'राष्ट्रपति की कुर्सी पर न बैठे कोई संघी', अभी से शुरू हुई मोर्चेबंदी
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कभी एनडीए गठबंधन का हिस्सा रहे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब एनडीए को ही पटखनी देने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहते। इसी साल जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए नीतीश कुमार ने अभी से कमर कसना शुरू कर दिया है।
राष्ट्रपति चुनाव नजदीक हैं ऐसे में नीतीश कुमार ने विपक्ष को साधने का जिम्मा उठा रखा है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक हाल ही में नीतीश कुमार राजधानी दिल्ली में थे जहां उन्होंने प्रमुख विपक्षी दल NCP, CPM, CPI और INLD के नेताओं के साथ अपनी चिंता का विषय साझा किया।
खबर के मुताबिक नीतीश कुमार राष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्ष की एकजुटता चाहते हैं। नीतीश चाहते हैं कि राष्ट्रपति की कुर्सी पर कोई भी 'संघ प्रष्ठभूमि' का व्यक्ति न बैठ पाए इसके लिए पूरे विपक्ष को एकजुट होना चाहिए।
विपक्षी पार्टियों के संपर्क में नीतीश
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक नीतीश कुमार चाहते हैं कि पूरा विपक्ष मिलकर राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार मैदान में उतारे। गौरतलब है कि 2012 के राष्ट्रपति चुनाव के समय नीतीश कुमार एनडीए का हिस्सा थे इसके बावजूद भी उन्होंने यूपीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी का समर्थन किया था।
खबर के मुताबिक हाल ही में नीतीश कुमार ने एक के बाद एक विपक्षी पार्टियों के नेताओं से मुलाकात की। अगर सूत्रों की मानें तो नीतीश की इन मुलाकातों का मकसद 'राष्ट्रपति पद' के लिए एक उम्मीदवार तय करना है।
खबर के मुताबिक नीतीश कुमार कांग्रेस के संपर्क में भी हैं और जल्द ही इस संबंध में कांग्रेस के बड़े नेताओं से मुतलाकात कर सकते हैं।
2012 में नीतीश ने दिया था यूपीए को समर्थन
जेडीयू से जुड़े सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, "राष्ट्रपति चुनाव हमारे लिए अहम मुद्दा है। यह एक संवैधानिक पद है और हम चाहते हैं कि इस पद पर कोई ऐसा व्यक्ति न बैठे जो आरएसएस की पृष्ठभूमि से हो या पक्षपात करे।
हमने पिछले चुनाव में प्रणब मुखर्जी को सपोर्ट किया था क्योंकि हम चाहते थे कि इस पद पर कोई ऐसा व्यक्ति बैठे जो संवैधानिक प्रक्रियाओं को समझता हो।" गौरतलब है कि 2012 के राष्ट्रपति के चुनाव में यूपीए समर्थित प्रनब मुखर्जी ने एनडीए समर्थित पीए संगमा को 40 फीसदी वोटों के अतंराल से हराया था।
जेडीयू ने एनडीए के साथ गठबंधन में होते हुए भी यूपीए समर्थित प्रनब मुखर्जी को सपोर्ट किया था।