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वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट डील: नीति आयोग और स्वदेशी जागरण मंच भिड़े, बोले- भारत को चकमा दिया जा रहा है

Sat, 12 May 2018 06:21 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 12 May 2018 06:21 AM IST
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वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट सौदे पर शुक्रवार को नीति आयोग और स्वदेशी जागरण मंच सार्वजनिक प्लेटफार्म ट्विटर पर एकदूसरे से भिड़ गए। मंच के पदाधिकारी की ओर से सोशल मीडिया पर किए गए हमले का जवाब खुद आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने दिया। उन्होंने इसमें कहा कि मंच ने हमेशा मल्टी ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का विरोध किया है। उसने ई-कॉमर्स में एफडीआई का विरोध नहीं किया है।

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मंच के सह-संयोजक अश्वनी महाजन ने इस पूरे प्रकरण पर कहा कि सरकार ई-कॉमर्स कंपनी के सौदे पर चुप है। प्रधानमंत्री और वाणिज्य मंत्री ने वालमार्ट के सीईओ से मुलाकात तक नहीं की। इस दौरान आयोग के उपाध्यक्ष कुमार इस सौदे का समर्थन कर रहे हैं। वह कहते हैं कि इस सौदे का भारत में विदेशी निवेश पर अच्छा असर पड़ेगा। इसी वजह से उनकी गतिविधि को लेकर सीधे ट्विटर पर सवाल उठाया। 
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याद रहे कि कुमार ने 16 अरब डॉलर के वालमार्ट-फ्लिपकार्ट सौदे पर कहा था कि यह सौदा भारत के एफडीआई मानदंडों के अनुरूप है। जबकि मंच का दावा है कि ई-कॉमर्स में एफडीआई को अनुमति ही नहीं है। इससे पहले मंच ने राष्ट्रीय हित की रक्षा के मद्देनजर प्रधानमंत्री से इस सौदे में हस्तक्षेप करने की मांग की थी।

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महाजन ने राजीव कुमार पर साधा निशाना

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ट्विटर पर महाजन ने राजीव कुमार को इंगित करते हुए कहा कि आप कैसे वॉलमार्ट को क्लीन चिट दे सकते हैं जबकि सरकार के पास मामला लंबित है और वह इस पर निर्णय लेगी। ट्विटर पर आगे आयोग के उपाध्यक्ष कुमार पर आरोप लगाते हुए महाजन ने कहा कि हम जानते हैं वालमार्ट के प्रति आपका प्रेम, लेकिन मौजूदा समय में आप नीति आयोग के उपाध्यक्ष के पद पर हैं। 

जवाब में कुमार ने कहा कि आप व्यापार में एफडीआई के मुद्दे पर सहमत हो सकते हैं या फिर असहमत, लेकिन आपने हमेशा मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई का विरोध किया है, ई-कॉमर्स में नहीं। इस प्रकरण पर महाजन ने बातचीत के दौरान कहा कि इस सौदे से छोटे-मझोले उद्यमों और छोटी दुकानों की मुश्किलें बढ़ेंगी। 

उन्होंने कहा कि आयोग के उपाध्यक्ष कुमार सरकार की नीति के प्रति सजग नहीं हैं और उन्हें देश के छोटे-मझोले व्यापारियों का कोई खयाल नहीं है। सौदे पर जब पूरी सरकार चुप है, तब भी उनका वालमार्ट से प्रेम साफ दिखाई दे रहा है।

पिछले दरवाजे से प्रवेश का आरोप
गौरतलब है कि वालमार्ट कारपोरेशन ने फ्लिपकार्ट में 77 फीसदी हिस्सेदारी के अधिग्रहण की घोषणा की है, जो ई-कॉमर्स जगत का सबसे बड़ा सौदा है। भारतीय बाजार में उसका मुकाबला एक अन्य प्रमुख कंपनी ऐमजॉन से होगा। मंच ने आरोप लगाया है कि वालमार्ट देश के बाजार में पिछले दरवाजे से प्रवेश करने के लिए यहां के नियमों को चकमा दे रही है।

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