वाराणसी सहित कई शहरों में चलेंगी ट्रॉली बसें, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बनाई योजना
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदूषण एवं मोटर वाहनों की बढ़ती कीमत का काट ढूंढने के लिए सरकार ने वाराणसी सहित देश के कुछ महत्वपूर्ण शहरों में ट्रॉली बस चलाने की योजना तैयार की है। इसमें सड़कों पर चलने वाली बसों जैसी ही इलेक्ट्रिक बसें होंगी, जिनमें रबर के टायर लगे होंगे लेकिन उसमें डीजल या सीएनजी से चलने वाले इंजन के बदले बिजली से चलने वाला मोटर लगा होगा। इन बसों में बिजली की आपूर्ति के लिए बैट्री नहीं लगी होगी, बल्कि सड़क के ऊपर लगे बिजली के तारों से आपूर्ति होगी। यदि सब कुछ ठीक रहा, तो इसी वर्ष के अंत तक इसका परिचालन शुरू हो जाएगा। इन बसों में किराया भी काफी घट जाएगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में यह जानकारी दी। उनके मुताबिक, बड़े शहरों में बढ़ते प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए आम जनता के लिए तेज गति के परिवहन के साधन तैयार करने के लिए मेट्रो रेल मुफीद साधन नहीं है। ऐसा इसलिए, क्योंकि मेट्रो रेल के निर्माण में प्रति किलोमीटर 350 करोड़ रुपये का खर्च पड़ता है। इसके बदले अब उनके मंत्रालय ने कई शहरों में ट्रॉली बस चलाने की योजना तैयार की है। इसमें सड़कों पर उसी तरह से बिजली का ओवरहेड ट्रेक्शन वायर लगाया जाएगा, जैसे रेलवे अपनी पटरी पर ओवरहेड वायर बिछाता है।
उत्तर प्रदेश के कई शहरों में प्रस्तावित
गडकरी ने बताया कि वाराणसी, इलाहाबाद, लखनऊ, कानपुर, आगरा सहित कई शहरों में ट्रॉली बस का परिचालन प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण के बीच सभी शहरों को सार्वजनिक परिवहन का तेज और सुरक्षित साधन चाहिए। इसके लिए ही हमने ट्रॉली बस का चयन किया है। यह भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, शोलापुर, कोल्हापुर, नासिक आदि शहरों के लिए बिल्कुल उपयुक्त है।
किराया होगा 40 फीसदी तक कम
मंत्री ने बताया कि इस समय मुंबई में डीजल से बस चलाने में प्रति किलोमीटर 110 रुपये की लागत आ रही है, जबकि नागपुर में एथेनॉल से बस चलाने में 78 रुपये प्रति लीटर की लागत आती है। यदि बिजली से बस चलाई जाए, तो उसकी प्रति किलोमीटर लागत 55 रुपये प्रति किलोमीटर आती है। इसके चलने से बस का किराया 30 से 40 फीसदी तक घट जाएगा। यही नहीं, ट्रॉली बस में यह भी विकल्प है कि एक के पीछे एक लगाकर दो बस भी एक साथ चलाई जा सकती है। इन दो बसों में एक में जनरल क्लास बना लें, तो दूसरी बस में फर्स्ट क्लास। जनरल क्लास का किराया कम रखा जा सकता है, तो फर्स्ट क्लास का किराया ज्यादा।