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कोरोनावायरस और मानसिक स्वास्थ्य: निम्हांस के डॉक्टर बोले- सकारात्मक सोचो तो सब बेहतर होगा, रिकवरी भी होगी तेज

Tue, 18 May 2021 12:46 PM IST
Harendra Chaudhary राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली
राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 18 May 2021 12:46 PM IST
सार

निम्हांस के डॉक्टर दिनाकरन ने बताया कोविड में कैसे रहे सकारात्मक। क्वारंटीन के दौरान भी नियमित दिनचर्या को जारी रखें। शारीरिक दूरी जरूरी है, सामाजिक नहीं...

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Nimhans Bangalore doctor Dinakaran told mental and psychological effects of covid-19 and How a positive approach can give you a new life
कोरोनावायरस और मानसिक स्वास्थ्य - फोटो : For Refernce Only

विस्तार

देश में कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। जो संक्रमित हो चुके हैं या जिनके घर में संक्रमण है, वे अधिक मानसिक तनाव में भी हैं। महामारी के डर के बीच लोगों में मानसिक तनाव और अवसाद तक देखा जा रहा है। ऐसे में लोगों को कैसे संभालना चाहिए? मानसिक तनाव से खुद को और अपनों को कैसे बचा सकते हैं? इस पर बेंगलुरु के राष्ट्रीय मानसिक आरोग्य व स्नायु विज्ञान संस्थान (एनआईएमएचएमएस) यानी निम्हांस के मनोचिकित्सा विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. दिनाकरन से बात की अमर उजाला डॉट कॉम ने।

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Nimhans Bangalore doctor Dinakaran told mental and psychological effects of covid-19 and How a positive approach can give you a new life
निम्हांस के डॉक्टर दिनाकरन - फोटो : Amar Ujala

प्रश्न- कोविड-19 मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। कई रोगों में कोविड के बाद भी अवसाद और चिंता की शिकायत रहती है। ऐसे मरीजों के लिए आपकी क्या सलाह है?

महामारी या किसी दर्दनाक घटना के बाद मानसिक तनाव होना सामान्य और स्वाभाविक है। उदास या भयभीत महसूस करना किसी भी प्रतिकूलता के लिए एक सामान्य मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है। महामारी के दौरान, लोग संक्रमित होने से डरे हुए हैं साथ ही इस बात का भी भय है कि कहीं कोई उनका अपना न संक्रमित हो जाए? यह भय नींद न आने की परेशानी, चिंता, अवसाद, शराब या धूम्रपान के अधिक सेवन के रूप में प्रकट हो सकता है। फिर ऐसे लोग जो संक्रमित हैं और अस्पताल में आइसोलेशन में हैं वे घातक परिणामों के बारे में अत्यधिक भय का अनुभव कर सकते हैं। तनाव से गुजरने वाले हर किसी को एक विनाशकारी महामारी के दौरान उचित सलाह की आवश्यकता होती है। इस समय लोगों को एक-दूसरे का सहयोग और मनोबल बढ़ाने की जरूरत है। हमें भौतिक रूप से दूरी बनाए रखने की जरूरत है, जबकि सामाजिक रूप से हम एक साथ हो सकते हैं।

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प्रश्न- कोविड मरीजों के लिए सबसे कठिन होता है क्वारंटीन होना, 14-दिन की यह अवधि मरीज के मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ती है। इस दौरान बेहतर महसूस करने के लिए उन्हें क्या करना चाहिए?

इस संक्रामक महामारी का प्रबंधन करने के लिए, हमें कुछ सामाजिक प्रतिबंधों का पालन करने की आवश्यकता होती है। कुछ लोगों के लिए पृथक, अलग या आइसोलेशन में रहना कठिन हो सकता है। इनमें भावनाओं का मिश्रण हो सकता है। वे अपनी दिनचर्या की गतिविधियों को याद कर सकते हैं, अपने प्रियजनों से दूर होने की चिंता कर सकते हैं, गुस्सा करते हैं कि उनकी स्वतंत्रता प्रतिबंधित है, और उन्हें इस बात का भी डर सताता है कि वह एक प्राणघातक बीमारी की गिरफ्त में हैं। मुझे लगता है कि जब आप क्वारंटीन में होते हैं, तब भी एक निर्धारित दिनचर्या का पालन करने से मदद मिलती है। जैसे सुबह उठकर, कुछ हल्के व्यायाम या सांस लेने का व्यायाम करें। अच्छा पढ़ें, संगीत सुनें, एक अच्छी फिल्म देखें, वीडियो कॉल पर अपने दोस्तों या रिश्तेदारों से जुड़ें। यदि आपका स्वास्थ्य अनुमति देता है, तो अपना नियमित काम करें। खास बात यह भी है कि आपको सात से आठ घंटे की नींद अवश्य लेनी है। क्वारंटीन केंद्रों या अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मचारी मरीजों से उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं, उनके इलाज संबंधी कई विषयों पर बात कर सकते हैं। यदि मरीज अति गंभीर नहीं है तो कर्मचारी उन्हें इस बात की जानकारी दे सकते हैं कि उन्हें कब छुट्टी दी जा सकती है। इस तरह की बात से मरीजों में ठीक होने की उम्मीद जागेगी और बीमारी के संदर्भ में उनकी अनिश्चितता कम होगी।

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प्रश्न- बहुत सारे लोगों को मस्तिष्क भ्रम, एकाग्रता की हानि, याददाश्त कम होने की शिकायत आदि परेशानियां भी होती हैं, यह वायरस आपके मस्तिष्क के स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है?

केवल कोविड के मरीज ही नहीं, यहां तक कि सामान्य लोग भी हल्के मस्तिष्क भ्रम, खराब ध्यान, एकाग्रता की कमी और मामूली भूलने की बीमारी का सामना कर रहे हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शारीरिक थकान और मानसिक तनाव किसी की ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। अनियंत्रित तनाव शरीर में हार्मोनल असंतुलन की ओर ले जाता है जो मस्तिष्क की क्रियाशीलता को प्रभावित कर सकता है।

कोविड संक्रमण के मामले में, हम जानते हैं कि वायरस मस्तिष्क में प्रवेश कर सकता है। इसके अलावा, संक्रमण मरीज के गंध और स्वाद को भी बदल देता है। कुछ कमजोर व्यक्तियों के मस्तिष्क में यह रक्त के थक्के और मस्तिष्क में रक्तस्राव का कारण बन सकता है। लेकिन हम अभी इस बात पर शोध किया जा रहा है कि यह वायरस मस्तिष्क को कैसे प्रभावित कर सकता है।

प्रश्न- मरीजों की देखभाल करने वालों को भी संक्रमण का शिकार होना पड़ रहा है। डॉक्टर समय से अपनी ड्यूटी कर रहे हैं और वह निरंतर मरीजों के संपर्क में रहते हैं। उन्हें मानसिक स्वास्थ्य लिए क्या करना चाहिए?

महामारी का लंबा समय स्वास्थ्यकर्मियों पर भारी पड़ रहा है। पीपीई में लगातार काम करना मुश्किल है। कोई आश्चर्य नहीं, कई मरीजों की स्वास्थ्य देखभाल करने वाले कई कर्मचारी संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। हालांकि, चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करने का पूरा जिम्मा अस्पताल प्रबंधन का होना चाहिए, इसके लिए वह चिकित्सकों के कम घंटे के काम का रोस्टर, काम के बीच छोटे छोटे ब्रेक करने चाहिए, इससे उन्हें तनाव मुक्त होने में काफी मदद मिल सकती है। हमारे स्वास्थ्य कर्मियों को अपने काम या ड्यूटी के बीच आराम करने के लिए एक उचित समय मिलना चाहिए। उनकी व्यक्तिगत और परिवार संबंधी परेशानियों को समझना जाना चाहिए, कहीं वह किसी व्यक्तिगत समस्या से तो नहीं जूझ रहे। उनकी समस्याओं को सुनकर निवारण की कोशिश की जानी चाहिए। हम निमहंस में स्वास्थ्य सेवा और फ्रंटलाइन श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय टोल फ्री हेल्पलाइन सेवा चला रहे हैं।

प्रश्न- क्या ऐसा कोई प्रशिक्षण या अभ्यास है जो कोविड-19 से पीड़ित लोगों की मदद कर सकता है?

सकारात्मक दृष्टिकोण से व्यक्ति को तेजी से ठीक होने में मदद मिल सकती है। हालांकि हमने कोविड रोगियों पर किसी विशेष अभ्यास के प्रभाव का अध्ययन नहीं किया है, लेकिन पहले के अध्ययनों ने सुझाव दिया था कि नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, योग, ध्यान और प्राणायाम शरीर और दिमाग पर अच्छा प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए, यदि स्वास्थ्य अनुमति देता है, तो एक कोविड रोगी कुछ श्वांस और स्ट्रेचिंग अभ्यास कर सकते हैं।

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