यूपी और उत्तराखंड के बाद, भाजपा की गोवा-मणिपुर पर नजर
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उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में प्रचंड जीत हासिल करने वाली भाजपा ने अब गोवा और मणिपुर में भी सत्ता हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। दोनों ही राज्यों में नंबर दो की पार्टी भाजपा इसके लिए कांग्रेस के इतर अन्य दलों और निर्दलीय विधायकों को साधने में जुट गई है।
इस मिशन के तहत पार्टी ने जहां केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को गोवा के मोर्चे पर लगाया है, वहीं पार्टी महासचिव राम माधव को मणिपुर का गणित साधने की जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी का मानना है कि रक्षा मंत्री मनोहर परिकर को मुख्यमंत्री बनाने के दांव के सहारे वह गोवा में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई कांग्रेस को झटका दे सकती है।
दरअसल, गोवा की 40 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस को 18 तो भाजपा को 13 सीटों पर जीत हासिल हुई है। सरकार बनाने के लिए जरूरी 8 विधायकों से समर्थन की शर्त पूरी करने के क्रम में गडकरी ने परिकर के नाम पर तीन सीट जीतने वाली महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी और सेव गोवा फ्रंट के विधायक प्रसाद गांवकर को साध लिया है। इसके अलावा गडकरी तीन सीटों वाली गोवा फारवर्ड पार्टी, एनसीपी के इकलौते और एक निर्दलीय विधायक के संपर्क में हैं।
मणिपुर की राह आसान नहीं होने के बावजूद भाजपा संभावनाएं तलाश रही
पार्टी सूत्रों का कहना है कि गोवा फारवर्ड पार्टी के परिकर के नाम पर संकेत सकारात्मक है, जबकि एनसीपी विधायक की कुछ शर्तें हैं, जिन्हें पार्टी ने पूरा करने का भरोसा दिया है। खबर है कि सबकुछ ठीक होने के बाद सभी विधायक परिकर से मिलने दिल्ली आएंगे।
जहां तक मणिपुर का सवाल है तो राह आसान नहीं होने के बावजूद भाजपा सरकार संभालने की संभावनाएं तलाश रही है। इस राज्य की 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 21 तो कांग्रेस के पास 28 विधायक हैं। कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए जहां 4 सीटों वाली एनडीएफ को साधने की जरूरत है, वहीं भाजपा को इसके लिए एनडीएफ के अति 7 निर्दलीय-अन्य विधायकों की जरूरत पड़ेगी। राह आसान नहीं होने के बावजूद भाजपा मणिपुर में भी सरकार बनाने की संभावना तलाश रही है।