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नोट बैनः आनन-फानन के वो 5 फैसले, जिन्होंने बढ़ाई लोगों की मुसीबत

Wed, 16 Nov 2016 08:14 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 16 Nov 2016 08:14 PM IST
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Note ban: 5 step who affected govt decision

आठ नवंबर की शाम प्रधानमंत्री मोदी अचानक टीवी के माध्यम से देश के सामने आए तो ये तो तय था कि कुछ बड़ा मामला है और वो बड़ी घोषणा कर सकते हैं। लोगों का अंदाजा सही निकला और प्रधानमंत्री मोदी ने टीवी के माध्यम से ही ऐसी घोषणा कर दी जिससे एकबारगी पूरा देश सहम गया।

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वो घोषणा थी 500 और 1000 के नोटों को बंद करने की। जिसका अगले कई दिनों तक देश में व्यापक असर देखने को मिला। बैंकों के बाहर लंबी लंबी लाइन लगी हैं और लोग जरूरी खर्च चलाने के लिए चंद नोट पाने की जद्दोहद में बैंकों और एटीएम के बाहर डेरा डाले हुए हैं।
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देशभर में अफरातफरी मची तो सरकार ने लोगों को राहत देने के नाम पर आनन फानन में एक के बाद एक कई ऐसे फैसले कर डाले जिनका लोगों को उल्टा खामियाजा ही भुगतना पड़ेगा। आइए डालते हैं नोटबंदी के सरकार के ऐसे ही पांच फैसलो पर नजर।

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हाथों पर स्याही लगाना 

Note ban: 5 step who affected govt decision
आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने आज प्रेस कान्फ्रेंस कर घोषणा की कि अब बैंक से नोट निकालने वाले लोगों के हाथों पर स्याही लगाई जाएगी जिससे वो दोबारा लाइन में लग कर पैसे न निकाल सकें। पहली नजर में सरकार का यह फैसला अव्यवहारिक नजर आता है। सवाल ये है कि जिसके घर की जरूरतें 4500 रुपये में पूरी न होती हों वो क्या करे। या किसी के घर में कोई आयोजन हो तो वो फिर बाकी पैसे के लिए किसका मुंह ताके। 

दो हजार के नोट को चलाने में व्यवहारिक दिक्‍कतें
एक बड़ी और व्यवहारिक दिक्‍कत दो हजार के नोट को लेकर भी है। ज्यादातर बैंकों से पुराने नोट बदलने पर केवल 2-2 हजार के नोट ही दिए जा रहे हैं। लोगों की शिकायत ये है कि दो हजार का नोट कोई खुलाने के लिए तैयार ही नहीं होता। न दुकान वाला न पेट्रोल पंप पर। पेट्रोल पंप वाले तो ये शर्त रख दे रहे हैं कि बड़ा नोट खुलाना है तो कम से कम 500 रुपये का तेल डलवाना होगा। वहीं, अगर आप 100 या 50 रुपये का सामान लेने दुकान पर जाते हैं तो दुकानदार भी बड़ा नोट देखकर खुलाने से इंकार कर देता है। आलम ये है कि दो हजार का नोट खुलवाने के लिए लोगों तरह तरह की शर्त थोप दे रहे हैं। 

अधिकतम 4500 रुपये निकालने की लिमिट

Note ban: 5 step who affected govt decision
सरकार ने बैंक से अधिकतम 45 रुपये निकालने की लिमिट तय कर दी है। जो पहली नजर में ही नाकाफी लगती है। उस दौर में जब सरकार न्यूनतम वेतन 30 हजार से ज्यादा तय कर चुकी है तब 4500 रुपये में किस घर का गुजारा चलना संभव है। अगर चल भी जाए तो अधिकतम दो या तीन दिन के लिए।

इसके बाद फिर व्यक्ति को पैसे बदलवाने या निकालने के लिए लाइन में लगना पड़ेगा। वहीं ज्यादातर जगह तो दिक्‍कत ये है कि बैंक अपने खाते से भी अधिकतम 45 सौ रुपये ही निकालने दे रहे हैं। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में तो यह लिमिट 2 हजार रुपये की ही है। ऐसे में लोगों को लगभग रोजाना ही लाइन में खड़े होना पड़ रहा है।

प्राइवेट अस्पतालों में भी पुराने नोट का बंद होना

सरकार ने नोट बैन की घोषणा करते हुए इस बात का जिक्र किया था कि सरकारी अस्पतालों में अभी पुराने नोट ही चलते रहेंगे। लेकिन इस फैसले से प्राइवेट अस्पतालों को अलग रखना कहीं से भी नीतिपूर्ण नजर नहीं आता।

सवाल ये है कि सरकारी अस्पतालों में जब सारा इलाज फ्री होता है और जांचें नाम मात्र के खर्चे पर होती हैं तो फिर वहां पुराने नोटों को चलन में बनाए रखने से अच्छा था कि प्राइवेट अस्पतालों को भी इसकी परिधि में रखा जाता। क्योंकि बड़ी संख्या में लोग आज भी प्राइवेट अस्पतालों में ही इलाज कराते हैं लेकिन एकाएक नोट बंद करने से लोगों को इलाज से महरूम होना पड गया। निजी बैंकों ने सरकारी आदेश आते ही पुराने नोट लेने बंद कर दिए इसका नतीजा ये हुआ कि लोगों को बिना इलाज के ही अपने मरीजों को अस्पताल से ले जाना पड़ा।

कई जगह तो इलाज के अभाव में लोगों के मरने की खबरें भी आई हैं तो कई जगह अस्पताल वालों ने बिना नए नोट लिए शवों को देने तक से इंकार कर दिया।
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