देश में अभी और बढ़ेंगे कोरोना के मामले,अस्पताल बनाने जरूरी, सरकार का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा
केंद्र ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि देश में कोरोना के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। आने वाले दिनों में कोरोना के मामले और बढ़ेंगे। ऐसे में मौजूदा अस्पतालों के अलावा बड़ी संख्या में अस्थायी अस्पताल बनाने होंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि इन अस्पतालों के बनने से लोगों का इलाज सही तरीके से हो सकेगा और उचित देखभाल हो सकेगी। इसके लिए बुनियादी व्यवस्था और कार्य बल को बढ़ाना होगा। साथ ही मानव संसाधन पर भी कदम उठाने की जरूरत है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी कहा है कि कोरोना से लड़ाई में जुटे डॉक्टरों और हेल्थ केयर स्टॉफ के लिए विशेषक्षों ने समय-समय पर कदम उठाए हैं और उनके लिए गाइडलाइन और प्रोटोकॉल तैयार किया है। सरकार ने बताया है कि 99.34 लाख पीपीई किट बांटे गए हैं। एक जून तक केंद्र की तरफ से 123.08 लाख एन-95 मास्क बांटे गए हैं। सरकार का कहना है कि पीपीई किट का उपयोग करने वाले हेल्थ केयर कर्मी किसी भी जोखिम से सुरक्षित हैं। उनके परिवार और बच्चों के लिए कोई अतिरिक्त जोखिम नहीं है। दरअसल, कोर्ट ने कोरोना के इलाज में लगे डॉक्टरों को क्वारंटीन करने के लिए बेहतर इंतजाम की मांग वाली डॉ. आरुषि जैन की याचिका पर सरकार से जवाब मांगा था।
संक्रमण से खुद को बचाने की अंतिम जिम्मेदारी स्वास्थ्यकर्मियों की
स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने हलफनामे में कहा है कि स्वास्थ्य सुविधा केंद्र में अस्पताल संक्रमण नियंत्रण समिति संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण और स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित ट्रेनिंग के लिए जिम्मेदार है। संक्त्रस्मण से खुद को बचाने और सुरक्षित रखने की अंतिम जिम्मेदारी स्वास्थ्यकर्मियों की ही है। केंद्र सरकार ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे ये पता चलता हो कि पीपीई किट पहनने वाले डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को कोरोना का संक्रमण हो रहा हो। याचिकाकर्ता ने सिर्फ अनुमान लगाया है।