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अब केरोसीन सब्सिडी भी सीधे बैंक खाते में

Tue, 26 Jul 2016 04:44 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो / अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 26 Jul 2016 04:44 AM IST
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Now kerosene subsidy directly in bank account

रसोई गैस सब्सिडी में होने वाली हेराफेरी पर रोक लगाने से उत्साहित केन्द्र सरकार अब राज्यों की मदद से केरोसीन की सब्सिडी की रकम भी गरीबों के बैंक खाते में जमा कराएगी। यह योजना हरियाणा के 8 जिलों में आगामी एक नवंबर से लागू होगी।

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कांग्रेस शासित कर्नाटक ने 90 हजार किलो लीटर मिट्टी के तेल का कोटा खत्म करने पर सहमति जतायी है। केन्द्र सरकार कर्नाटक को इसके लिए हर तिमाही लगभग 17 करोड़ रुपये देगी, जो कि उसके मिट्टी के तेल सब्सिडी का 75 फीसदी हिस्सा है। पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्र के अनुसार, 16.8 करोड़ रुपये की पहली किस्त कर्नाटक को दी जा चुकी है। 
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वैसे, मिटटी के तेल पर सब्सिडी सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजने की योजना (डीबीटीके) घरेलू रसोई गैस की सब्सिडी हस्तांतरण योजना, (डीबीटीएल) के समान ही लगती है। लेकिन दोनों में एक मूल फर्क यह है कि रसोई गैस के वितरण पर केन्द्र सरकार और उसकी कंपनियों का पूर्ण अधिकार है, जबकि मिट्टी के तेल का वितरण पूरी तरह से राज्य सरकार ही करती है।
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इसलिए वर्षों से चली आ रही मिट्टी के तेल की कोटा प्रणाली में वह कमी को तैयार नहीं हैं। हालांकि कई राज्य सरकारें इस तथ्य को समझ रही हैं कि डीबीटीके लागू होने से करोड़ों रुपये की चोरी रुकेगी और गरीबों की सब्सिडी का पैसा सीधे उनके बैंक खाते में जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक, हरियाणा के 8 जिलों में इसकी सफलता को देखने के बाद एक अप्रैल, 2017 से पूरे राज्य में इस योजना को लागू किया जाएगा। अधिकारी का कहना है कि हरियाणा के अलावा कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात और ओडिशा ने भी इस योजना को लागू करने में दिलचस्पी दिखाई है।

इसी के आधार पर देश भर के 33 जिलों को चुना जा रहा है, जिन्हें पायलट स्कीम में शामिल किया जाएगा। सरकार का कहना है कि डीबीटीके लागू होने के बाद सब्सिडी के मद में जो रकम बचेगी, उसे केन्द्र सरकार नहीं रखेगी बल्कि उसकी 75 फीसदी राशि राज्यों को दे दी जाएगी।

इस पर राज्यों के बीच सहमति बनती दिखाई दे रही है क्योंकि सब्सिडी वाले मिट्टी के तेल की कालाबाजारी से राज्यों को ही नुकसान है। एक अनुमान के मुताबिक, सब्सिडी वाले मिट्टी के तेल में से करीब 40 फीसदी हिस्सा डीजल और पेट्रोल में मिला कर बेच दिया जाता है।


इससे एक ओर जहां पर्यावरण पर घातक असर पड़ता है, वहीं दूसरी ओर इस पर कर में भी राज्यों को नुकसान होता है। मिलावटी ईंधन के उपयोग से वाहन मालिकों को जो नुकसान होता है, वह अलग।
मिट्टी के तेल पर इस समय जितनी सब्सिडी दी जा रही है, वह राशि गरीबों के खाते में जमा कर दी जाएगी और वही लोग दुकानों से इसे बाजार मूल्य पर खरीदेंगे।

लखनऊ में केरोसीन मूल्य    
पीडीएस में    16.10 
बाजार मूल्य  47.20
रुपये प्रति लीटर में-

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