज सनाउल्लाह का भी नाम गायब
- ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के विधायक अनंत कुमार का नाम एनआरसी की अंतिम सूची से गायब
- असम के वित्त मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि, एनआरसी में कई ऐसे भारतीयों के नाम नहीं हैं...
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असम आंदोलन में जान गंवाने वाले मदन मलिक की पत्नी का नाम एनआरसी सूची में नहीं है। 66 वर्षीय सरबबाला सरकार कहती हैं कि मेरे पति की जान विदेशियों को असम से खदेड़ने वाले असम आंदोलन में गई थी। विरोधियों ने मेरे पति का सिर काट दिया, उनके बलिदान के कारण एनआरसी बनी और मेरा नाम काट दिया गया। अखिल असम छात्र संघ ने मदन के नाम पर शहीद स्मारक भी बनवाया है।
सरबबाला कहती हैं कि सरकार ने मेरे पति को शहीद माना, उन्हें मान पत्र दिया, लेकिन जब एनआरसी में नाम शामिल करने की बारी आई तो मेरी नहीं सुनी गई। गौरतलब है कि असम सरकार कई बार सरबबाला को सम्मानित कर चुकी है। 1985 में मुख्यमंत्री बने प्रफुल्ल महंत ने उन्हें 30 हजार रुपये और मान पत्र दिया था। इसके बाद 2016 में मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पांच लाख रुपये और मान पत्र देकर सम्मानित किया।
कारगिल में देश के लिए लड़े जांबाज सनाउल्लाह का भी नाम गायब
कारगिल युद्ध में देश के लिए लड़े मोहम्मद सनाउल्लाह का नाम एनआरसी की अंतिम सूची में नहीं है। राष्ट्रपति पदक से सम्मानित रिटायर्ड जेसीओ सनाउल्लाह की बेटियों और बेटे का नाम भी गायब है। हालांकि उनकी पत्नी को भारतीय नागरिक माना गया है। सनाउल्लाह को इसी साल विदेशी न्यायाधिकरण ने विदेशी घोषित किया था। सनाउल्लाह ने कहा, मुझे अपना नाम सूची में होने की उम्मीद नहीं थी। मेरा मामला हाईकोर्ट में लंबित है और न्यायालय पर मेरी पूरी आस्था है। मुझे विश्वास है कि इंसाफ मिलेगा। सनाउल्लाह के खिलाफ 2008 में मामला दर्ज किया गया था और उनके नाम को ‘डी’ श्रेणी (संदिग्ध मतदाता) में सूचीबद्ध किया गया था। मई में उन्हें डिटेंशन सेंटर भेजा गया। हालांकि बाद में गुवाहाटी हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिली।
विधायक हैं पर एनआरसी में नाम नहीं
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के विधायक अनंत कुमार मालो शनिवार को तब हैरान हो गए जब उनका नाम एनआरसी की अंतिम सूची से गायब था।
पहले पत्नी का नाम नहीं था, अब पूरे परिवार का गायब
45 साल के अब्दुल हलीम मजूमदार को समझ नहीं आ रहा कि उनके साथ क्या हुआ है? पिछली एनआरसी सूची में मजूमदार की पत्नी का नाम नहीं था तो उन्होंने सुधार के लिए आवेदन दिया, लेकिन आई सूची से कामरूप जिले के टकड़ापाड़ा निवासी हलीम मजूमदार का पूरा परिवार गायब है।
कई भारतीयों के नाम नहीं : हिमंता
असम के वित्त मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि, एनआरसी में कई ऐसे भारतीयों के नाम नहीं हैं जो 1971 से पहले शरणार्थियों के रूप में बांग्लादेश से आए थे। प्राधिकारियों ने इनका शरणार्थी प्रमाण पत्र स्वीकारने से इनकार कर दिया। केंद्र व राज्य सरकारों के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट को सटीक एवं निष्पक्ष एनआरसी के लिए सीमावर्ती जिलों में 20 फीसदी और शेष जिलों में 10 फीसदी पुन: सत्यापन की अनुमति देनी चाहिए।