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पूर्वांचल में आसान नहीं बसपा की राह : स्वामी प्रसाद मौर्य
ब्यूरो/ अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 09 Aug 2016 04:51 AM IST
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स्वामी प्रसाद मौर्या
- फोटो : amar ujala
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यूपी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने स्वामी प्रसाद मौर्य को पार्टी में शामिल कर बसपा को करारा झटका देने के साथ ही प्रदेश खासकर पूर्वांचल के सियासी समीकरणों में बदलाव की जमीन तैयार कर दी है।
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सोमवार को समर्थकों के साथ पूर्व मंत्री और बसपा मुखिया के करीबियों में रहे स्वामी प्रसाद के लखनऊ में भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही पूर्वांचल की सियासत में नई हलचल मच गई। सियासत के जानकारों का मानना है कि भाजपा के इस कदम से पूर्वांचल में बसपा की राह और मुश्किल हो गई है।
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पूर्वांचल की सियासत में स्वामी का भाजपा के साथ जाना बेहद अहम माना जा रहा है। मौर्य बिरादरी में खास दखल होने के साथ ही स्वामी की पैठ बसपा के कैडर में भी रही। कुछ महीनों पहले तक बसपा के अहम सिपाहसलारों में रहे शिवपुर से विधायक उदय लाल मौर्य और उनके भाई अनिल मौर्य के भी स्वामी से नजदीकी रिश्ते हैं।
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ऐसे में अब मौर्य बंधुओं के भी भाजपा में जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। स्वामी के करीबियों का दावा है कि पूर्वांचल के अभी छह बसपा विधायक स्वामी प्रसाद मौर्य के संपर्क में हैं। बताया जा रहा है कि चुनाव से पहले ये सभी विधायक भी पाला बदल सकते हैं।
भाजपा की रणनीति भी धीरे-धीरे अपने पत्ते खोलने की है। हालांकि बसपा कैडर से जुड़े सूत्रों का दावा है कि सूबे की सियासी गतिविधियों पर पार्टी नेतृत्व की नजर है और पार्टी में समर्पित कार्यकर्ताओं की कोई कमी नहीं है।
बसपा के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य को पार्टी में शामिल कर भाजपा ने पिछड़े वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी की राह बनाई है। सियासी जानकारों का मानना है कि स्वामी प्रसाद की मौर्य बिरादरी में मजबूत पकड़ को देखते हुए ही भाजपा ने उन पर दांव लगाया है।
पिछले दो चुनावों से भाजपा मौर्य बिरादरी में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए संघर्षरत है। यही कारण है कि पार्टी ने केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व सौंपा और अब स्वामी प्रसाद को साथ लाकर सूबे की सियासत में एक नया दांव चला है।
सियासी हलके में चर्चा तो यहां तक होने लगी है कि भाजपा स्वामी प्रसाद मौर्य को सीएम कैंडिडेट भी बना सकती है। हालांकि इस दौड़ में वरुण गांधी और महंत आदित्यनाथ का नाम पहले से है।