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यूपी चुनाव: मुंबई के उत्तर भारतीय नेताओं ने पूर्वांचल में डाला डेरा, नेता चले गांव की ओर

Fri, 25 Feb 2022 06:04 AM IST
Jeet Kumar सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई।
सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई। Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 25 Feb 2022 06:04 AM IST
सार

भाजपा के प्रवक्ता प्रेम शुक्ल पिछले एक माह से गोरखपुर मंडल के अलग-अलग जिलों में प्रचार कर रहे हैं। कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह भी पूर्वांचल में ही हैं।

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north Indian leaders from Mumbai has also entered the election fray in Uttar Pradesh
भाजपा की जनसभा में उमड़ी भीड़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुंबई के उत्तर भारतीय नेताओं की फौज भी उत्तर प्रदेश के चुनाव मैदान में उतर चुकी है। प्रदेश के आखिरी तीन चरण के चुनाव में मचे घमासान के बीच मायानगरी के नेता गांव का रूख कर चुके हैं। पूर्वांचल में शहरों की गलियों से लेकर गांव की पगड़ंडियों की खाक छान रहे है। इसमें सबसे आगे भाजपा है। जबकि कांग्रेस, सपा और शिवसेना के नेता भी जोर लगा रहे है।

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कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में सत्ता का रास्ता पूर्वांचल से होकर निकलता है। इसलिए यहां मोदी-योगी की विशेष नजर है। वहीं, यह भी माना जाता है कि पूर्वांचल की प्रगति देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की बदौलत है। यही वजह है कि यहां के लोगों का मुंबई से बेहद खास नाता है। इसलिए पूर्वांचल में लहलहाती सियासी फसल को काटने के लिए मुंबई के नेता यूपी की ओर चल पड़े है।
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महाराष्ट्र भाजपा उत्तर भारतीय मोर्चा के अध्यक्ष संजय पांडेय के नेतृत्व में 130 कार्यकर्ताओं की टीम बीते एक महीने से कानपुर, उन्नाव, पीलीभीत, शाहजहांपुर रायबरेली की 54 विधानसभाओं में चुनाव प्रचार करने के बाद अमेठीऔर सुल्यतानपुर के रास्ते यह टीम अब पूर्वांचल के रण में दाखिल हो चुकी है। इसके अलावा मुंबई भाजपा की अलग-अलग टीम आरएसएस की अपनी प्रांत रचना के अनुसार अब गोरखपुर और काशी में डंट गई है।
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महाराष्ट्र भाजपा उपाध्यक्ष जय प्रकाश सिंह ठाकुर वारणसी और भदोही में हैं तो मुंबई के भाजपा नेता आरयू सिंह बलिया, बहराइच, देवरिया और आजमगढ में सहयोगी दलों के साथ समन्वय की भूमिका निभा रहे हैं। जबकि भाजपा नेता मनोभव त्रिपाठी अकबरपुर जिले की खाक छान रहे हैं।

कांग्रेस, सपा और शिवसेना की टीम भी यूपी में सक्रिय
विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी की मदद के लिए मुंबई कांग्रेस के युवा नेता सूरज सिंह ठाकुर सहित पार्टी के उत्तर भारतीय नेता भी यूपी में दाखिल हुए हैं। महाराष्ट्र की प्राथमिक शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड़ भी लखनऊ के पार्टी दफ्तर से कांग्रेस की रणनीति तैयार कर रही हैं।

वहीं, आजमगढ़ के मूल निवासी महाराष्ट्र सपा अध्यक्ष व विधायक अबू आसिम आजमी भी अखिलेश यादव के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। दरअसल, आजमी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विवादित बयान दिया था इसलिए उन्हें चुनाव प्रचार से दूर रखा गया था। लेकिन अब पूर्वांचल में उनकी जरूरत महसूस की जा रही है। वहीं, शिवसेना प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी और आनंद दुबे सहित शिवसेना की युवा ब्रिगेड भी यूपी के दंगल में दांव मारने पहुंची है। 

शहर से ज्यादा जागरूक है गांव की जनता
गोरखपुर, सुल्तानपुर, कुशीनगर और जौनपुर का दौरा कर लौटे मुंबई उत्तर भारतीय मोर्चा के प्रभारी व मुंबई भाजपा उपाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी ने बताया कि पूर्वांचल में शहरो की तूलना में ग्रामीण क्षेत्र की जनता चुनाव को लेकर बेहद जागरूक हैं। मोदी-योगी के विकास कार्यों के अलावा कानून-व्यवस्था पर लोगों को विश्वास है। इसलिए ग्रामीण क्षेत्र में भाजपा की लहर है। वहीं, कानपुर से लौटे भाजपा नेता अर्जुन गुप्ता और ओम प्रकाश चौहान का दावा हैं कि इस बार भी कार्यकर्ताओं को कठिन परिश्रम करना पड़ रहा है लेकिन योगी की दुबारा वापसी तय है।

भाजपा को भारी पड़ रही है बूथ और पन्ना प्रमुख की नाराजगी
साल 2017 से लेकर 2019 तक के चुनाव में भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले गृहमंत्री अमित शाह ने बूथ और पन्ना प्रमुख के बूते चुनाव की बाजी पलट दी थी। यूपी का वह बूथ प्रमुख और पन्ना प्रमुख इस बार खफा है। मुंबई से यूपी में चुनाव प्रचार करने गए एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि 60 से लेकर 80 फीसदी बूथ और पन्ना प्रमुख चुनाव में उतना रूचि नहीं ले रहे हैं। जो भाजपा को भारी पड़ सकती है। वह बताते हैं कि कार्यकर्ताओं को अनदेखी की गई। इसलिए उनमें नाराजगी है। जबकि सपा के कार्यकर्ताओं में गजब का जोश है।

नि:स्वार्थ सेवा के कारण गोवंश चुनावी मुद्दा
उत्तर प्रदेश में अन्ना पशुओं को लेकर भी लोगों में भारी नाराजगी है। पालघर से सटे वापी से उत्तर प्रदेश गए बालाजी चैरिटेबल ट्रस्ट के महासचिव कृष्ण कुमार मिश्र ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा गोवंश की सेवा और सुरक्षा के लिए कई प्रभावी कदम उठाए गए हैं। फिरभी यूपी के चुनाव में गोवंश द्वारा खेती के नुकसान को विपक्ष ने प्रमुख मुद्दा बनाया है।


बालाजी चैरिटेबल ट्रस्ट की गुजरात के वलसाड़, वापी और दमन में गोशालाएं हैं जहां 700 असहाय गोवंशों की सेवा की जा रही है। मिश्र कहते हैं कि गुजरात में गो सेवा मॉडल को विस्तार दिया जा रहा है। ताकि गोवंश भी खुले में न घूमें और उन्हें गो तस्करों से भी बताया जा सके। उत्तर प्रदेश में भी इस तरह की योजनाएं शुरू करने की जरूरत है।

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