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गंगा को निर्मल बनाने को बांधों से मुक्ति जरूरी: संसदीय समिति

Fri, 13 May 2016 02:54 AM IST
शादाब रिजवी/ अमर उजाला, नई दिल्ली
शादाब रिजवी/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 13 May 2016 02:54 AM IST
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Nirmal Ganga to be rescued from the dams: Parliamentary Committee
टिहरी बांध - फोटो : PTI

गंगा को निर्मल और अविरल बनाने की कड़ी में  किए जा रहे प्रयासों में  सबसे बड़ी बाधा इस नदी पर बने या बनाए जा रहे बांध  हैं।  विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए इन बांधों से उसकी मुक्ति जरूरी है।  गंगा जीर्णोद्धार मामले पर बनी संसद की प्राकलन समिति ने भी बांधों  की बाधा को खत्म करने को जरूरी माना है। समिति का कहना है कि गंगा को निर्मल बनाने के लिए उसकी अविरलता जरूरी है। गंगा में पानी का बहाव निश्चित करने की सलाह दी गई है। 

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वरिष्ठ सांसद मुरली मनोहर जोशी की अगुवाई वाली तीस सदस्यीय संसदीय समिति की रिपोर्ट  में  बांधों को  समाप्त करने पर जोर दिया गया है।  रिपोर्ट में अनुसंधान समितियों के निष्कर्ष  के हवाले से कहा गया है कि नदियों पर जल विद्युत परियोजनाओं  के निर्माण  से निश्चित तौर पर स्थानीय परिस्थितियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। साफ किया है कि वन की हानि, जल गुणवत्ता, भूगर्भीय जल प्रभाव के रूप में  पर्यावरण को साफ तौर पर नुकसान दिखाई  दे रहा है।  सावधान किया है कि ऐसा होने से लगातार भूखस्लन और दूसरी अपदाओं का खतरा बढ़ जाने की आशंका है।
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रिपोर्ट में इस बात की उठाया गया है कि गंगा नदी पर मौजूद बंधे और विद्युत संयंत्रों (एचईपीसी), जल भंडारण और विद्युत उत्पादन परियोजना एक तरह से इसको घेरे हुए हैं।समिति ने विद्युत मंत्रालय के रिपोर्ट में आकंड़े के आधार पर बताया है कि गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों पर 2668 मेगावाट की कुल क्षमता वाली सात स्कीम फिलहाल प्रचलन में हैं। संसदीय समिति की रिपोर्ट में पर्यावरण और जल मंत्रालय की तरफ से जारी रिपोर्ट का हवाला देकर कहा गया है कि गंगा, भगीरथी और अलकनंदा बेसिन में जल विद्युत परियोजनाओं  से भी पर्यावरण पर दबाव बढ़ रहा है।   

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विद्युत मंत्रालय से समिति को दिया गया रिकार्ड 

Nirmal Ganga to be rescued from the dams: Parliamentary Committee
बांध - फोटो : PTI
समिति ने विद्युत मंत्रालय के रिपोर्ट में आकंड़े के आधार पर बताया है कि गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों पर 2668 मेगावाट की कुल क्षमता वाली सात स्कीम फिलहाल प्रचलन में हैं। संसदीय समिति की रिपोर्ट में पर्यावरण और जल मंत्रालय की तरफ से जारी रिपोर्ट का हवाला देकर कहा गया है कि गंगा, भगीरथी और अलकनंदा बेसिन में जल विद्युत परियोजनाओं  से भी पर्यावरण पर दबाव बढ़ रहा है।   

गंगा नदी (भगीरथी, अलकनंदा और उसकी सहायक नदियों) पर  4798 मेगावाट  कुल क्षमता वाली 14 जल विद्युत स्कीमें निर्माणाधीन हैं या  निर्माण के लिए शुरू की जाने वाली है।  इनमें  से  2310 मेगावाट  की कुल संस्थापित क्षमता की छह जल विद्युत स्कीमें  निर्माणाधीन हैं। 2077 मेगावाट की छह स्कीमें स्वीकृत की जा चुकी  है, इनका निर्माण जल्द शुरू होना है। 408 मेगावाट की दो स्कीमों  केडीपीआर केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण /केंद्रीय जल आयोग / केंद्रीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण  में  जांच के दौर में  हैं। 25 मेगावट वाली  21 लघु जल विद्युत परियोजनाएं का या तो निर्माण चल रहा या फिर प्रस्तावित हैं। 

गंगा नदी पर बांध और जल विद्युत परियोजाएं
नाम परियोजना        नाम नदी      क्षमता मेगावाट 
टिहरी -1               भगीरथी       1000
कोटेश्वर            भरीगथी           400
चिल्ला              गंगा               144
मनेरी भाली-1      भगीरथी           90 
मनेरी भाली-2       भगीरथी          304 
विष्णु प्रयाग          अलकनंदा        400
श्रीनगर               अलकनंदा         330
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