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नई शिक्षा नीति के तहत समिति ने दिए सुझाव, छठी क्लास से बच्चों के लिए होनी चाहिए परीक्षा

Sun, 29 May 2016 10:25 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला,नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला,नई दिल्ली Updated Sun, 29 May 2016 10:25 AM IST
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No detention policy should remain till Class IV: Subramanian
- फोटो : PTI

 नई शिक्षा नीति तय करने के लिए गठित सुब्रह्मण्यम समिति ने आठवीं क्लास तक बच्चों को फेल नहीं करने की नीति की समीक्षा करने का सुझाव दिया है। समिति ने अब पांचवीं क्लास तक बच्चों को फेल नहीं करने और छठी क्लास से परीक्षा लेने की बात कही है। समिति ने उच्चतर शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए विदेशी संस्थानों के भारत आने की अनुमति देने की भी सिफारिश की है। वर्तमान में शिक्षा का अधिकार कानून के तहत आठवीं क्लास तक छात्रों को फेल नहीं करने का प्रावधान है

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सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार को 200 पन्नों की सौंपी अपनी रिपोर्ट में समिति ने प्राथमिक से लेकर उच्चतर शिक्षा का स्तर बढ़ाने की सिफारिश की है। इन सुझावों में एक प्रमुख सुझाव छात्रों के लिए ‘आवश्यकतानुसार कोचिंग’ और ‘सही मार्गदर्शन’ भी शामिल है जिससे बच्चों की सीखने की प्रक्रिया प्रभावित न होना सुनिश्चित हो सके। बच्चों को फेल नहीं करने की नीति पर समिति का कहना है कि यदि बच्चा पहले प्रयास में पास नहीं होता है तो उसे परीक्षा में शामिल होने के लिए दो अतिरिक्त मौके दिए जाने चाहिए।
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एक अन्य महत्वपूर्ण सुझाव में शिक्षा प्रबंधन स्तर में सुधार के लिए एजूकेशन कैडर सर्विस गठित करने की बात कही गई है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में प्रवेश परीक्षाओं के लिए कोचिंग क्लास के प्रभाव पर भी ध्यान दिया है। रिपोर्ट में कौशल विकास और वोकेशनल एजूकेशन व ट्रेनिंग पर जोर दिया गया है। 

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