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Hindi News ›   India News ›   Now the 65th National Film Awards will not be available without Aadhaar card

अब बिना आधार नहीं मिलेंगे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, तीन गुना बढ़ी एंट्री फीस

Wed, 21 Feb 2018 02:39 AM IST
रवि बुले, अमर उजाला, मुंबई
रवि बुले, अमर उजाला, मुंबई Updated Wed, 21 Feb 2018 02:39 AM IST
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Now the 65th National Film Awards will not be available without Aadhaar card
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अगर आपने फीचर फिल्म या गैर फीचर फिल्म बनाई है। या फिर आप सिनेमा पर किताब लिख चुके हैं और राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए आवेदन करना चाहते हैं तो आधार अब यहां भी अनिवार्य है। इसके अलावा इस साल से इन पुरस्कारों के लिए आवेदन करना भी महंगा हो गया है। 

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सरकार ने रविवार को 65वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के लिए आवेदन मांगे लेकिन साथ ही फीस में तीन गुने की बढ़ोतरी कर दी गई है। जमा की गई फीस वापस भी नहीं होगी। साथ ही इस साल से आवेदन करने वाले के लिए आधार नंबर अनिवार्य होगा। हर साल दादा साहेब फाल्के पुरस्कार के अतिरिक्त राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार तीन श्रेणियों में दिए जाते हैं। फीचर फिल्म, गैर फीचर फिल्म और सिनेमा पर सर्वोत्तम लेखन। 
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फीचर फिल्म श्रेणी में पिछले साल आवेदकों से पांच हजार रुपये का डिमांड ड्राफ्ट मांगा गया था। जबकि रविवार को घोषित आवेदन में फीचर फिल्म के साथ निर्माता को 11 हजार 800 रुपये (जीएसटी समेत) का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना होगा। इसी तरह से गैर फीचर के लिए इस साल 5900 रुपये जमा कराने होंगे। जबकि पिछले साल यह राशि दो हजार रुपये थी। सिनेमा पर सर्वोत्तम लेखन के आवेदन पर भी राशि पिछले साल की 2000 रुपये से बढ़ाकर इस साल 5900 कर दी गई है।
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बॉलीवुड के बड़े निर्माताओं पर भले ही फीस बढ़ाए जाने से फर्क न पड़े परंतु कम बजट और संघर्ष करके फिल्म बनाने वालों पर असर पड़ेगा। क्षेत्रीय सिनेमा बनाने वालों की जेब पर भी आवेदन भारी पड़ेगा। सरकार ने भले ही आवेदन फीस में इजाफा किया है, लेकिन पुरस्कारों की राशि नहीं बढ़ाई है।


पुरस्कार का उद्देश्य
सरकार के अनुसार फिल्म पुरस्कार का उद्देश्य उत्कृष्ट सौंदर्य बोध, तकनीक तथा सामाजिक प्रतिबद्धता की फिल्मों के निर्माण को प्रोत्साहन देना है। ऐसी फिल्में सिनेमाई रूप में देश के विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृतियों की समझ एवं विवेचना में योगदान के साथ ही राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बढ़ावा देती हैं। इन पुरस्कारों का उद्देश्य पुस्तकों, लेखों, समीक्षाओं आदि के प्रकाशन के माध्यम से कला रूप में सिनेमा के अध्ययन, सूचना के प्रसार और समालोचनात्मक विवेचन को भी प्रोत्साहन देना है।

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