फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Now PHD will be completed in three years

दो नहीं अब तीन साल में होगी पीएचडी

Thu, 21 Jul 2016 06:16 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Thu, 21 Jul 2016 06:16 AM IST
विज्ञापन
Now PHD will be completed in three years
पीएचडी - फोटो : Getty

पीएचडी या डीफिल की डिग्री हासिल करने में अब न्यनूतम तीन साल लगेंगे। इसमें कोर्स वर्क की छह महीने की अवधि भी शामिल होगी। वहीं एमफिल एक साल में किया जा सकेगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने पीएचडी या डिफिल के लिए शोध पर्यवेक्षक के लिए भी मानक में बदलाव किया है।

विज्ञापन


इसके अंतर्गत अब संबंधित विश्वविद्यालय और संस्थान के ही अध्यापक शोध करा सकते हैं। विशेष परिस्थिति में दूसरे संस्थान के अध्यापक को सहायक शोध पर्यवेक्षक बनाया जा सकेगा। एमएचआरडी ने पीएचडी/डीफिल तथा एमफिल उपाधि प्रदान करने के न्यूनतम मानदंड और प्रक्रिया की अधिसूचना जारी कर दी है।
विज्ञापन


इसे नियमावली-2016 नाम दिया गया है। इसके अनुसार पीएचडी करने में न्यूनतम तीन साल लगेंगे। पहले यह अवधि दो साल थी। पीएचडी के लिए अधिकतम छह वर्ष मिलेंगे। दिव्यांग तथा महिला अभ्यर्थियों को दो साल की छूट दी गई है। हालांकि विशेष परिस्थियों में रिसर्च की अवधि बढ़ाई जा सकती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


एमफिल पूर्व की भांति एक साल में किया जा सकेगा। अधिकतम अवधि दो साल होगी। नई नियमावली के अंतर्गत दूरस्थ शिक्षा पद्धति तथा अंशकालिक शिक्षा पद्धति के संस्थान एमफिल और पीएचडी नहीं करा सकेंगे। हालांकि, सभी मानक पूरे करने वाले संस्थानों को अंशकालिक आधार पर पीएचडी पाठ्यक्रम चलाने की अनुमति होगी।

प्रवेश परीक्षा में पाने होंगे 50 फीसदी अंक

Now PHD will be completed in three years
पीएचडी - फोटो : Getty

पीएचडी / डीफिल पाठ्यक्रम में प्रवेश परीक्षा के आधार पर ही प्रवेश होगा। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि परीक्षा क्वालीफाइंग होगी। इसे पास करने के लिए अभ्यर्थी को न्यूनतम 50 फीसदी अंक हासिल करने होंगे। पेपर में भी 50 फीसदी प्रश्न शोध पद्धति तथा अन्य सवाल संबंधित विषय के होंगे।

नेट और जेआरएफ अभ्यर्थियों को विश्वविद्यालय की ओर से निर्धारित मानक के अनुसार प्रवेश परीक्षा से छूट दी जाएगी। विश्वविद्यालय, संस्थान के पूर्णकालिक अध्यापक ही शोध पर्यवेक्षक नियुक्त किए जा सकते हैं। बाहर के शिक्षकों के अंडर में शोध की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रोफेसर को शोध पर्यवेक्षक बनाने के लिए जरूरी है कि उनके कम से कम पांच शोध पत्र मान्य जरनल में प्रकाशित हुए हों।

एसोसिएट तथा असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए दो शोध पत्र प्रकाशन की बाध्यता है। इन्हें पीएचडी भी होना चाहिए। मंत्रालय ने यह भी निर्धारित कर दिया है कि प्रोफेसर के अंडर में एक समय में अधिकतम आठ शोधार्थी पंजीकृत हो सकते हैं। इनके साथ तीन एमफिल के छात्र भी जुड़ सकते हैं।

एसोसिएट प्रोफेसर को एक समय में अधिकतम छह तथा असिस्टेंट प्रोफेसर को चार पीएचडी / डीफिल विद्यार्थियों को शोध पर्यवक्षेक नियुक्त किया जा सकता है। इनके अंडर में क्रमश: दो तथा एक एमफिल छात्र भी पंजीकृत किए जा सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed