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नोटबंदी से देश पर परमाणु हमला : शिवसेना

Thu, 19 Jan 2017 04:14 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुंबई
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुंबई Updated Thu, 19 Jan 2017 04:14 AM IST
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Note ban a 'nuclear bomb' strike on country: Shiv Sena
फाइल फोटो - फोटो : PTI

शिवसेना ने नोटबंदी को लेकर एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। शिवसेना ने कहा है कि इस फैसले ने भारतीय अर्थव्यवस्था को उस तरह तबाह कर दिया है जिस तरह अमेरिका ने साल 1945 में जापान के शहर हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराकर तहस नहस कर दिया था। 

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पीएम मोदी के मंत्रिमंडल में गूंगे बहरे तोते बैठा दिए गए हैं और इसी तरह के भारतीय रिजर्व बैंक के  गवर्नर की नियुक्ति कर दी गई है, जिन्होंने अर्थव्यवस्था की जड़ों को हिलाकर रख दिया है।
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शिवसेना के मुखपत्र में ‘नोटबंदी का परमाणु बम’ नामक शीर्षक से प्रकाशित संपादकीय में कहा गया है कि पीएम मोदी ने 500 और 1000 रुपये के नोट चलन से बाहर कर भारतीय अर्थव्यवस्था को हिरोशिमा और नागासाकी की तरह तहस-नहस कर दिया है। 

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'उर्जित पटेल की नियुक्ति से अर्थव्यवस्था का दिवाला निकल गया'

Note ban a 'nuclear bomb' strike on country: Shiv Sena
उर्जित पटेल

ऐसा लगता है कि मोदी किसी की बात सुनने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने नोटबंदी की घोषणा करने से पहले आरबीआई तक की सलाह नहीं ली। शिवसेना ने कहा कि रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल की नियुक्ति की गई और देश की अर्थव्यवस्था का दिवाला निकल गया। 

मुखपत्र की संपादकीय में एसोचैम की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि देश में अब तक 40 लाख नौकरियां जा चुकी है। कम से कम 50 प्रतिशत उद्योग और 35 प्रतिशत रोजगार प्रभावित हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्र में बेरोजगारी बढ़ी है। भविष्य में यह आंकड़ा और बढ़ेगा। नोटबंदी से पहले जहां मनरेगा में 30 लाख मजदूर काम करते थे वहीं अब यह संख्या बढ़कर 83 लाख हो गई है।

पीएम मोदी ने महाराष्ट्र के हालिया दौरे में कहा था कि वह एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार से सलाह लेते रहे हैं। इस पर कटाक्ष करते हुए शिवसेना ने कहा है कि यदि वास्तव में पवार से सलाह ले रहे होते तो वह जरूर कहते कि सहकारी बैंकों को भ्रष्ट बताकर किसानों की अंतेष्टि मत करो, क्योंकि सहकारिता क्षेत्र महाराष्ट्र की आत्मा है। 

पहले शरद पवार ने नोटबंदी का समर्थन किया था लेकिन अब मुखर विरोध कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि नोटबंदी काला धन लाने में नाकाम रहा, क्योंकि काला धन विदेशों में है। इसलिए इसे लाया नहीं जा सका। नोटबंदी से ग्रामीण सहकारी अर्थव्यवस्था को सबसे अधिक नुकसान हुआ है, जिसमें राज्य एवं जिला सहकारी बैंक, वित्तीय संस्थान और चीनी सहकारी मिल भी शामिल हैं।

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