राजनाथ ने भी की मन की बात, कहा मंदिर-मस्जिद जाने से कोई आध्यात्मिक नहीं होता
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ब्रह्माकुमारीज के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय शांतिवन में अध्यात्म, विज्ञान और पर्यावरण विषय पर चल रहे वैश्विक शिखर सम्मेलन में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जीवन में बड़ा काम करने के लिए बड़ा मन होना जरूरी है। छोटे मन का व्यक्ति बड़ा काम नहीं कर सकता है।
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ब्रह्माकुमारीज के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय शांतिवन में अध्यात्म, विज्ञान और पर्यावरण विषय पर चल रहे वैश्विक शिखर सम्मेलन में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जीवन में बड़ा काम करने के लिए बड़ा मन होना जरूरी है। छोटे मन का व्यक्ति बड़ा काम नहीं कर सकता है।
गृहमंत्री ने कहा कि विज्ञान, अध्यात्म और धर्म ये एक-दूसरे के विपरीत हैं, ये अवधारणा विदेशों की है। भारत की अवधारणा है, विज्ञान और अध्यात्म दोनों एक-दूसरे के पूरक और एक हैं। चरक, सुषुप्त, आर्यभट्ट आदि जितने भी बड़े ऋषि थे, उतने ही बड़े वैज्ञानिक भी थे।
माउंट आबू से मिल रहा है मनुर्भव का संदेश
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि विश्वव्यापी संगठन ब्रह्माकुमारीज द्वारा की जा रही हैं सेवाएं मानव को सही दिशा में ले जा रही हैं। संसार को जिस शांति की जरूरत है, उस वातावरण का निर्माण यहां हो रहा है।
मन की पवित्रता पर जोर देते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि पवित्रता आत्मा की मूल संपदा है और इस संस्था से मन, बुद्धि और कर्मों को शांति के पथ पर ले जाने के लिए आध्यात्मिकता की अमूल्य शिक्षा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कम बोलो, धीरे बोलो, मीठा बोलो ये शब्द यहां मंत्र की तरह कार्य करते हैं।
ट्रंप की पूर्व पत्नी मारला भी हुईं राजयोग मेडिटेशन की कायल
मैंने कुंडलिनी योग, ब्रह्माकुमारीज के राजयोग मेडिटेशन और शाकाहारी भोजन को अपनी दिनचर्या में शामिल किया है। मैंने कई तरह का भोजन किया है, लेकिन शाकाहार सबसे उत्तम है। मांसाहार से पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। मारला ने कहा कि हम सब मिलकर ही इस दुनिया को आगे ले जा सकते हैं।
प्रकृति से उतना ही लें जितनी जरूरत हो
अहमदाबाद के सेंटर फॉर एन्वॉयरमेंट एजुकेशन के फाउंडर-डायरेक्टर व साइंटिस्ट पद्मश्री डॉ. कार्तिकेय साराभाई ने कहा कि हमें पर्यावरण की रक्षा करने के लिए अपनी पुरानी परंपरा और नई तकनीक को साथ लेकर चलना होगा। मनुष्य समझता है कि पूरी प्रकृति केवल उसके इस्तेमाल के लिए है, ये सोच ठीक नहीं है।
महात्मा गांधी ने कहा था हमें ट्रस्टी होकर वस्तुओं का इस्तेमाल करना होगा। ब्रह्मा बाबा ने वर्षों पहले अपनी दिव्य दृष्टि से एटॉमिक, प्राकृतिक जैसे तीन तरह के विनाश देख लिए थे, वहीं आज हम सामने देख रहे हैं। पर्यावरण को बचाने के लिए हमें प्रकृति से उतना ही लेना होगा, जितनी जरूरत है। सम्मेलन में भारत सहित विश्व के 140 देशों से आए विशिष्ट अतिथि भाग ले रहे हैं।