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नोटबंदी 1991 के बाद सबसे बड़ा 'रचनात्मक विध्वंस', जिसने कालाधन नष्ट किया: सुब्बाराव
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 06 Jan 2017 02:27 PM IST
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने बृहस्पतिवार को नोटबंदी के फैसले को 'एक सृजनकारी विनाश' बताया। उन्होंने कहा कि 1991 के सुधारों के बाद नोटबंदी अब तक का सबसे बड़ा उलट-फेर करने वाला फैसला है, जिसने काला धन को समाप्त करने में मदद की है।
सुब्बाराव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को रातोंरात 86 फीसदी मुद्रा को चलन से हटा दिया, जिसे 1991 के सुधारों के बाद सबसे उलट-फेर करने वाला फैसला बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी एक तरह से सृजनकारी विनाश है। लेकिन यह एक विशेष तरह का सृजनकारी विनाश है। क्योंकि इसने जिसे नष्ट किया है, वह एक विनाशकारी सृजन यानी काला धन है। इसलिए आप इसे इस तरह से समझ सकते हैं कि नोटबंदी विनाशकारी सृजन का सृजनकारी विनाश है।
सुब्बाराव हैदराबाद में इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट एंड रिसर्च इन बैंकिंग टेकभनोलॉजीज (आईडीआरबीटी) द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए ऐसा बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि नोटबंदी से भुगतान प्रक्रिया के डिजिटलीकरण को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय वित्तीय क्षेत्र में इनोवेश की झड़ी लग जाएगी।
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उन्होंने कहा कि सोचने के दो अलग-अलग तरीके हो सकते हैं। वित्तीय तकनीक के वैश्विक रुझान का विस्तार, जो वित्तीय उद्योग में आमूलचूल परिवर्तन ला रहा है और दूसरा, निमभन आय वाले देशों में नकदी आधारित अर्थव्यवस्था का नकदी पर कम आधारित अर्थव्यवस्था में रूपांतरण। दोनों में से किसी भी तरह से देखें, भारत के वित्तीय क्षेत्र में डिसरप्टिव इनोवेशन होगा।
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सुब्बाराव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को रातोंरात 86 फीसदी मुद्रा को चलन से हटा दिया, जिसे 1991 के सुधारों के बाद सबसे उलट-फेर करने वाला फैसला बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी एक तरह से सृजनकारी विनाश है। लेकिन यह एक विशेष तरह का सृजनकारी विनाश है। क्योंकि इसने जिसे नष्ट किया है, वह एक विनाशकारी सृजन यानी काला धन है। इसलिए आप इसे इस तरह से समझ सकते हैं कि नोटबंदी विनाशकारी सृजन का सृजनकारी विनाश है।
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सुब्बाराव हैदराबाद में इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट एंड रिसर्च इन बैंकिंग टेकभनोलॉजीज (आईडीआरबीटी) द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए ऐसा बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि नोटबंदी से भुगतान प्रक्रिया के डिजिटलीकरण को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय वित्तीय क्षेत्र में इनोवेश की झड़ी लग जाएगी।
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उन्होंने कहा कि सोचने के दो अलग-अलग तरीके हो सकते हैं। वित्तीय तकनीक के वैश्विक रुझान का विस्तार, जो वित्तीय उद्योग में आमूलचूल परिवर्तन ला रहा है और दूसरा, निमभन आय वाले देशों में नकदी आधारित अर्थव्यवस्था का नकदी पर कम आधारित अर्थव्यवस्था में रूपांतरण। दोनों में से किसी भी तरह से देखें, भारत के वित्तीय क्षेत्र में डिसरप्टिव इनोवेशन होगा।
वित्तीय प्रणाली में स्थिरता के साथ इनोवेशन भी हो
उन्होंने नियामकों से इनोवेशन को बढ़ावा देने और ग्राहकों की सुरक्षा करने और वित्तीय स्थिरता को बरकरार रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि एक ओर उन्हें यह तय करना है कि स्थिरता को बनाए रखा जाए और दूसरी ओर उन्हें यह भी सुनिश्चित करना है कि इनोवेशन भी कुंठित न हो। इसके बीच संतुलन बनाए रखने का निर्णय करना कठिन है और अलग-अलग लोग इस पर अलग-अलग राय रख सकते हैं।
माइक्रोफाइनेंस से लाखों को मिला लाभ
माइक्रोफाइनेंस के बारे में उन्होंने कहा कि इस मॉडल ने भारत में लाखों निमभन आय वाले परिवारों को लाभ मिला है। खासकर विभाजन से पहले के आंध्रप्रदेश में इसका विशेष लाभ मिला है। उन्होंने याद करते हुए कहा कि 2010 के संकट के समय आरबीआई इस बात पर उहापोह में था कि क्या एमएफआई की ब्याज दरों को नियमित किया जाए, और अगर हां, तो यह दर कितनी होनी चाहिए।
बैंक प्रतियोगी बने रहने के लिए रास्ते तलाशें
सुब्बाराव ने कहा कि यद्यपि नोटबंदी अभियान की लागत और इससे होने वाला लाभ अत्यधिक विवाद का विषय है, लेकिन नीतिगत इनोवेशन का विषय विवाद के दायरे में नहीं आता है। उन्होंने कहा कि भारत में वित्तीय क्षेत्र में भुगतान के मामले में ढेर सारे डिसरप्टिव इनोवेशन हुए हैं। पूर्व गवर्नर ने कहा कि पारंपरिक बैंकिंग मॉडल को कम लागत में जमा मिलने की सुविधा है और यह अन्य वित्तीय संस्थानों (जिनमें फाइनेंसियल टेकभनोलॉजी कंपनियां भी शामिल हैं) के मुकाबले लाभ में है।
माइक्रोफाइनेंस से लाखों को मिला लाभ
माइक्रोफाइनेंस के बारे में उन्होंने कहा कि इस मॉडल ने भारत में लाखों निमभन आय वाले परिवारों को लाभ मिला है। खासकर विभाजन से पहले के आंध्रप्रदेश में इसका विशेष लाभ मिला है। उन्होंने याद करते हुए कहा कि 2010 के संकट के समय आरबीआई इस बात पर उहापोह में था कि क्या एमएफआई की ब्याज दरों को नियमित किया जाए, और अगर हां, तो यह दर कितनी होनी चाहिए।
बैंक प्रतियोगी बने रहने के लिए रास्ते तलाशें
सुब्बाराव ने कहा कि यद्यपि नोटबंदी अभियान की लागत और इससे होने वाला लाभ अत्यधिक विवाद का विषय है, लेकिन नीतिगत इनोवेशन का विषय विवाद के दायरे में नहीं आता है। उन्होंने कहा कि भारत में वित्तीय क्षेत्र में भुगतान के मामले में ढेर सारे डिसरप्टिव इनोवेशन हुए हैं। पूर्व गवर्नर ने कहा कि पारंपरिक बैंकिंग मॉडल को कम लागत में जमा मिलने की सुविधा है और यह अन्य वित्तीय संस्थानों (जिनमें फाइनेंसियल टेकभनोलॉजी कंपनियां भी शामिल हैं) के मुकाबले लाभ में है।