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अब 90 मिनट में डिसइंफेक्ट होगा एन-95 मास्क, 99.9 फीसदी नष्ट होगा बैक्टीरिया
Sat, 11 Jul 2020 04:53 AM IST
अवधेश कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: अवधेश कुमार
Updated Sat, 11 Jul 2020 04:53 AM IST
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एन-95 मास्क
- फोटो : social media
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप चक्र इनोवेशन ने एन-95 मास्क को डिसइंफेक्ट करने और दोबारा इस्तेमाल करने वाली एक नई तकनीक विकसित की है। चक्र इनोवेशन ने ‘चक्त्रस् डिकोव’ नाम की ओजोन आधारित डिकंटेमिनेशन डिवाइस विकसित की है।
इस डिवाइस की मदद से एन-95 मास्क को 90 मिनट में डिकंटेमिनेट कर फिर से दस बार तक उपयोग में लिया जा सकता है। आईआईटी वैज्ञानिकों ने इस डिवाइस के 99.9 फीसदी तक बैक्टीरिया को नष्ट करने का दावा किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने शुक्रवार को इस तकनीक को लॉन्च किया। आईआईटी दिल्ली के सेंटर फॉर बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में इस तकनीक का परीक्षण किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार एन-95 मास्क को बार-बार प्रयोग करना असुरक्षित है। इसे फेंके जाने से बायोमेडिकल कचरे में वृद्धि, अतिरिक्त संक्रमण और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। एक कैबिनेट के आकार में डिजाइन की गई इस डिवाइस को एक इनोवेटिव डिकंटेमिनेशन मैकेनिज्म के साथ बनाया गया है, जो एन-95 मास्क के छिद्रों की सफाई के लिए ओजोन गैस की हाई पेनिट्रेबिलिटी का उपयोग करता है।
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ओजोन एक मजबूत ऑक्सीडाइजिंग एजेंट है, जो कि प्रोटीन कोट के जरिये डिफ्यूज होता है और वायरस को नष्ट करता है। प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे तुषार बाथम के अनुसार इस डिवाइस को चक्र इनोवेशन की टीम ने आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसरों और शोधकर्ताओं की अध्यक्षता में विकसित किया है। पुणे में टेस्टिंग केे बाद अब मार्केट में लाने की तैयारी की जा रही है।
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इस डिवाइस की मदद से एन-95 मास्क को 90 मिनट में डिकंटेमिनेट कर फिर से दस बार तक उपयोग में लिया जा सकता है। आईआईटी वैज्ञानिकों ने इस डिवाइस के 99.9 फीसदी तक बैक्टीरिया को नष्ट करने का दावा किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने शुक्रवार को इस तकनीक को लॉन्च किया। आईआईटी दिल्ली के सेंटर फॉर बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में इस तकनीक का परीक्षण किया गया है।
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विशेषज्ञों के अनुसार एन-95 मास्क को बार-बार प्रयोग करना असुरक्षित है। इसे फेंके जाने से बायोमेडिकल कचरे में वृद्धि, अतिरिक्त संक्रमण और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। एक कैबिनेट के आकार में डिजाइन की गई इस डिवाइस को एक इनोवेटिव डिकंटेमिनेशन मैकेनिज्म के साथ बनाया गया है, जो एन-95 मास्क के छिद्रों की सफाई के लिए ओजोन गैस की हाई पेनिट्रेबिलिटी का उपयोग करता है।
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ओजोन एक मजबूत ऑक्सीडाइजिंग एजेंट है, जो कि प्रोटीन कोट के जरिये डिफ्यूज होता है और वायरस को नष्ट करता है। प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे तुषार बाथम के अनुसार इस डिवाइस को चक्र इनोवेशन की टीम ने आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसरों और शोधकर्ताओं की अध्यक्षता में विकसित किया है। पुणे में टेस्टिंग केे बाद अब मार्केट में लाने की तैयारी की जा रही है।