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Karnataka: भारत के दूसरे सबसे लंबे केबल-आधारित सिगंदूर पुल का उद्घाटन; सिद्धारमैया के दावों पर गडकरी की दो-टूक
Mon, 14 Jul 2025 02:45 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: नितिन गौतम
Updated Mon, 14 Jul 2025 02:45 PM IST
सार
हाल ही में सिद्धारमैया ने केंद्रीय मंत्री गडकरी से अपील की थी कि वे सिंगदूर पुल के उद्घाटन का कार्यक्रम टाल दें क्योंकि 14 जुलाई को वे विजयपुरा जिले के दौरे पर रहेंगे, जहां उन्हें कई अन्य विकास कार्यों का उद्घाटन करना है।
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कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया और नितिन गडकरी
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन ने सोमवार को कर्नाटक के शिवमोगा जिले में भारत के दूसरे सबसे लंबे केबल पुल सिंगदूर का उद्घाटन किया। इस उद्घाटन कार्यक्रम में भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री शामिल हुए, लेकिन राज्य सरकार की तरफ से कोई मंत्री इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुआ। दरअसल सीएम सिद्धारमैया ने दावा किया कि उन्हें इस उद्घाटन कार्यक्रम के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था। सिद्धारमैया के इस दावे पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पलटवार किया है और सोशल मीडिया पर साझा पोस्ट में लिखा कि सिद्धारमैया को उद्घाटन कार्यक्रम में आने के लिए आमंत्रित किया गया था।
472 करोड़ रुपये की आई लागत
सिंगदूर पुल अंबरागोदलू-कलसावल्ली के बीच सागरा तालुका में बना है। इस पुल को बनाने में 472 करोड़ रुपये की लागत आई है और इसके बनने से सागरा से सिगंदूर के आसपास के गांवों के बीच की दूरी घट जाएगी। सिगंदूर चौड़ेश्वरी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। इस उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अलावा केंद्रीय मंत्री प्रलहाद जोशी, वरिष्ठ भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा और अन्य नेता शामिल हुए। हालांकि सीएम सिद्धारमैया या उनकी कैबिनेट का कोई सदस्य इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुआ। सिद्धारमैया ने कहा है कि उन्होंने विरोध स्वरूप ऐसा किया।
सीएम ने कार्यक्रम टालने की अपील की थी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में सिद्धारमैया ने केंद्रीय मंत्री गडकरी से अपील की थी कि वे सिंगदूर पुल के उद्घाटन का कार्यक्रम टाल दें क्योंकि 14 जुलाई को वे विजयपुरा जिले के दौरे पर रहेंगे, जहां उन्हें कई अन्य विकास कार्यों का उद्घाटन करना है। सीएम ने ये भी दावा किया कि उन्हें पूर्व में कार्यक्रम के बारे में सूचना नहीं दी गई। सीएम ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री से इस संबंध में मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की थी।
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ये भी पढ़ें- पंजाब में बेअदबी बिल को मंजूरी: कैबिनेट की बैठक में लगी मुहर, आज विधानसभा के विशेष सत्र में होगा पेश
अब सीएम ने दावा किया है कि उन्हें कार्यक्रम में बुलाया ही नहीं गया
सोमवार को सीएम सिद्धारमैया ने दावा किया कि उन्हें सिंगदूर पुल के उद्घाटन कार्यक्रम में बुलाया ही नहीं गया। हालांकि सीएम के दावे पर नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में दावा किया कि सीएम को 11 जुलाई को ही कार्यक्रम के बारे में सूचना दे दी गई थी और उन्हें आमंत्रित किया गया था। गडकरी ने 12 जुलाई को सीएम को भेजे गए कथित पत्र की प्रति भी सोशल मीडिया पर साझा की। हालांकि सीएम नहीं बुलाए जाने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 'प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए। हमारे राज्य में कार्यक्रम हो रहा था, ऐसे में हमें बुलाया जाना चाहिए था। हम संघीय व्यवस्था का हिस्सा हैं।'
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472 करोड़ रुपये की आई लागत
सिंगदूर पुल अंबरागोदलू-कलसावल्ली के बीच सागरा तालुका में बना है। इस पुल को बनाने में 472 करोड़ रुपये की लागत आई है और इसके बनने से सागरा से सिगंदूर के आसपास के गांवों के बीच की दूरी घट जाएगी। सिगंदूर चौड़ेश्वरी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। इस उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अलावा केंद्रीय मंत्री प्रलहाद जोशी, वरिष्ठ भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा और अन्य नेता शामिल हुए। हालांकि सीएम सिद्धारमैया या उनकी कैबिनेट का कोई सदस्य इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुआ। सिद्धारमैया ने कहा है कि उन्होंने विरोध स्वरूप ऐसा किया।
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सीएम ने कार्यक्रम टालने की अपील की थी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में सिद्धारमैया ने केंद्रीय मंत्री गडकरी से अपील की थी कि वे सिंगदूर पुल के उद्घाटन का कार्यक्रम टाल दें क्योंकि 14 जुलाई को वे विजयपुरा जिले के दौरे पर रहेंगे, जहां उन्हें कई अन्य विकास कार्यों का उद्घाटन करना है। सीएम ने ये भी दावा किया कि उन्हें पूर्व में कार्यक्रम के बारे में सूचना नहीं दी गई। सीएम ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री से इस संबंध में मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की थी।
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अब सीएम ने दावा किया है कि उन्हें कार्यक्रम में बुलाया ही नहीं गया
सोमवार को सीएम सिद्धारमैया ने दावा किया कि उन्हें सिंगदूर पुल के उद्घाटन कार्यक्रम में बुलाया ही नहीं गया। हालांकि सीएम के दावे पर नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में दावा किया कि सीएम को 11 जुलाई को ही कार्यक्रम के बारे में सूचना दे दी गई थी और उन्हें आमंत्रित किया गया था। गडकरी ने 12 जुलाई को सीएम को भेजे गए कथित पत्र की प्रति भी सोशल मीडिया पर साझा की। हालांकि सीएम नहीं बुलाए जाने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 'प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए। हमारे राज्य में कार्यक्रम हो रहा था, ऐसे में हमें बुलाया जाना चाहिए था। हम संघीय व्यवस्था का हिस्सा हैं।'
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