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पीएम मोदी नहीं, योगी आदित्यनाथ बढ़ा रहे अपना दल (एस) की मुसीबत
Wed, 26 Dec 2018 02:38 PM IST
आसिम खान
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Wed, 26 Dec 2018 02:38 PM IST
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अपना दल एस के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष पटेल
- फोटो : amar ujala
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लोकजनशक्ति पार्टी के बाद अब अपना दल (एस) ने भाजपा को आंख दिखाना शुरू कर दिया है। लोकसभा चुनाव के ठीक पहले, मंगलवार को पार्टी के बड़े नेता आशीष पटेल ने भाजपा पर अपनी पार्टी की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर वह समय पर सही निर्णय नहीं लेती है तो उन्हें पुनर्विचार करना पड़ेगा। माना जा रहा है कि आशीष पटेल का यह बयान अपना दल के संस्थापक सोनेलाल पटेल की बेटी अनुप्रिया पटेल के इशारे पर आया है।
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मिर्जापुर से सांसद और इस समय केंद्र में मंत्री अनुप्रिया पटेल इस बार उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी के लिए ज्यादा सीटें चाहती हैं। इसके लिए उन्होंने रामविलास पासवान प्रकरण से सीख लेते हुए भाजपा पर दबाव बनाने की शुरुआत कर दी है। 2014 के लोकसभा चुनाव में उनके खाते में दो सीटें आयी थीं। मिर्जापुर के आलावा उनकी पार्टी से हरवंश सिंह प्रतापगढ़ से जीत हासिल करने में कामयाब रहे थे।
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अपना दल (एस) के प्रवक्ता अरविंद शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि भाजपा की केन्द्रीय इकाई से उन्हें कोई परेशानी नहीं है। लेकिन बीजेपी की यूपी इकाई उनकी पार्टी को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्हें लगातार उपेक्षित किया जा रहा है और वे अपने मतदाताओं-कार्यकर्ताओं के काम नहीं करवा पा रहे हैं। थाने से लेकर ब्लॉक-जिला में भी उनकी नहीं चल रही है जबकि पहली बार सत्ता में आने के कारण उनके कार्यकर्ताओं की उम्मीदें उनसे बढ़ी हुई हैं। अरविंद शर्मा के मुताबिक़ यही कारण है कि उन्हें इस तरह अपनी बात रखनी पड़ी है।
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दरअसल, उत्तर प्रदेश की विधानसभा में अपना दल के नौ विधायक और एक एमएलसी है। योगी मंत्रिमंडल में अपना दल के फतेहपुर जहानाबाद से विधायक जय कुमार सिंह जैकी को योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल में कारागार राज्य मंत्री बनाया गया है। इस विभाग के कैबिनेट मंत्री खुद योगी आदित्यनाथ हैं। स्पष्ट है कि योगी के आदेश के बिना यहां भी अपना दल के नेता कोई काम करवाने में समर्थ नहीं हैं। अपना दल के लोगों की शिकायत है कि मंत्रिमंडल में अपना दल की भूमिका बढ़ाए जाने की बात हुई थी। इसके लिए योगी मंत्रिमंडल का विस्तार करने की बात कही गई थी लेकिन अभी तक वह भी नहीं हो सका है।
अपना दल की सबसे बड़ी शिकायत है कि उनके केन्द्रीय नेताओं की भी उपेक्षा हो रही है। सिद्धार्थ नगर में मेडिकल कॉलेज के उद्घाटन मौके पर अनुप्रिया पटेल को भी नहीं बुलाया गया जबकि इस क्षेत्र में उनके मतदाताओं की बड़ी संख्या है। हाल ही में राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश की अदालतों में सरकारी वकीलों की नियुक्ति की है। आरोप है कि अपना दल के महज दो वकीलों को ही इस लिस्ट में जगह मिल पाई है। जाहिर है कि पार्टी अपनी बड़ी भूमिका के लिए भाजपा पर दबाव बनाना चाहती है।
इस सवाल पर कि क्या अपना दल (एस) लोकसभा चुनाव में ज्यादा सीटों पर अपनी दावेदारी पेश करेगा, पार्टी प्रवक्ता अरविंद शर्मा ने कहा कि उनकी पार्टी को उसके कद के हिसाब से हिस्सेदारी मिलनी चाहिये। भारतीय जनता पार्टी को ध्यान में रखना चाहिए कि हर लोकसभा सीट पर अपना दल के पचास हजार से एक लाख वोटर हैं। हमने पिछले लोकसभा चुनाव में एनडीए को यूपी की 80 में से 73 सीटें जीतने में बड़ी भूमिका निभाई थी। पार्टी को इसका इनाम मिलना चाहिए।