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उपराष्ट्रपति चुनाव: 'लोकतंत्र को खतरा नहीं, स्याह बादल छंटेंगे', खास बातचीत में बोले इंडिया ब्लॉक के प्रत्याशी
Thu, 04 Sep 2025 05:42 AM IST
बशु जैन
पूनम मेहता, अमर उजाला, नई दिल्ली
पूनम मेहता, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Thu, 04 Sep 2025 05:42 AM IST
सार
इंडिया गठबंधन के उपराष्ट्रपति पद के प्रत्याशी बी सुदर्शन रेड्डी का मानना है कि यह उम्मीदवारी उनकी संविधान यात्रा का ही विस्तार है और यह यात्रा चुनाव नतीजों के बाद भी जारी रहेगी, भले ही उनकी जीत हो या हार।
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बी सुदर्शन रेड्डी
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी सुदर्शन रेड्डी को कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन ने उपराष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है। रेड्डी का मानना है कि यह उम्मीदवारी उनकी संविधान यात्रा का ही विस्तार है और यह यात्रा चुनाव नतीजों के बाद भी जारी रहेगी, भले ही उनकी जीत हो या हार। उन्होंने कहा, भारत के लोकतंत्र को कोई खतरा नहीं, स्याह बादल हैं, पर छंट जाएंगे।
संयुक्त विपक्ष की ओर से अपनी उम्मीदवारी को कैसे लेते हैं?
मैं भारत के संविधान को मानने वाला हूं और 51-52 साल से संविधान से जुड़ा हूं। उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव में इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में खड़ा होना उसी सांविधानिक परंपरा का हिस्सा है। इसमें सियासी दखल नहीं होना चाहिए।
संसद में व्यवधान परेशान करने वाला है?
मेरे हिसाब से उपराष्ट्रपति, जो राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं, सांविधानिक पीठ पर बैठते हैं। इसलिए इस पद को किसी भी राजनीति से परे होना चाहिए। जब चर्चा हो तो प्रतिपक्ष को सबसे अधिक मौका दिया जाना चाहिए। क्योंकि सत्ता पक्ष जो करना चाहता है, उस बारे में उसकी बात जनता और सदस्यों से हो जाती है। इसके आधार पर जो विधेयक लाए जाते हैं उनमें सरकार अपनी बात कह चुकी होती है। इसके बाद तो मैदान प्रतिपक्ष का होना चाहिए ताकि वह अपनी बात रख सके। भले ही विपक्ष में कोई भी पार्टी हो। यही परंपरा रही है। इसमें अब रुकावट देखने को मिल रही है। इसे सही मार्ग पर लाना जरूरी है।
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उपराष्ट्रपति के इस्तीफे पर क्या कहेंगे?
मैं स्थितियों से पूरी तरह परिचित नहीं हूं, इसलिए मौजूदा स्थिति पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। हालांकि इतना जरूर है कि उपराष्ट्रपति उच्च सदन का सभापति होता है, जिसकी परंपरा सर्वपल्ली राधाकृष्णनन, वीवी गिरी, आर वेंकटरमण, आरके नारायणन से लेकर हामिद अंसारी तक की रही है। उसी परंपरा को आगे लेकर जाना है।
आपके पास समर्थन की कमी है, क्या असर दिखेगा?
मैं नंबर गेम में विश्वास नहीं रखता। यह उच्च सदन की सांविधानिक पीठ के लिए चुनाव है। राज्यसभा और लोकसभा के सांसद किसी भी दल के हो सकते हैं, किंतु हमारे शानदार संविधान ने इसके लिए नियम तय किए हैं कि इस पद के लिए होने वाले चुनाव में मतदान गुप्त होगा और व्हिप जारी नहीं होगा। इसका क्या अर्थ है? इसका अर्थ है, हमारे संविधान ने व्यवस्था की है कि यह चुनाव दलों की राजनीति से परे है। मैंने सभी सदस्यों को चिट्ठी लिखी है। उनसे आग्रह किया है कि साथ दें।
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संयुक्त विपक्ष की ओर से अपनी उम्मीदवारी को कैसे लेते हैं?
मैं भारत के संविधान को मानने वाला हूं और 51-52 साल से संविधान से जुड़ा हूं। उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव में इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में खड़ा होना उसी सांविधानिक परंपरा का हिस्सा है। इसमें सियासी दखल नहीं होना चाहिए।
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संसद में व्यवधान परेशान करने वाला है?
मेरे हिसाब से उपराष्ट्रपति, जो राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं, सांविधानिक पीठ पर बैठते हैं। इसलिए इस पद को किसी भी राजनीति से परे होना चाहिए। जब चर्चा हो तो प्रतिपक्ष को सबसे अधिक मौका दिया जाना चाहिए। क्योंकि सत्ता पक्ष जो करना चाहता है, उस बारे में उसकी बात जनता और सदस्यों से हो जाती है। इसके आधार पर जो विधेयक लाए जाते हैं उनमें सरकार अपनी बात कह चुकी होती है। इसके बाद तो मैदान प्रतिपक्ष का होना चाहिए ताकि वह अपनी बात रख सके। भले ही विपक्ष में कोई भी पार्टी हो। यही परंपरा रही है। इसमें अब रुकावट देखने को मिल रही है। इसे सही मार्ग पर लाना जरूरी है।
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उपराष्ट्रपति के इस्तीफे पर क्या कहेंगे?
मैं स्थितियों से पूरी तरह परिचित नहीं हूं, इसलिए मौजूदा स्थिति पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। हालांकि इतना जरूर है कि उपराष्ट्रपति उच्च सदन का सभापति होता है, जिसकी परंपरा सर्वपल्ली राधाकृष्णनन, वीवी गिरी, आर वेंकटरमण, आरके नारायणन से लेकर हामिद अंसारी तक की रही है। उसी परंपरा को आगे लेकर जाना है।
आपके पास समर्थन की कमी है, क्या असर दिखेगा?
मैं नंबर गेम में विश्वास नहीं रखता। यह उच्च सदन की सांविधानिक पीठ के लिए चुनाव है। राज्यसभा और लोकसभा के सांसद किसी भी दल के हो सकते हैं, किंतु हमारे शानदार संविधान ने इसके लिए नियम तय किए हैं कि इस पद के लिए होने वाले चुनाव में मतदान गुप्त होगा और व्हिप जारी नहीं होगा। इसका क्या अर्थ है? इसका अर्थ है, हमारे संविधान ने व्यवस्था की है कि यह चुनाव दलों की राजनीति से परे है। मैंने सभी सदस्यों को चिट्ठी लिखी है। उनसे आग्रह किया है कि साथ दें।
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