मुंबई हमले के बाद कार्रवाई करने में राजनीतिक इच्छाशक्ति की थी कमी : रक्षा मंत्री
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केंद्रीय मंत्री ने एक कार्यक्रम में कहा, 'कोई भी सुरक्षा बलों का राजनीतिकरण नहीं करना चाहता लेकिन 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमले के बाद क्या जवाब दिया जाना गलत होता? तत्कालीन केंद्र सरकार ने अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सुरक्षा बलों को स्वतंत्रता नहीं दी। इसमें राजनीतिक इच्छाशक्ति की स्पष्ट कमी थी।' उन्होंने कहा, 'इसी का परिणाम है कि हमें सीमापार से धमकियां और हमले झेलने पड़े, जिन्हें पाकिस्तानी एजेंसियों का समर्थन था।'
बता दें कि मुंबई हमला, जिसे 26/11 हमले के नाम से भी जाना जाता है, 10 आतंकवादियों ने किया था। ये आतंकी पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के थे। इस भयावह हमले में कम से कम 174 लोगों की मृत्यु हो गई थी और लगभग तीन सौ लोग घायल हुए थे।
'आज पुलवामा जैसी घटना में जहां एक आत्मघाती हमलावर ने हमारे 40 सैनिकों की जान ले ली, देश की जनता को लगा कि क्या हम यही कर सकते हैं कि हम पर लगातार हमले हों और इन घटनाओं के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई न हो। ऐसी ही भावना 2008 में भी थी।'
उन्होंने कहा, 'तब कोई कार्रवाई नहीं हुई थी, लेकिन अब हम कार्रवाई कर रहे हैं। सही और मजबूत खुफिया जानकारी के आधार पर सरकार ने सुरक्षा बलों को यह स्वतंत्रता दी है कि वह सभी जरूरी कदम उठाएं जो उन्हें उचित लगें। यह सुरक्षा बलों की राजनीतिकरण नहीं है। हम यह बता रहे हैं कि मुंबई हमले के बाद क्या हुआ और पुलवामा हमले के बाद क्या कदम उठाए गए।'
प्रधानमंत्री मोदी ढूंढते हैं स्थाई समाधान
केंद्रीय मंत्री ने यह बताते हुए कि वर्तमान केंद्र सरकार यूपीए सरकार से किस तरह बेहतर है कहा कि तब महंगाई और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं व्याप्त थीं जिनसे कांग्रेस 2014 का चुनाव हारी थी।
सीतारमण ने कहा कि दालों के उत्पादन में भारत आत्मनिर्भर बन गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत हर मामले में आगे बढ़ा है। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी अस्थाई समाधान नहीं ढूंढते। वह ऐसे नेता हैं जो स्थाई समाधान ढूंढते हैं। चाहे वह भारत को खुले में शौच से मुक्त बनाना हो या 2022 तक हर भारतीय का अपना घर देना हो।'
उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी का दृष्टिकोण दीर्घकालिक है। 2047 में जब भारत स्वतंत्रता की सौवीं वर्षगांठ मना रहा होगा, प्रधानमंत्री के मुताबिक विकासशील देशों की सूची से निकलकर विकसित देशों में शामिल हो जाएगा।'
बिना किसी कांग्रेस नेता का नाम लेते हुए उन्होंने एक जाली वेबसाइट का उदाहरण दिया जिसने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर सवाल उठाए और नोटबंदी के समय दावा किया था कि भारतीय मुद्रा का एक बड़ा भाग कहीं और छापा जा रहा था और भारतीय वायु सेना द्वारा उसे हिंडन एयरपोर्ट लाया गया था।
उन्होंने कहा, 'क्या यह सुरक्षा बलों की अवमानना नहीं है? क्या यह सुरक्षा बलों की राजनीतिकरण नहीं है? वायु सेना पर लगे आरोपों की निंदा के लिए क्या कोई आवाज उठी? लेकिन, यह आवाजें तब उठनी शुरू हो गईं जब हमने उन्हें सभी आवश्यक कदम उठाने की छूट दे गी, और हमसे कहा गया कि सुरक्षा बलों का राजनीतिकरण न करें।'
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत बदलाव के पथ पर है। 2019 का आम चुनाव देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, 'सभी चुनाव अपने आप में जरूरी होते हैं, लेकिन 2019 का यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण और एतिहासिक है। यह ऐसे समय पर हो रहा है जब भारत में युवाओं की संख्या ज्यादा है।'