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GCC Summit: भारत बनेगा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स का रणनीतिक लीडर, जीसीसी में और क्या बोलीं मंत्री सीतारमण?
Fri, 10 Jul 2026 12:14 AM IST
अमन तिवारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 10 Jul 2026 12:14 AM IST
सार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स का रणनीतिक लीडर बनने की राह पर है। देश में अब हर दिन एक नया सेंटर खुल रहा है। सरकार का लक्ष्य लागत बचाने के बजाय इनोवेशन और नई तकनीकों को बढ़ावा देना है।
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निर्मला सीतारमण
- फोटो : PIB
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विस्तार
नई दिल्ली में आयोजित 'सीआईआई जीसीसी बिजनेस समिट 2026' में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि भारत बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के लिए एक रणनीतिक लीडर बनना चाहता है। भारत का लक्ष्य दुनिया की नॉलेज इकोनॉमी में अपनी जगह को बेहद जरूरी बनाना है। इससे देश की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी।
हर दिन खुल रहा है एक नया सेंटर
वित्त मंत्री ने बताया कि साल 2024 में भारत में हर हफ्ते एक नया जीसीसी खुलता था। अब यह रफ्तार बहुत बढ़ गई है। अब भारत में हर दिन औसतन एक नया जीसीसी खुल रहा है। इस वजह से दुनिया के आधे से ज्यादा जीसीसी अब भारत में ही हैं। भारत में इस समय 2,100 से ज्यादा जीसीसी काम कर रहे हैं। इनसे 23 लाख लोगों को सीधे रोजगार मिला है। ये सेंटर्स हर साल लगभग 100 अरब डॉलर की कमाई कर रहे हैं।
लागत बचाने से आगे बढ़कर इनोवेशन पर ध्यान
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत का जीसीसी सफर अब सिर्फ संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। अब ध्यान अगली पीढ़ी के उत्पाद और नई तकनीक बनाने पर है। पहले कंपनियां सिर्फ लागत कम करने के लिए भारत आती थीं। अब वे इनोवेशन बढ़ाने, नई खोज करने और अपनी रणनीतियों को मजबूत करने के लिए भारत आ रही हैं। फॉर्च्यून ग्लोबल 2000 कंपनियों में से लगभग दो-तिहाई कंपनियों ने अभी तक भारत में अपना जीसीसी नहीं खोला है। यह भारत के लिए निवेश का एक बहुत बड़ा मौका है। भारत चाहता है कि दुनिया के विचार, पेटेंट, उत्पाद, एल्गोरिदम और प्लेटफॉर्म भारत में ही तैयार हों।
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ये भी पढ़ें: NATO Summit: नाटो नेताओं को तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोआन ने दिया अनोखा उपहार, विदाई में दी दुर्लभ रिवॉल्वर
छोटे शहरों को तैयार करने की अपील
वित्त मंत्री ने उद्योग जगत से अपील की कि वे राज्य सरकारों, शिक्षण संस्थानों और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम करें। इससे देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों को जीसीसी निवेश के अगले दौर के लिए तैयार किया जा सकेगा। उन्होंने कंपनियों से एआई (AI) एप्लिकेशन विकसित करने, पेटेंट बनाने और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए कहा। उन्होंने यह भी कहा कि रिसर्च को प्रयोगशालाओं से निकालकर बाजारों तक पहुंचाया जाए।
सरकार की नीतियां और बजट में मदद
सरकार जीसीसी के विकास के लिए एक आसान नीतिगत माहौल बना रही है। इससे कंपनियों के लिए काम करना आसान होगा और लंबे समय के निवेश को बढ़ावा मिलेगा। केंद्रीय बजट 2026-27 में भी इसके लिए कई बड़े कदमों की घोषणा की गई है।
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हर दिन खुल रहा है एक नया सेंटर
वित्त मंत्री ने बताया कि साल 2024 में भारत में हर हफ्ते एक नया जीसीसी खुलता था। अब यह रफ्तार बहुत बढ़ गई है। अब भारत में हर दिन औसतन एक नया जीसीसी खुल रहा है। इस वजह से दुनिया के आधे से ज्यादा जीसीसी अब भारत में ही हैं। भारत में इस समय 2,100 से ज्यादा जीसीसी काम कर रहे हैं। इनसे 23 लाख लोगों को सीधे रोजगार मिला है। ये सेंटर्स हर साल लगभग 100 अरब डॉलर की कमाई कर रहे हैं।
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लागत बचाने से आगे बढ़कर इनोवेशन पर ध्यान
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत का जीसीसी सफर अब सिर्फ संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। अब ध्यान अगली पीढ़ी के उत्पाद और नई तकनीक बनाने पर है। पहले कंपनियां सिर्फ लागत कम करने के लिए भारत आती थीं। अब वे इनोवेशन बढ़ाने, नई खोज करने और अपनी रणनीतियों को मजबूत करने के लिए भारत आ रही हैं। फॉर्च्यून ग्लोबल 2000 कंपनियों में से लगभग दो-तिहाई कंपनियों ने अभी तक भारत में अपना जीसीसी नहीं खोला है। यह भारत के लिए निवेश का एक बहुत बड़ा मौका है। भारत चाहता है कि दुनिया के विचार, पेटेंट, उत्पाद, एल्गोरिदम और प्लेटफॉर्म भारत में ही तैयार हों।
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छोटे शहरों को तैयार करने की अपील
वित्त मंत्री ने उद्योग जगत से अपील की कि वे राज्य सरकारों, शिक्षण संस्थानों और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम करें। इससे देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों को जीसीसी निवेश के अगले दौर के लिए तैयार किया जा सकेगा। उन्होंने कंपनियों से एआई (AI) एप्लिकेशन विकसित करने, पेटेंट बनाने और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए कहा। उन्होंने यह भी कहा कि रिसर्च को प्रयोगशालाओं से निकालकर बाजारों तक पहुंचाया जाए।
सरकार की नीतियां और बजट में मदद
सरकार जीसीसी के विकास के लिए एक आसान नीतिगत माहौल बना रही है। इससे कंपनियों के लिए काम करना आसान होगा और लंबे समय के निवेश को बढ़ावा मिलेगा। केंद्रीय बजट 2026-27 में भी इसके लिए कई बड़े कदमों की घोषणा की गई है।