{"_id":"6780f3593d9c4ba0c9094fa4","slug":"nikhil-kamath-pm-modi-interviewers-in-podcast-wtf-is-zerodha-founder-youngest-billionaire-india-know-journey-2025-01-10","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Nikhil Kamath: 16 की उम्र में पढ़ाई छोड़ी, 8000 की तनख्वाह पर की नौकरी, जीरोधा शुरू कर बने थे सबसे युवा अरबपति","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Nikhil Kamath: 16 की उम्र में पढ़ाई छोड़ी, 8000 की तनख्वाह पर की नौकरी, जीरोधा शुरू कर बने थे सबसे युवा अरबपति
Fri, 10 Jan 2025 03:45 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Fri, 10 Jan 2025 03:45 PM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
जीरोधा संस्थापक के साथ पॉडकास्ट में पीएम नरेंद्र मोदी।
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार किसी पॉडकास्ट में हिस्सा लिया है। इसका खुलासा उन्होंने खुद एक हालिया पॉडकास्ट- डब्ल्यूटीएफ इज में किया है। इस पॉडकास्ट को चलाने वाले शख्स का नाम है निखिल कामत, जिनका नाम शायद देश के बाकी पॉडकास्टर्स की तरह लोकप्रिय न हो, लेकिन स्टॉक ट्रेडिंग और बिजनेस की दुनिया में उनके जबरदस्त चर्चे हैं। वजह है उनका ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म- जीरोधा (Zerodha), जो कि स्टॉक्स में पैसे लगाने वालों के लिए ट्रेडिंग और ब्रोकरेज का काम करता है। वह भी ऑनलाइन यानी ट्रेडर्स को कभी भी-कहीं से भी शेयरों में पैसा लगाने की सुविधा देने वाला प्लेटफॉर्म।हालांकि, निखिल कामत की लोकप्रियता सिर्फ जीरोधा के सह-संस्थापक के तौर पर नहीं है। बल्कि इसलिए भी है, क्योंकि वह भारत के सबसे कम उम्र में अरबपति बनने वाले शख्स हैं। निखिल कामत की मौजूदा संपत्ति 3.3 अरब डॉलर (करीब 28 हजार करोड़ रुपये) आंकी गई है। उनके प्लेटफॉर्म जीरोधा पर भी 2024 के अंत तक 1 करोड़ से ज्यादा यूजर्स थे, जो कि इसे भारत के सबसे बड़े ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में से एक बनाता है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर निखिल कामत हैं कौन? उनका अब तक का सफर क्या रहा है? उन्होंने कितनी पढ़ाई की और जीरोधा खोलने की कहानी क्या रही है? उन्होंने ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के अलावा और कौन से व्यापारों में निवेश किया है और इसके अलावा उनके पॉडकास्टर बनने के पीछे क्या वजह है? आइये जानते हैं...
कौन हैं निखिल कामत?
क्या रहा है निखिल कामत का अब तक का सफर?
निखिल ने अपने सफर को लेकर कई इंटरव्यूज में बात की है। कामत के मुताबिक, उनके पिता के बैंक में होने और उनके ट्रांसफरों की वजह से उन्हें कई जगहों पर रहने का मौका मिला। हालांकि, 9 वर्ष की उम्र में उनका परिवार आखिरकार बंगलूरू में बस गया। खुद कामत का कहना है कि वह औपचारिक शिक्षा में रुचि नहीं रखते थे और स्कूल को नापसंद करते रहे।
इस बीच निखिल ने स्कूल में रहते हुए ही तेजपाल नाम के अपने एक दोस्त के साथ इस्तेमाल किए हुए फोन को खरीदने और बेचने का काम शुरू कर दिया। इसका पता जब उनकी मां को चला तो उन्हें लगा कि निखिल ने पढ़ाई छोड़ दी और फोन के बिजनेस में लग गया है। इसके चलते मां ने उनके फोन को टॉयलेट में बहा दिया। निखिल के मुताबिक, उनका स्कूल भी उन्हें नहीं चाहता था और उन्हें बोर्ड्स देने से रोकने की कोशिश हुई। उन्होंने इस घटना के बाद 16 साल की उम्र में स्कूल छोड़ दिया।
निखिल ने अपने सफर को लेकर कई इंटरव्यूज में बात की है। कामत के मुताबिक, उनके पिता के बैंक में होने और उनके ट्रांसफरों की वजह से उन्हें कई जगहों पर रहने का मौका मिला। हालांकि, 9 वर्ष की उम्र में उनका परिवार आखिरकार बंगलूरू में बस गया। खुद कामत का कहना है कि वह औपचारिक शिक्षा में रुचि नहीं रखते थे और स्कूल को नापसंद करते रहे।
इस बीच निखिल ने स्कूल में रहते हुए ही तेजपाल नाम के अपने एक दोस्त के साथ इस्तेमाल किए हुए फोन को खरीदने और बेचने का काम शुरू कर दिया। इसका पता जब उनकी मां को चला तो उन्हें लगा कि निखिल ने पढ़ाई छोड़ दी और फोन के बिजनेस में लग गया है। इसके चलते मां ने उनके फोन को टॉयलेट में बहा दिया। निखिल के मुताबिक, उनका स्कूल भी उन्हें नहीं चाहता था और उन्हें बोर्ड्स देने से रोकने की कोशिश हुई। उन्होंने इस घटना के बाद 16 साल की उम्र में स्कूल छोड़ दिया।
निखिल का कहना है कि इस फैसले के बाद उनके माता-पिता का सिर्फ यही कहना था कि ऐसा कुछ मत करना, जिससे हमें शर्मिंदा होना पड़े। माता-पिता को लगता था कि मेरे गणित और चेस में अच्छा होने की वजह से मैं स्मार्ट था, लेकिन शायद यह उनकी गलतफहमी थी।
जीरोधा के सह-संस्थापक निखिल ने बताया कि उन्हें जल्द ही एक कॉल सेंटर में नौकरी भी मिल गई। तब उनकी उम्र 17 साल की ही थी। उनकी शिफ्ट शाम को 4 बजे से 11 बजे तक होती थी। इसलिए सुबह का समय उन्हें स्टॉक ट्रेडिंग के लिए मिल जाता था। 18 वर्ष की उम्र तक वे कायदे से स्टॉक ट्रेडिंग करने लगे थे। निखिल के मुताबिक, इस दौरान उनके पिता ने उन्हें अपनी सेविंग्स दीं और उसके प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी। निखिल कहते हैं- 'यह उनका आंख मूदकर मुझ पर भरोसा था।'
यहां तक कि निखिल ने अपने कॉल सेंटर के मैनेजर को भी उनके पैसों का प्रबंधन करवाने के लिए मना लिया। मैनेजर ने भी उनके दफ्तर न आने के बावजूद उनकी अटेंडेंस की समस्या नहीं होने दी। उन्हें तनख्वाह भी मिलती रही। इसकी वजह यह थी कि निखिल तब तक अपने ऑफिस के कई लोगों के पैसे को मैनेज कर रहे थे।
यहां तक कि निखिल ने अपने कॉल सेंटर के मैनेजर को भी उनके पैसों का प्रबंधन करवाने के लिए मना लिया। मैनेजर ने भी उनके दफ्तर न आने के बावजूद उनकी अटेंडेंस की समस्या नहीं होने दी। उन्हें तनख्वाह भी मिलती रही। इसकी वजह यह थी कि निखिल तब तक अपने ऑफिस के कई लोगों के पैसे को मैनेज कर रहे थे।
कामत एंड एसोसिएट्स खोलने के पीछे दोनों भाइयों की एक ही मंशा थी, ब्रोकरेज से मिले पैसे पर अपना हिस्सा किसी और के पास न जाने देना। निखिल ने बताया कि इससे पहले वे एक कंपनी में सब-ब्रोकर रहे। ऐसे में जिन-जिन क्लाइंट्स के लिए वे ब्रोकरेज का काम करते थे, उनसे हासिल हुए फायदे की जो राशि उन्हें क्लाइंट्स से मिलती थी, उसका 40 फीसदी उन्हें कंपनी को देना पड़ता था। यह घाटे का सौदा था, क्योंकि ब्रोकरेज कराने वाले शख्स को ही इसका टैक्स भी देना होता है। ऐसे में निखिल और नितिन ने कामत एंड एसोसिएट्स की शुरुआत की।
निखिल ने अल-जजीरा को दिए इंटरव्यू में बताया कि कामत एंड एसोसिएट्स में उनके भाई ने ब्रोकरेज का काम संभाला। वहीं उन्होंने खुद ट्रेडिंग पर ध्यान केंद्रित किया। यही कंपनी का प्राथमिक बिजनेस रहा, क्योंकि अच्छी ट्रेडिंग से ब्रोकरेज की संभावना बनती है और यह व्यापार आगे बढ़ता रहा। बाद में कामत एंड एसोसिएट्स ही जीरोधा बनी। निखिल के मुताबिक, जीरोधा का मतलब है 'जीरो+रोध, यानी कोई अवरोध नहीं।'
निखिल ने अल-जजीरा को दिए इंटरव्यू में बताया कि कामत एंड एसोसिएट्स में उनके भाई ने ब्रोकरेज का काम संभाला। वहीं उन्होंने खुद ट्रेडिंग पर ध्यान केंद्रित किया। यही कंपनी का प्राथमिक बिजनेस रहा, क्योंकि अच्छी ट्रेडिंग से ब्रोकरेज की संभावना बनती है और यह व्यापार आगे बढ़ता रहा। बाद में कामत एंड एसोसिएट्स ही जीरोधा बनी। निखिल के मुताबिक, जीरोधा का मतलब है 'जीरो+रोध, यानी कोई अवरोध नहीं।'
कैसे सफल बनाया अपना बिजनेस?
निखिल ने बताया कि उस दौरान शेयर खरीदने-बेचने के लिए जो पैसे लगते थे, उस कुल रकम का बड़ा हिस्सा इस खरीद और बिक्री को संभव बनाने वाली कंपनी को ब्रोकरेज के तौर पर देना पड़ता था। यह पूरे बाजार का नियम था। ऐसे में यह ट्रेडर्स के लिए कम फायदे वाली बात थी। हमने लोगों को यह सुविधा दी कि वह चाहे कितने के भी शेयर खरीदें या बेचें, उनसे उस रकम का कुछ फीसदी हिस्सा नहीं मांगा जाएगा। बल्कि हमने सिर्फ 20 रुपये प्रति लेन-देन का भाव तय किया। इससे आम लोग और कई बिजनेस भी हमसे जुड़ते चले गए, क्योंकि यह रकम बड़े से बड़े ट्रांजैक्शन के लिए काफी कम थी।
निखिल बताते हैं कि हमें इसके लिए काफी प्रचार भी मिला है। इसके चलते उन्होंने लंबे समय तक जीरोधा के प्रचार पर पैसा नहीं खर्चा किया, न ही कोई विज्ञापन दिया। हालांकि, हमें जितना भी फायदा हुआ, उसके जरिए हमने अपने ऑनलाइन इंटरफेस को बेहतर बनाया। यह छह-सात वर्षों में जीरोधा के आगे बढ़ने में अहम तैयारी साबित हुई।
निखिल ने बताया कि उस दौरान शेयर खरीदने-बेचने के लिए जो पैसे लगते थे, उस कुल रकम का बड़ा हिस्सा इस खरीद और बिक्री को संभव बनाने वाली कंपनी को ब्रोकरेज के तौर पर देना पड़ता था। यह पूरे बाजार का नियम था। ऐसे में यह ट्रेडर्स के लिए कम फायदे वाली बात थी। हमने लोगों को यह सुविधा दी कि वह चाहे कितने के भी शेयर खरीदें या बेचें, उनसे उस रकम का कुछ फीसदी हिस्सा नहीं मांगा जाएगा। बल्कि हमने सिर्फ 20 रुपये प्रति लेन-देन का भाव तय किया। इससे आम लोग और कई बिजनेस भी हमसे जुड़ते चले गए, क्योंकि यह रकम बड़े से बड़े ट्रांजैक्शन के लिए काफी कम थी।
निखिल बताते हैं कि हमें इसके लिए काफी प्रचार भी मिला है। इसके चलते उन्होंने लंबे समय तक जीरोधा के प्रचार पर पैसा नहीं खर्चा किया, न ही कोई विज्ञापन दिया। हालांकि, हमें जितना भी फायदा हुआ, उसके जरिए हमने अपने ऑनलाइन इंटरफेस को बेहतर बनाया। यह छह-सात वर्षों में जीरोधा के आगे बढ़ने में अहम तैयारी साबित हुई।
दिसंबर 2024 में हुरुन की तरफ से जारी एक रिपोर्ट में कहा गया कि 14 वर्ष पुरानी जीरोधा की मौजूदा वैल्यू 7.7 अरब डॉलर के करीब है। जो कि भारतीय रुपयों में तब 64 हजार 800 करोड़ के बराबर थी। चौंकाने वाली बात यह है कि सितंबर 2023 तक उनकी कंपनी की वैल्यू 3.6 अरब डॉलर (करीब 27-28 करोड़ रुपये) थी।
पॉडकास्ट की शुरुआत कब हुई, इसमें कौन-कौन आया?
मार्च 2023 में निखिल कामत ने अपना पॉडकास्ट 'WTF is' लॉन्च किया। 14 मार्च को उनके शो का पहला एपिसोड लॉन्च हुआ था। दिसंबर 2023 में स्पॉटिफाई पर उनका वीडियो पॉडकास्ट शो दुनिया के सबसे ज्यादा देखे-सुने जान वाले पॉडकास्ट्स में शामिल था। इस शो में वे इंडस्ट्री के बड़े चेहरों से लेकर कई विशेषज्ञों को भी बुलाते हैं और तकनीक, सोशल मीडिया, इलेक्ट्रिक वाहनों, दर्शन और गेमिंग से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा करते हैं।
मार्च 2023 में निखिल कामत ने अपना पॉडकास्ट 'WTF is' लॉन्च किया। 14 मार्च को उनके शो का पहला एपिसोड लॉन्च हुआ था। दिसंबर 2023 में स्पॉटिफाई पर उनका वीडियो पॉडकास्ट शो दुनिया के सबसे ज्यादा देखे-सुने जान वाले पॉडकास्ट्स में शामिल था। इस शो में वे इंडस्ट्री के बड़े चेहरों से लेकर कई विशेषज्ञों को भी बुलाते हैं और तकनीक, सोशल मीडिया, इलेक्ट्रिक वाहनों, दर्शन और गेमिंग से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा करते हैं।
इस पॉडकास्ट में निखिल अब तक कई बड़े कलाकारों और चेहरों को बुला चुके हैं। इनमें कॉमेडियन तन्मय भट्ट, बायोकॉन की संस्थापक किरण मजूमदार शॉ, अभिनेता सुनील शेट्टी-तारा सुतारिया, रितेश अग्रवाल और फिल्मी दुनिया से जुड़े रॉनी स्क्रूवाला, जेप्टो के संस्थापक आदित पलीचा और कैवल्य वोहरा और अमिताभ बच्चन की नातिन नव्या नवेली तक के नाम शामिल हैं।
इसके अलावा अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पहली बार किसी पॉडकास्ट में बुलाकर कामत का यह कार्यक्रम काफी चर्चित है। दोनों के बीच पॉडकास्ट में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इस पॉडकास्ट में हुई बातों को आप यहां पढ़ सकते हैं।
इसके अलावा अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पहली बार किसी पॉडकास्ट में बुलाकर कामत का यह कार्यक्रम काफी चर्चित है। दोनों के बीच पॉडकास्ट में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इस पॉडकास्ट में हुई बातों को आप यहां पढ़ सकते हैं।