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बुंदेलखंड: पानी नहीं, तो दुल्हन नहीं
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 12 Apr 2016 06:39 PM IST
सार
- सूखे के चलते लड़की नहीं मिल रही
- पानी की किल्लत के कारण मतदान का बायकॉट किया था
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विस्तार
एक ओर जहां शादी का सीजन आ रहा है, मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में एक पिता कांशीराम यादव मायूस बैठे हैं। छत्तरपुर जिले के तेरियामार गांव में रहने वाले
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कांशीराम के बेटे रघुवर के लिए सूखे के चलते लड़की नहीं मिल रही है।
सूखे के कारण उसके गांव की महिलाओं को दो-तीन किलोमीटर तक पानी भरने जाना पड़ता है इस वजह से उसके जाति के लोग अपनी लड़की की शादी रघुवर के गांव के लोगों से कराने को तैयार नहीं हैं। रघुवर कहता है कि उसकी मां पानी लेने दो-तीन किलोमीटर तक जाती हैं इस वजह से कोई भी अपनी लड़की की शादी इस ब्लाक के किसी भी गांववाले के साथ नहीं करना चाहता है।
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इस छोटे से 2500 लोगों के गांव में करीब 150 कुंवारे लड़के शादी करने के लिए पानी की समस्या खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। गौरतलब है कि ये क्षेत्र हीरे की खान के लिए मशहूर है और इस इलाके में ब्रिटिश कंपनी रिओ टिंटो ने खान खरीद रखी है। इसके अलावा उमा भारती के निर्वाचन क्षेत्र में भी रह चुका है। हालांकि अब वह वाटर रिर्सोसेज मिनिस्टर हैं बावजूद इसके इलाके के लोग सूखे को झेल रहे हैं और सरकार इस इलाके की अनदेखी कर रही है।
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यहीं नहीं इस गांव के लोगों ने पिछले चुनाव में पानी की किल्लत के कारण मतदान का बायकॉट किया था और क्षेत्र के डीएम और एमएलए के आश्वासन के बाद ही पांच बजे के बाद मतदान किया था। अब वह कहते हैं कि सरकार ने धोखा दिया है। वहीं मामले पर बक्सवा की तहसीलदार विनीता जैन कहती हैं कि सरकार ने इसके लिए जूडी प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। सर्वे का कार्य जारी है ताकि जमीन मिल सके।