NIA Raids On PFI: सिमी की तरह PFI पर लग सकता है बैन, गृह मंत्रालय ने जुटाए ठोस सबूत
NIA Raids On PFI: विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि विभिन्न जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय गृह मंत्रालय पीएफआई पर बैन लगाने की पूरी तैयारी कर चुका है। सबूतों को लेकर कानूनी जानकारों से सलाह ली जा रही है। ताकि जब पीएफआई के पदाधिकारी अदालत का दरवाजा खटखटाएं, तो उन्हें सरकार के किसी कमजोर बिंदु के आधार पर कोई राहत न मिल जाए...
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केंद्र सरकार, स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया यानी सिमी की तरह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर प्रतिबंध लगा सकती है। गुरुवार को दर्जनभर राज्यों में एक साथ हुई एनआईए व सहयोगी एजेंसियों की छापेमारी में जो कुछ निकलकर सामने आया है, केंद्रीय गृह मंत्रालय उसकी मदद से इस संगठन को प्रतिबंध के दायरे में ला सकता है। एनआईए द्वारा पीएफआई के खिलाफ ठोस सबूत जुटाए गए हैं। ये मामला इतना गंभीर है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एनआईए के छापों के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और एनआईए चीफ सहित विभिन्न एजेंसियों के अफसरों के साथ बैठक करनी पड़ी।
कानूनी जानकारों से ली जा रही सलाह
विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि विभिन्न जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय गृह मंत्रालय पीएफआई पर बैन लगाने की पूरी तैयारी कर चुका है। जांच एजेंसियों के सबूतों को लेकर कानूनी जानकारों से सलाह ली जा रही है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि बाद में जब पीएफआई के पदाधिकारी अदालत का दरवाजा खटखटाएं, तो उन्हें सरकार के किसी कमजोर बिंदु के आधार पर कोई राहत न मिल जाए। केंद्र सरकार को 2008 में विशेष न्याय अधिकार के आधार पर सिमी पर लगाया प्रतिबंध हटाना पड़ा था। हालांकि कुछ समय बाद सर्वोच्च अदालत के जरिए उक्त संगठन दोबारा से प्रतिबंध के दायरे में आ गया था।
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर पीएफआई के खिलाफ जो अहम प्वाइंट एकत्रित किए हैं, उनमें इस संगठन पर कई तरह के गंभीर आरोप लगे हैं। इन आरोपों में मुख्यतया देश में तोड़फोड की साजिश रचना, आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देना, अखंडता को नुकसान पहुंचाना, भारत को इस्लामिक राज्य में बदलने का प्रयास, युवाओं को गुमराह कर उन्हें देशद्रोह जैसे अपराध की राह पर ले जाना, विदेश से मदद लेकर गैर-कानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देना, सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा कर राष्ट्र की सुरक्षा को जोखिम में डालना, आदि शामिल हैं।
पीएफआई के मामले में अब हर तरह की जानकारी जुटाई गई है। अदालत में जांच एजेंसियों द्वारा पीएफआई के मामले में जितनी भी चार्जशीट दाखिल की गई हैं, उन्हें भी आधार बनाया गया है। देश में पांव-पसार रहे आतंकी संगठनों के साथ पीएफआई का कथित संबंध, इसे भी फाइलों में जगह मिली है। अगर इस संगठन पर प्रतिबंध लगता है तो इसे मिलने वाली विदेशी आर्थिक मदद पर रोक लग सकती है। इससे देश में उक्त संगठन के मार्फत हो रही, गैर कानूनी गतिविधियों का खत्म करने में मदद मिलेगी।
2001 में पहली बार सिमी पर लगा प्रतिबंध
सिमी भी इसी तरह का संगठन था। शुरू में इसके द्वारा भी वही दावा किया गया, जो आज पीएफआई कर रहा है। यानी खुद को सामाजिक संगठन बता रहा था। सिमी की स्थापना अप्रैल 1977 में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुई थी। बाद में सामने आया कि इस संगठन का मकसद भारत को एक इस्लामिक राज्य में परिवर्तित करना था। संगठन के पदाधिकारी कहते थे कि अभी भारत की आजादी बाकी है। जब इस संगठन की तोड़फोड़ वाली गतिविधियां बढ़ने लगीं, तो 2001 में पहली बार सिमी को गैरकानूनी संगठन घोषित कर दिया गया। उसके बाद कई दफा यह संगठन प्रतिबंधित हुआ है। फरवरी 2014 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने इस संगठन पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था।
2019 में एनडीए सरकार ने भी इस प्रतिबंध को बरकरार रखा। यह कदम इसलिए उठाया गया, क्योंकि देश में हुई कई आतंकी घटनाओं में सिमी के शामिल होने की बात सामने आई थी। गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया कि अब इस संगठन को प्रतिबंधित नहीं किया गया, तो सिमी अपनी विध्वंसक गतिविधियों को जारी रखेगा। इससे धर्मनिरपेक्ष ढांचे को नुकसान पहुंचेगा। आरोप लगा कि यह संगठन सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा कर देश की अखंडता और सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहा है। गृह मंत्रालय ने तब सिमी की संलिप्तता वाले 58 मामलों को सूचीबद्ध किया था। केंद्र सरकार ने 2017 में बिहार के गया में धमाका, 2014 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुआ विस्फोट और 2014 में भोपाल की जेल ब्रेक होना शामिल रहा।
बड़े आतंकी संगठनों के साथ जुड़ने का प्रयास
उस वक्त जांच एजेंसियों के हवाले से कहा गया कि सिमी अपना विस्तार आतंकी संगठनों तक कर रहा है। बड़े आतंकी संगठन, सिमी से जुड़ने लगे थे। जांच में सिमी को आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के बहुत करीब बताया गया। केरल सरकार ने साल 2012 में पीएफआई को सिमी का ही दूसरा रूप कहा था। ये अलग बात है कि उसके बाद पीएफआई की सबसे ज्यादा गतिविधियां केरल में ही देखने को मिली। केरल हाईकोर्ट ने अपनी एक टिप्पणी में इस संगठन को आतंकी समूह बता दिया था। झारखंड सरकार ने भी पीएफआई को प्रतिबंधित किया था। बाद में झारखंड हाईकोर्ट ने प्रतिबंध हटाने के आदेश दिए थे। संथाल परगना में अवैध खनन में पीएफआई का नाम सामने आया। 2018 में प्रवर्तन निदेशालय ने पीएफआई और एसडीपीआई के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। अभी भी मनी लॉड़्रिंग केस की जांच चल रही है। पहले भी पीएफआई पर बैन लगाने की कोशिश हुई, लेकिन ठोस साक्ष्यों के अभाव में कदम पीछे खींच लिया गया। इस बार पीएफआई के ख़िलाफ जांच एजेंसियों द्वारा ठोस सबूत होने का दावा किया जा रहा है।