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अर्पित होटल अग्निकांड से कोई सीख नहीं, दिल्ली फायर सर्विस को अब तक नहीं मिले रोबोट और ड्रोन

Mon, 09 Dec 2019 05:32 PM IST
देव कश्यप अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Mon, 09 Dec 2019 05:32 PM IST
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Not take caution after Arpit hotel fire, Fire department not yet received robots and drones
Delhi Fire - फोटो : अमर उजाला

करोलबाग का अर्पित होटल अग्निकांड हो या फिल्मिस्तान का अनाजमंडी अग्निकांड, परिणाम बताते हैं कि सरकार और एजेंसियां ऐसे बड़े हादसों से सबक सीखने को तैयार नहीं रहतीं। अगर अर्पित होटल अग्निकांड से मिले सबक को ध्यान में रखा गया होता तो शायद अनाज मंडी जैसे हादसों को होने से रोका जा सकता था, या ऐसे हादसों से ज्यादा बेहतर तरीके से निबटा जा सकता था। लेकिन एजेंसियों ने घटनाओं से कोई सबक नहीं सीखा और उसका परिणाम रविवार को एक और हादसे के रुप में सामने आया जिसमें 43 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।  

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दरअसल, इसी वर्ष 12 फरवरी को करोलबाग के अर्पित होटल में सुबह-सुबह आग लगने से 17 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस घटना में आग से निबटने में फायर विभाग की गंभीर खामियां उजागर हुई थीं। पहले तो लोगों को बचाने के लिए पहुंची स्काई लिफ्ट ही नहीं खुली और आग में फंसे लोगों को बचाने में समस्या आई, बाद में दमकल विभाग की गाड़ियों में भी कमी आ गई थी जिससे आग पर काबू पाने में समय लगा। इस घटना के बाद फायर सर्विस को अत्याधुनिक बनाने के लिए स्काई लिफ्ट, ड्रोन और रोबोट खरीदने की प्रक्रिया शुरु की गई थी। लेकिन इस घटना के दस महीने गुजर जाने के बाद भी दिल्ली फायर सर्विस को ये मशीनें अब तक नहीं मिल पाई हैं। दिल्ली फायर विभाग के एक अफसर के मुताबिक अभी भी इन मशीनों के आने में लगभग एक महीने का समय लग सकता है। 

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प्रक्रिया अंतिम दौर में

जानकारी के मुताबिक अर्पित होटल अग्निकांड के बाद दिल्ली फायर सर्विस को आधुनिक बनाने की जिम्मेदारी डीएमआरसी को दी गई थी। डीएमआरसी ने इसके लिए 29 करोड़ रुपये का फंड भी जारी कर दिया था। प्रक्रिया के तहत एक स्काई लिफ्ट, चार फायर फाइटिंग रोबोट और छः ड्रोन्स की खरीद किया जाना था। स्काई लिफ्ट के लिए दस करोड़ रुपये और शेष बाकी चीजों के लिए फंड निश्चित किया गया था। फिलहाल, आज तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। अगले एक माह में यह प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।    

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अर्पित होटल अग्निकांड की रिपोर्ट से भी सीख नहीं

होटल में 17 लोगों की मौत के बाद इस घटना की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया था। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कमेटी ने स्पष्ट कर दिया था कि लोगों की मौत का ज्यादा बड़ा कारण आग नहीं, बल्कि धुएं से दम घुटना था। कमेटी ने सुझाव दिया था कि समय रहते सभी व्यावसायिक भवनों और अन्य बड़े भवनों में हवा-प्रकाश के लिए पर्याप्त खुली जगहें बना दी जानी चाहिए। भवन से निकासी के लिए उनके आकार के हिसाब से न्यूनतम दो या अधिक निकास द्वार होना चाहिए।



कमेटी ने करोलबाग जैसी एरिया का ड्रोन से सर्वे करवाकर आग से निबटने के लिए जरुरी कदम उठाने को कहा गया था। ड्रोन के जरिए आग से निबटने के उपायों को चेक किए जाने का भी सुझाव दिया गया था। लेकिन इस रिपोर्ट से भी कोई सीख नहीं ली गई। आज भी अनेक भवन सिर्फ एक निकास द्वार के साथ बने हैं जिसके कारण किसी दुर्घटना के समय लोगों का बाहर निकलना संभव नहीं हो पाता है। अग्निशमन विभाग समय-समय पर इस तरह की एडवाइजरी जारी करता रहता है, लेकिन फिल्मिस्तान की घटना बताती है कि इस तरह की एडवाइजरी के प्रति कोई ध्यान नहीं दिया जाता।

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