'उड़ता पंजाब' की रिलीज पर संकट, अब सोमवार तक टला फैसला
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पहले फिल्मी फिर राजनीतिक विवादों में आई अनुराग कश्यप की फिल्म उड़ता पंजाब अपने तय समय पर रिलीज हो पाएगी या नहीं इस बात पर अभी भी भ्रम बना हुआ। हालात ऐसे बन रहे हैं जिन्हें देखकर कहा जा सकता है कि यह फिल्म अपने तय समय पर रिलीज नहीं हो पाएगी।
फिल्म को 17 जून को रिलीज होना है। फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन के नियमों के अनुसार किसी फिल्म को रिलीज करने के सात दिन पहले निर्माताओं को डिस्ट्रीब्यूटरों के साथ यह सुनिश्चित करना होता है कि फिल्म रिलीज हो रही है या नहीं?
शुक्रवार को भी मुंबई हाईकोर्ट ने इस फिल्म से जुड़े मामले की सुनवाई की। मामले को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने इसकी बाकी सुनवाई सोमवार तक टाल दी है। यदि सोमवार को फिल्म निर्माताओं के पक्ष में यह फैसला आता है तो भी तकनीकी रुप से फिल्म को रिलीज करने में समस्या आ सकती है।
शुक्रवार को अपनी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म को लेकर कुछ टिप्पणी की। सेंसर बोर्ड के साथ सुर में सुर मिलाते हुए कोर्ट ने भी माना कि कुत्ते का नाम जैकी चेन नहीं होना चाहिए, इसके लिए सिर्फ जैकी काफी है।
अपनी टिप्पणी देते हुए कोर्ट ने कहा कि कोई भी फिल्म गालियों के दम पर नहीं चलती है। जब तक जरुरी ही ना हो जाए तब तक फिल्म में गालियों का परहेज करना चाहिए। फिल्म अच्छी कहानी से चलती है। उसमें अच्छी स्टोरी होनी चाहिए। सेंसर बोर्ड को भी फटकारते हुए कोर्ट ने कहा कि आप इतना परेशान क्यों हैं। आज के दर्शक पूरी तरह से समझदार हैं, वे चीजों की व्याख्या अपनी समझ के अनुसार कर लेते हैं।
सेंसर बोर्ड को हैं भारी ऐतराज
सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को सर्टिफिकेट देना से मना कर दिया है। सेंसर बोर्ड ने फिल्म के निर्माताओं को करीब 90 कट्स बताए हैं। उसके बाद ही इस फिल्म को प्रमाण पत्र देने और रिलीज करने की बात कही है। फिल्म के निर्माता अनुराग कश्यप को इस बात से गहरी नाराजगी है। उन्होंने कहा है कि फिल्म में इतने कट लगाने के बाद फिल्म में जान खत्म हो जाएगी।
सेंसर बोर्ड ने फिल्म की शुरूआत में पंजाब के बोर्ड को हटाने को कहा है। इसके साथ ही फिल्मकारों से पंजाब, जालंधर,चंडीगढ़,अमृतसर, तरनतारन, जशनपुरा, अंबेसर, लुधियाना और मोगा नामों को फिल्म के बैकग्राउंड और डायलॉग से हटाने को कहा गया है।
सेंसर के नियम कहते हैं कि फिल्में देश की नीतियों, किसी क्षेत्र/राज्य विशेष, धर्म, संप्रदाय और व्यक्ति को गलत ढंग से नहीं दिखा सकतीं। सेंसर के सूत्रों के मुताबिक उड़ता पंजाब में दिखाया गया है कि राज्य के 70 फीसदी लोग नशा करते हैं। फिल्म 95 फीसदी पंजाब में आधारित है और इसमें पंजाबी ही बोली गई है।
फिल्म के पहले गीत से चित्तावे और हरामी जैसे शब्द हटाने को गया है। तो दूसरे गीत से 'tom di c*ck jevhe chitti chitti c*ck' और 'coke c*ck'हटाने को कहा गया है। सेंसर बोर्ड ने इसके अलावा फिल्म में इलेक्शन, एमपी, पार्टी फ्रॉम पार्टी वर्कर, एमएलए, पंजाब, पार्लियामेंट जैसे शब्दों पर आपत्ति जतायी है। फिल्म में एक नेता को चुनाव प्रचार के दौरान ड्रग्स बांटते दिखाया गया है। जबकि सभी राजनीतिक दल ड्रग्स की समस्या के विरुद्ध हैं।
और भी हैं कुछ दिक्कतें
सेंसर बोर्ड को कुछ दृश्यों पर भी ऐतराज है। सेंसर बोर्ड प्रमुख ने फिल्म के तीसरे गीत से वह दृश्य हटाने की बात कही जिसमें एक सरदार अपने शरीर को खुजलाते दिखाया गया है। इसके अलावा वह क्लोजअप सीन भी हटाने को कहे गए हैं जिसमें इंजेक्शन से ड्रग्स लेते दिखाया गया है।
इसके साथ ही वह सीन हटाने की मांग की गयी है जिसमें फिल्म का नायक टॉमी,जनता के सामने पेशाब करता दिखागा गया है। फिल्म में कई आपत्तिजनक संवाद हैं जिनमें पंजाब तथा इसके लोगों की छवि खराब तथा भावनाएं आहत होंगी। जैसेः पंजाब दी जमीन बंजर और औलाद कंजर है।
ड्रग्स किस तरह से तैयार होते हैं। उनमें कौन-कौन से रसायन होते हैं। इन सबका विवरण और चित्रण फिल्म में हैं। सेंसर बोर्ड को यह स्वीकार नहीं है। फिल्म में आलिया भट्ट बिहार से आई गरीब-मजदूर युवती बनी हैं जो ड्रग्स की शिकार हो जाती है। इसके बाद वह ड्रग्स हासिल करने के लिए पैसों के अभाव में कई पुरुषों से संबंध बनाती है।