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कोर्ट ने कहा- सज्जन होते हैं हाथी, इंसानों को उन्हें रास्ता देना होगा, परेशानी खड़ी करने नहीं देंगे

Thu, 23 Jan 2020 04:23 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 23 Jan 2020 04:23 AM IST
सार

  • नीलगिरि वन क्षेत्र मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया रुख
  • संरक्षित क्षेत्र में बने होटलों-रिसॉर्ट्स को सील करने के खिलाफ दायर थी याचिका
  • सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि वह हाथियों के रास्ते में कोई बाधा नहीं आने देगा
  • रास्ते में अवरोध पर अंकुश नहीं लगाया तो हाथी विलुप्त हो जाएंगे : सुप्रीम कोर्ट

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Nilgiri Forest Area Case : Supreme Court stated it will not allow obstructions in way of elephants
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स

विस्तार

तमिलनाडु के नीलगिरि वन क्षेत्र में बने रिसॉर्ट्स के मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि वह हाथियों के रास्ते में कोई बाधा नहीं आने देगा। कोर्ट ने कहा कि इंसानों को हाथी को रास्ता देना ही होगा। कोर्ट ने संकेत दिया कि वह वन क्षेत्र स्थित होटलों और रिसॉर्ट्स को सील करने के मामले में शिकायतों को सुनने के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में समिति बना सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने नौ अगस्त, 2018 को नीलगिरि के इको-सेंस्टिव जोन में बने 27 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद करने का आदेश दिया था। बुधवार को सीजेआई एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच ने होटल-रिसॉर्ट मालिकों की याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान बेंच ने कहा, हम संवेदनशील इको सिस्टम के मामले में सुनवाई कर रहे हैं। अगर रास्ते में अवरोध पर अंकुश नहीं लगा तो हाथी विलुप्त हो जाएंगे। 
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शीर्ष अदालत ने कहा, हम हाथियों के रास्ते में कोई रोकटोक नहीं चाहते। इंसानों को उन्हें रास्ता देना होगा। कोर्ट ने साफ किया कि वह संरक्षित क्षेत्र में बने 30 से ज्यादा पुराने व्यावसायिक ढांचों को हटाने पर मुआवजा देने पर विचार करेगा। इससे पहले याचिकाकर्ताओं के वकील सलमान खुर्शीद ने कहा था कि निर्माण संरक्षित क्षेत्र में नहीं निजी भूमि पर था।
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